रूसी समकक्ष लावरोव से मिले भारत के विदेश मंत्री, आखिर किस बात पर नाराज हुए एस जयशंकर?

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस दौरे पर हैं। इस दौरान उनकी अपने रूसी समकक्ष विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक से जुड़े मुद्दों पर वार्ता में चर्चा की गई।

बुधवार को 'मेड इन इंडिया' कार्यक्रम के हिस्से के रूप में सैन्य उत्पादों के उत्पादन की भारत की पहल का समर्थन करने की रूस की इच्छा जताई है। लावरोव ने कहा कि उन्होंने और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक के दौरान कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच सहयोग का विस्तार होगा।

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इस दौरान दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारे के तहत चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मार्ग की स्थापना पर भी चर्चा की। आपको बता दें कि यह प्रस्तावित समुद्री गलियारा समुद्री कारोबार बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है, जिससे दोनों देशों की बीच परिवहन समय 16 दिन कम हो सकता है।

अभी यूरोप के रास्ते भारत से सुदूर पूर्व रूस तक माल परिवहन में तकरीबन 40 दिनों का समय लगता है जो इस कॉरिडोर के बनने से घटकर 24 दिन ही रह जाएगा। मुंबई और रूस के सेंट पीटर्सबर्ग के बीच मौजूदा व्यापार मार्ग 8,675 समुद्री मील का है और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग में यह दूरी 5,600 समुद्री मील रह जाएगी।

जयंशकर के साथ बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि हमने आधुनिक हथियारों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की, जिसमें सैन्य और तकनीकी सहयोग शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग रणनीतिक प्रकृति की है। सहयोग को प्रगाढ़ करना दोनों राष्ट्रों के हितों में हैं। साथ ही ये सभी यूरेशियन महाद्वीप में सुरक्षा के हितों से मेल खाता है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी को पता है कि भारतीय सहयोगियों की उनके सैन्य और तकनीकी संबंधों में विविधता लाने के इच्छा का सम्मान करते हैं। इसलिए हम मेड इन इंडिया कार्यक्रम के तहत सैन्य उत्पादों का उत्पादन करने का समर्थन करते हैं।

बैठक में हमने ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने की अपनी आकांक्षा की पुष्टि की है। लावरोव ने कहा कि मैं और मेरे समकक्ष जयशंकर दोनों देशों के संबंधों के कानूनी ढांचे का विस्तार करने पर भी सहमत हुए। आज हमने इसको लेकर कई कदम उठाए हैं, जिसमें उत्तरी समुद्री मार्ग के विस्तार पर सहयोग शामिल हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस संबंध बेहद प्रगाढ़ हैं। ये रिश्ते रणनीतिक अभिसरण, भू-राजनीतिक हितों पर आधारित हैं। ब्रिक्स सहित कई अतंरराष्ट्रीय मुद्दों के संबंध में राजनीतिक सहयोग पर चर्चा करने का समय हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि इस साल वह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से सांतवीं बार मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पुतिन भी लगातार संपर्क में रहे हैं।

जयशंकर ने कहा कि हम इस तथ्‍य की प्रशंसा करते हैं कि हमारा व्‍यापार अपने सर्वोच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया है। यह इस साल 50 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और यह इस साल और बढ़ सकता है। हालांकि भारत-रूस के बीच व्यापार असंतुलन को लेकर एस जयशंकर ने रूस पर निशाना भी साधा।

उन्होंने अपने रूसी समकक्ष को सुनाते हुए कहा कि यह महत्‍वपूर्ण है कि दोनों देशों के बीच व्‍यापार में संतुलन बना रहे। जयशंकर ने कहा कि व्‍यापार में संतुलन बने रहने से यह लगातार बना रहता है और यह रूसी बाजार तक सही पहुंच मुहैया कराता है।

आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच व्‍यापार पूरी तरह से रूस के पक्ष में झुका हुआ है। भारत और रूस के बीच अप्रैल से दिसंबर 2022 के बीच रूस के भारत को निर्यात 32.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया लेकिन इसमें रूस को भारत का कुल निर्यात 1.87 अरब डॉलर ही है।

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