चीन के बड़े शहरों में कोविड प्रतिबंधों में दी गई ढील, भारी प्रदर्शन से सामने झुक गये शी जिनपिंग
चीन लगातार अपनी सख्त ज़ीरो कोविड पॉलिसी के साथ आगे बढ़ रहा है और हर 48 घंटे में लोगों को कोविड टेस्ट करवाना होता है। हालांकि, अगले साल मार्च के बाद ही देश खुलने की संभावना है।

COVID-19 in China: पिछले एक हफ्ते से चले आ रहे भारी विरोध प्रदर्शन के बीच चीनी शहरों में कोविड प्रतिबंधों में नरमी दी जाने लगी है और बड़े शहरों में कई तरह के प्रतिबंध हटा लिए गये हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की राजधानी बीजिंग समेत एक और बड़े शहर शेन्जेन में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने के लिए कोविड निगेटिव टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं होगी। चीन की सरकार ने कोविड प्रतिबंधों में उस वक्त ढील दी है, जब देश में पहली बार कोविड संक्रमण के मामले उच्चतम स्तर तक पहुंच चुका है, लेकिन पिछले डेढ़ सालों से लगाकार सख्ततम प्रतिबंधों की वजह से चीन के नागरिक परेशान हो चुके थे और उन्हें सड़कों पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कोविड प्रतिबंधों में थोड़ी ढील
दक्षिणी शेन्ज़ेन में अधिकारियों ने शनिवार को कहा है कि, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने या फिर सार्वजनिक जगहों पर जाने के लिए अब कोविड निगेटिव टेस्ट करवाने या कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट दिखाने की जरूरत नहीं होगी। आपको बता दें कि, अभी तक चीन में हर बार सार्वजनिक परिवहन सेवा का इस्तेमाल करने पर कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य था, लिहाजा सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले लोगों को हर दूसरे दिन कोविड टेस्ट करवाना पड़ता था, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त पैसे खर्च करने के साथ साथ कई घंटे लाइन में लगना पड़ता था, इससे भी लोग काफी परेशान हो गये थे। कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट दिखाने से छूट दक्षिणी शहर चेंगदू और उत्तरी महानगर तियानजिन में भी दे दी गई है। वहीं, बीजिंग शहर में अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि, सोमवार से शुरू होने वाले सार्वजनिक परिवहन के लिए अब नकारात्मक COVID-19 टेस्ट रिजल्ट की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, शॉपिंग मॉल और पार्क में जाने के लिए अभी भी 48 घंटे के अंदर वाला कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य रखा गया है।

चीन के कई शहरों में हुआ है भारी प्रदर्शन
आपको बता दें कि, चीन के कई शहरों में बीते एक हफ्ते में भारी प्रदर्शन किया गया है और राजधानी बीजिंग में बनाए गये कोविड टेस्ट सेंटर्स को तोड़ने का वीडियो भी वायरल हुआ है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि सराकर को ये फैसले पहले ही ले लेने चाहिए थे और लोगों के धैर्य का परीक्षण नहीं करना चाहिए था। हालांकि, कोविड प्रतिबंधों में मामूली राहत कुछ ही बड़े शहरों में दी गई है और बाकी चीन में अभी तक कोई राहत नहीं दी गई है। बाकी चीनी शहरों में अभी भी सार्वजनिक जगहों पर कोविड टेस्ट की जरूरत होगी और उन्हें हर 48 घंटे के बाद कोविड टेस्ट करवाने के लिए 2-4 घंटे लाइन में लगना होगा। कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट लेने के बाद ही वो काम पर जा सकते हैं, या फिर अपने रोजमर्रा का काम कर सकते हैं। चीन में कोविड टेस्ट बूथ दिन रात खुले होते हैं और हर वक्त बूथ के सामने 100/200 लोगों का जमावड़ा लगा रहता है।

मार्च के बाद ही खुल पाएगा देश
चीन पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है, कि चीन के बाजार अगले साल मार्च से पहले नहीं खुल पाएंगे, क्योंकि चीन ने अब बुजुर्गों का टीकाकरण शुरू किया है और उसके परिमाण जानने के बाद ही बाजारों के खुलने की संभावना है। चीन सरकार का आकलन है, कि अगर चीन को पूरी तरह से खोल दिया गया और सारे कोविड प्रतिबंध हटा दिए गये, तो कम से कम 13 लाख से 20 लाख लोगों की मौतें हो सकती हैं। वहीं, चीनी स्वास्थ्य विभाग तेजी से बुजुर्गों का टीकाकरण कर रहा है, ताकि देश खुलने की स्थिति में होने वाली मौतों पर काफी हद तक कंट्रोल कर सके। आपको बता दें कि, चीन ने शनिवार को 32,827 नये कोविड मामलों की जानकारी दी है। वहीं, शुक्रवार तक चीन ने कोविड से मरने वालों का आंकड़ा 5,233 दिया है।

WHO ने जताई खुशी
वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ के इमरजेंसी डायरेक्टर डॉ. माइकल रेयान ने शुक्रवार को कहा कि, चीन ने कोविड प्रतिबंधों में कुछ ढील दी है और ये देखना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि, "यह वास्तव में महत्वपूर्ण है, कि सरकारें अपने लोगों की सुनें, जब लोग दर्द में हों"। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को बीजिंग में यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान प्रदर्शन की वजह युवाओं की निराशा बताया। उन्होंने कहा कि, महामारी की वजह से निराश युवाओं ने प्रदर्शन किया है, लेकिन उन्होंने यूरोपीय अधिकारियों को बताया कि, कोविड के ओमिक्रॉन वेरिएंट पर कंट्रोल करने के लिए सरकार ने व्यापक प्रतिबंध लगाए थे। चीन का कहना है कि, अभी हाल ही में ओमिक्रॉन के खतरों को कम करना शुरू किया गया है और अगर ये काबू में नहीं रहता, तो देश में भारी तादाद में लोगों की मौतें हो सकती थीं।












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