इन तस्वीरों को देखकर परेशान हो जाएगा पाकिस्तान!
बीजिंग। यूं तो पाकिस्तान और चीन का रिश्ता किसी से भी छिपा नहीं है और दोनों ही एक-दूसरे के काफी करीबी है। लेकिन पिछले दिनों चीन में हुए तीन भयंकर ब्लास्ट्स के बाद चीन को भी यह बात समझ आ गई है कि अगर अपने देश में पनप रहे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़नी है तो भारत का सहयोग करना पड़ेगा।
इसी मकसद को लेकर एक बार फिर चीन और भारत की सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास की शुरुआत हो चुकी है। सोमवार से शुरू हुआ यह युद्धाभ्यास 22 अक्टूबर तक चलेगा। इस एक्सरसाइज को 'हैंड टू हैंड-2015' नाम दिया गया है।
इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ अपने अनुभवों को एक दूसरे के साथ बांटेंगे। चीन में भारत के दूतावास की ओर से इस युद्धाभ्यास से जुड़ी एक प्रेस रिलीज जारी की गई है।
इस रिलीज के मुताबिक ईस्टर्न कमांड की नगा रेजीमेंट की दूसरी बटालियन के 175 जवानों का एक दल अभ्यास में शामिल हो रहा है। यह दल इंडियन एयरफोर्स के आईएल-76 एयरक्राफ्ट के जरिए रविवार को चीन के केकनमिंग पहुंचा है।

पहली बार शामिल हो रही है नागा रेजीमेंट
भारत ने पहली बार इन अभ्यासों में भाग लेने के लिए अपनी नगा रेजीमेंट के सैन्यबलों को भेजा है।

चीन के चेंगदु में जारी अभ्यास
चीन के चेंगदु मिलिट्री रीजन की 14 कोर के जवान इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं।

ताकि बनी रहे मित्रता
भारतीय दूतावास की ओर से जारी प्रेस रिलीज बताया गया है कि इस अभ्यास का मकसद संयुक्त संचालन क्षमता को विकसित करना, आतंकवाद निरोधक अभियानों के मामले में उपयोगी अनुभव साझे करना और भारत एवं चीन की सेनाओं के बीच मित्रवत संबंधों को बढ़ावा देना है।

शामिल हुए भारतीय राजदूत
इस कार्यक्रम में चीन में भारतीय दूत अशोक के कांता और पर्यवेक्षक प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह शामिल हुए और भाग ले रहे सैन्य बलों को संबोधित किया। चीन की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल झोउ शियाओझोउ ने सैन्य बलों को संबोधित किया।

पांचवी बार कर रहे हैं संयुक्त युद्धाभ्यास
दोनों पक्षों के बीच अभ्यासों का यह पांचवां दौर है। पहली बार चीन के युन्नान प्रांत में 2007 में, दूसरी बार कर्नाटक के बेलगाम में 2008, तीसरी बार चीन के सिचुआन में 2013 और चौथी बार पुणे में 2014 में यह अभ्यास हुआ था।












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