J-7 से J-20 तक: चीन ने US और रूस से टेक्नोलॉजी चुराकर बनाए ये 8 फाइटर जेट्स, बना खतरनाक ताकत

Chinese Fighter Jets: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की मीडिया, लगातार दुनिया को चीन के तेजी से उभरते एयरलाइंस इंडस्ट्री के बारे में बताता है। हालांकि, दुनिया की महाशक्तियां डिजाइनों की चोरी नहीं करती हैं और अपने दम पर बौद्धिक संपदाओं का निर्माण करती हैं और दुनिया की मानदंडों का उल्लंघन नहीं करती हैं।

लेकिन, चीन की बात अलग है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) के ज्यादातर विमान या तो विदेशी निर्मित हैं या अनधिकृत रिवर्स-इंजीनियर्ड हैं। यानि, टेक्नोलॉजी की चोरी कर चीन ने अपनी एयरलाइंस इंडस्ट्री खड़ी कर ली है।

Chinese Fighter Jets

विदेशी सैन्य टेक्नोलॉजी और डिजाइन को चुराना, चीन की स्ट्रैटजी रही है। और चोरी करते करते चीन ने महंगे रिसर्च एंड डेवलपमेंट को छोड़ दिया, जिसमें काफी वक्त लगता है। आइये चीन के उन विमानों के बारे में जानते हैं, जिनका निर्माण चीन ने चोरी करके की है।

इनिशियल एयरक्राफ्ट की कॉपी

कोरियाई युद्ध के दौरान चीन में स्वदेशी विमान उद्योग को सोवियत संघ की मदद मिली। शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने दो सीटों वाले मिग-15UTI ट्रेनर को JJ-2 के रूप में बनाया और युद्ध के दौरान सोवियत संघ में बने लड़ाकू विमानों के रखरखाव के लिए अलग अलग कंपोनेंट्स का निर्माण किया।

1956 तक, पीपुल्स रिपब्लिक मिग-15 की कॉपी बना रहा था और आठ साल बाद, लाइसेंस के तहत शेनयांग जे-5 (मिग-17) और शेनयांग जे-6 (मिग-19) दोनों का उत्पादन करना शुरू कर चुका था। 1960 का दशक PLAAF के लिए एक कठिन समय था। चीन-सोवियत संघ के बीच तनाव के बाद सोवियत संघ ने चीन से सहायता बंद कर दी और अपने मिसाइल इंडस्ट्री पर फोकस करना शुरू कर दिया, जिससे 1963 तक चीन की एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री काफी सुस्त हो गई।

1965 के चीनी एयरलाइंस इंडस्ट्री में फिर सुधार शुरू हुआ, जब वियतनाम युद्ध के दौरान उत्तरी वियतनाम को J-2s, J-5s और कुछ J-6s प्रदान किए गए। चीन के पहले स्वदेशी लड़ाकू विमान शेनयांग J-8 का डेलवपमेट भी 1960 के दशक के दौरान शुरू किया गया था।

Shenyang F-7B/Chengdu J-7 (Copy of MiG 21)

1950 और 1960 के दशक की शुरुआत में, सोवियत संघ ने अपनी ज्यादातर पारंपरिक हथियार टेक्नोलॉजी चीन के साथ शेयर की। जिसके तहत मिग 21 की टेक्नोलॉजी भी सोवियत संघ ने शेयर की थी। हालांकि, चीन-सोवियत विभाजन ने अचानक प्रारंभिक सहयोग को समाप्त कर दिया और 1 सितंबर 1960 तक सोवियत ने अपने सलाहकारों को चीन से वापस बुला लिया, लेकिन 1962 में फिर से ये सहयोग शुरू हो गया और सोवियक संघ ने कई मिग-21 लड़ाकू विमान चीन भेज दिए।

चीन को किट में कुछ मिग-21F भी मिले, साथ ही पुर्जे और तकनीकी दस्तावेज भी मिले। हालांकि, शेनयांग विमान कारखाने में चीनियों को पता चला, कि सोवियत संघ के तकनीकी दस्तावेज अधूरे थे और कुछ पुर्जे इस्तेमाल नहीं किए जा सकते थे। इसके बाद चीन ने कुछ मिग 21 को अलग किया और स्थानीय उत्पादन के लिए विमान की रिवर्स इंजीनियरिंग शुरू की। उनका दावा है,, कि उन्होंने 249 बड़ी समस्याओं का पता लगाया और उनका समाधान किया और आठ प्रमुख तकनीकी दस्तावेज तैयार किए, जो सोवियत संघ द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

Chinese Fighter Jets

J-8 (Copy of MiG 21 & Su-15)

चीन ने अपना स्वयं का हर मौसम में काम करने वाला इंटरसेप्टर विकसित करने का प्रयास 1964 में पूरी तरह से शुरू किया, और इसने लॉकहीड यू-2 जासूसी विमान सहित नए, उच्च-ऊंचाई वाले खतरों से निपटने के लिए पहला चीनी-डिजाइन और निर्मित जेट फाइटर तैयार किया।

1964 में, PLAAF ने बमवर्षकों और जासूसी विमानों का मुकाबला करने के लिए एक फाइटर/इंटरसेप्टर की मांग की, क्योंकि चेंगदू J-7 ऐसा करने के काबिल नहीं था। और फिर J-8 का निर्माण शुरू हुआ। प्रोटोटाइप ने 1969 में अपनी पहली उड़ान भरी। J-8 की उत्पत्ति 1960 के दशक के मध्य में होने के बावजूद, राजनीतिक उथल-पुथल के कारण, J-8 का उत्पादन 1979 तक नहीं हुआ और 1980 में सेवा में आया। J-8 की टेक्नोलॉजी और डिजाइन की चोरी चीन ने सोवियत संघ ने MiG 21 & Su-15 से की।

Chengdu J-10 (Copy Of Israeli Lavi & F-16)

1980 के दशक में, अमेरिका ने जनरल डायनेमिक्स F-16 पर आधारित एक नया लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए इजराइल के साथ साझेदारी की। लेकिन लागत बढ़ने के कारण, अमेरिका ने इस सौदे से हाथ खींच लिया, जिससे इज़राइल का "लावी" लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट अधूरा रह गया।

इजराइल ने लावी की विकास योजनाएं चीन को बेच दीं, जिससे उन्हें F-16 के लिए सबसे पहले विकसित की गई टेक्नोलॉजी तक अभूतपूर्व पहुंच मिल गई। और चीन ने J-10 का निर्माण किया, जो अमेरिका के F-16 फाइटर जेच के डिजाइन और टेक्नोलॉजी की कॉपी है।

विमान को शुरू में एक विशेष लड़ाकू विमान के रूप में डिजाइन किया गया था, लेकिन बाद में यह एक मल्टी-रोल वाला विमान बन गया। 2006 में, रूसी साइबेरियन एयरोनॉटिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिबएनआईए) ने जे-10 कार्यक्रम में अपनी भागीदारी की पुष्टि की थी।

Shenyang J-11/16 (Copy Of Sukhoi Su-27)

1970 के दशक में, शेनयांग विमान कारखाने ने ब्रिटिश रोल्स-रॉयस स्पाई 512 इंजन द्वारा संचालित एक नए डिज़ाइन किए गए हल्के लड़ाकू विमान का प्रस्ताव रखा। इसमें मिग 19 की तुलना में बेहतर गतिशीलता और मिग-21 की तुलना में बेहतर चढ़ाई दर होगी।

J-11 का जन्म आखिरकार 1998 में सोवियत द्वारा डिजाइन किए गए सुखोई Su-27 SK एयर सुपीरियरिटी फाइटर के चीनी वेरिएंट के रूप में हुआ, जब चीन ने 2.5 अरब का उत्पादन समझौता हासिल किया, जिसके तहत चीन को रूसी आपूर्ति की गई किट का उपयोग करके 200 Su-27SK विमान बनाने का लाइसेंस दिया गया।

समझौते के तहत, इन विमानों को रूसी एवियोनिक्स, रडार और इंजन से सुसज्जित किया गया। हालांकि, 2004 में, रूसी मीडिया ने बताया कि लगभग 100 मॉडल बनाए जाने के बाद शेनयांग के मूल J-11 के सह-उत्पादन को रोक दिया गया था।

PLAAF ने बाद में 2002 के मध्य में J-11 के एडवांस मल्टी-रोल वेरिएंट का एक मॉक-अप दिखाया। इसमें रडार, एवियोनिक्स सूट और हथियार जैसे घरेलू चीनी तकनीकें भी शामिल थीं, जिनमें एंटी-शिप और PL-12 एयर-टू-एयर मिसाइलें शामिल थीं, जो संभवतः समुद्री स्ट्राइक विमान की भूमिका के लिए थीं।

Chinese Fighter Jets

Shenyang J-15 (Copy Of Sukhoi Su-33)

शेनयांग जे-15, जिसे "फ्लाइंग शार्क" के नाम से भी जाना जाता है, वो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी का 4वीं पीढ़ी का ट्विन-जेट, कैरियर-स्ट्राइक लड़ाकू विमान है। इसे J-11B से विकसित किया गया है और Su-33 के प्रोटोटाइप को अलग करने के बाद रिवर्स इंजीनियरिंग की गई है।

अधूरे Su-33 प्रोटोटाइप और T-10K-3 को चीन ने 2001 में यूक्रेन से खरीदा था और कहा जाता है, कि इसका बड़े पैमाने पर अध्ययन और रिवर्स-इंजीनियरिंग की गई थी। और फिर J-15 लड़ाकू विमान का निर्माण किया गया।

JF 17 "Thunder" (Copy Of MiG-21 & F-16)

चीन का J-7 लड़ाकू विमान, मूल रूप से रूसी मिग 21 और अमेरिकी F-16 का प्लेटफॉर्म का कॉपी है। इजरायल के "लावी" कार्यक्रम के जरिए चीन ने पहले ही अमेरिकी F-16 की डिजाइन तक पहुंच हासिल कर ली थी और फिर चीन ने दो तकनीकों को मिलाकर एक ऐसा विमान बनाया, जिसके बारे में कुछ लोगों का मानना ​​है कि ये एक शानदार फाइटर जेट है।

Chengdu J-20 (Copy Of F-22 Raptor)

J-20 को सटीक हमला करने की क्षमता वाले हवाई श्रेष्ठता लड़ाकू विमान के रूप में डिज़ाइन किया गया है। इसने 11 जनवरी 2011 को अपनी पहली उड़ान भरी और आधिकारिक तौर पर 2016 के चीनी एयर शो में इसका अनावरण किया गया।

विमान को मार्च 2017 में सेवा में लाया गया और सितंबर 2017 में इसका लड़ाकू प्रशिक्षण चरण शुरू हुआ। पहली J-20 लड़ाकू इकाई का गठन फरवरी 2018 में किया गया था। F-22 और F-35 के बाद J-20 दुनिया का तीसरा परिचालन पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है।

J-20 चीन का पहला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। लॉकहीड मार्टिन F-22 डिजाइन को सु बिन नामक एक चीनी जासूस ने चुराया था, जिसे उसके अपराध के लिए अमेरिका में करीब 4 सालों की सजा सुनाई गई थी।

Shenyang J-31 / J-35 (Copy Of F-35 Lightning II)

शेनयांग एफसी-31 एक ट्विन-इंजन, मध्यम आकार का, चीनी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसका वर्तमान में डेवलपमेंट चल रहा है। सितंबर 2011 में F-60 लेबल वाले मॉडल की एक तस्वीर इंटरनेट पर पोस्ट की गई थी। 15 या 16 सितंबर 2012 को एक हवाई क्षेत्र में संभवतः पूरी तरह से इकट्ठे विमान की पार्किंग की तस्वीरें सामने आईं। इसे F-60 को निर्यात संस्करण बताया गया है, जबकि J-31 उसी लड़ाकू विमान का घरेलू चीनी संस्करण होगा।

31 अक्टूबर 2012 को, प्रोटोटाइप नंबर 31001 ने अपनी पहली उड़ान भरी थी। चीन एक ही समय में फील्ड परीक्षण में दो स्टील्थ लड़ाकू डिजाइन रखने वाला दूसरा देश बन गया।

एफ-22 की तरह, लॉकहीड मार्टिन के एफ-35 ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर की टेक्नोलॉजी को भी कथित तौर पर सु बिन ने चुराया था, जिसकी वजह से चीन के जे-31 कार्यक्रम को बढ़ावा मिला। यह जेट, जो अभी भी डेवलपमेंट फेज में है, वो एफ-35 की तुलना में ज्यादा ऑपरेशन रेंज और बड़ी पेलोड क्षमता रखता है।

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