मलेशिया में इजरायली खुफिया एजेंसी Mossad का बड़ा ऑपरेशन फेल, गुर्गों ने की थी बड़ी-बड़ी बेवकूफियां
मलेशिया के न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि, 28 सितंबर की रात को "स्नैच-एंड-ग्रैब" ऑपरेशन में शामिल चार लोगों ने फिलिस्तीनी कंप्यूटर प्रोग्रामर का अपहरण कर लिया गया, जो हमास के लोग थे।
Mossad's Operation in Malaysia: दुनिया की सबसे खतरनाक माने जाने वाली इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर मलेशिया में एक ऑपरेशन देने का आरोप लगा है। मलेशियाई अखबार ने दावा किया है, कि कुआलालंपुर में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने एक फिलिस्तीनी व्यक्ति का अपहरण किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, मोसाद ने फिलिस्तीन शख्स को सड़क से उठा लिया और फिर उससे पूछताछ की गई। मलेशियन मीडिया ने यह भी दावा किया है, कि मोसाद की टीम ने उस शख्स से उस वक्त तक पूछताछ की, जब तक उसे मलेशियन पुलिस ने छुड़ा नहीं लिया। वहीं, पता चला है कि, मोसाद के ऑपरेशन फेल होने के पीछे गुर्गों की बेवकूफियां थीं।

मोसाद पर बड़ा आरोप
मलेशिया के न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि, 28 सितंबर की रात को "स्नैच-एंड-ग्रैब" ऑपरेशन में शामिल चार लोगों ने फिलिस्तीनी कंप्यूटर प्रोग्रामर का अपहरण कर लिया और इस काम के लिए दो कारों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, जिस शख्स का अपहरण किया गया था, उसके नाम का खुलासा नहीं किया गया है, मगर उसे पीटा गया था और राजधानी के बाहर एक सुनसान इलाके में उसे रखा गया था। उसकी आंखों पर पट्टी बंधे थे, और रिपोर्ट में कहा गया गहै, कि उसे कुर्सी से बांधकर उससे फिलिस्तीनी आतंकवादी राजनीतिक संगठन हमास और उसकी एक और शाखा क़सम ब्रिगेट से संबंधित मामलों पर एक वीडियो कॉल पर पूछताछ की गई थी। समाचार रिपोर्ट में कहा गया है कि, "पीड़ित के सामने एक वीडियो कॉल कनेक्ट किया गया था और लाइन पर दो आदमी थे, जिनके बारे में माना जाता था कि वे इजराइली थे, जिन्होंने शुरूआत इस बात के साथ की, कि 'आप जानते हैं कि आप यहां क्यों हैं।'" समाचार संगठन ने कहा कि, "अगले 24 घंटों के लिए मलेशियाई गुर्गों द्वारा पीड़ित से पूछताछ की गई और उसे पीटा गया, क्योंकि उसके जवाब इजरायली संतुष्टि नहीं थे।"

मोसाद के बड़े ऑपरेशन पर खुलासा!
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स को बताया कि, "इजरायल कंप्यूटर एप्लीकेशन डेवलपमेंट में उनके अनुभव, सॉफ्टवेयर विकसित करने में हमास की ताकत, अल-कसम ब्रिगेड के सदस्यों और उनकी ताकत के बारे में पूछताछ की गई थी।" सूत्र ने यह भी कहा कि, अपहर्ताओं की टीम, जिनकी पहचान मलेशियाई के रूप में की गई है, उन्होंने ऑपरेशन को "चकमा" नाम दिया था। हालांकि, रिपोर्ट है कि, जिन मलेशियन लोगों ने अपहरण की इस वारदात को अंजाम दिया था, उन्होंने काफी गलतियां की थीं और उनके कब्जे से ज्यादा महत्वपूर्ण दूसरा फिलिस्तीनी व्यक्ति भागने में कामयाब रहा।

सही रजिस्ट्रेशन नंबर के कार का इस्तेमाल
सूत्र ने कहा कि, मलेशियाई गुर्गे अपना चेहरा भी सही तरीके से नहीं ढंक पाए थे और उन्होंने शख्स का अपहरण करने के लिए जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया, उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी ऑरिजनल था। रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे फिलिस्तीनी व्यक्ति को 'काफी बेशकीमती' बताया गया था और उसने भागने के बाद पुलिस को इसकी जानकारी दे दी। जिसके बार कार रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए अपहरणकर्ताओं का पता लगाया गया और फिर उन्हें राजधानी से बाहर एक सुनसान घर से गिरफ्तार कर लिया गया।

दोनों फिलिस्तीनियों ने मलेशिया छोड़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों फिलीस्तीनियों ने मलेशिया छोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक "अच्छी तरह से सूचित मलेशियाई स्रोत" ने अल जजीरा अरबी को पुष्टि की है, कि एक शख्स ने जांच टीम के सामने मलेशिया में चल रहे "मोसाद सेल" का खुलासा किया है, जो हवाई अड्डों सहित महत्वपूर्ण साइटों पर जासूसी करने में शामिल था, और "सरकारी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों" में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सूत्र ने कहा कि, मोसाद ने ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए यूरोप में प्रशिक्षित मलेशियाई गुर्गों को नियुक्त किया था। अल जज़ीरा अरबी, जिसने मलेशियाई मीडिया का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी है, कि मोसाद ने कम से कम 11 मलेशियाई लोगों के एक सेल की भर्ती की थी, जो फिलिस्तीनी कार्यकर्ताओं पर नजर रखने का काम कर रहे थे। इससे पहले मोसाद का नाम साल 2018 में मलेशिया में फिलिस्तीनी अकादमिक फादी अल-बत्श की हत्या से जोड़ा गया था, जिसे कुआलालंपुर में सुबह की अजान के वक्त गोली मार दी गई थी। अल-बत्श के रिश्तेदारों ने मोसाद पर हत्या के पीछे होने का आरोप लगाया था।

फेल हो गया मोसाद का ऑपरेशन?
मलेशियाई राज्य समाचार एजेंसी बर्नामा के मुताबिक, मलेशिया के तत्कालीन उपप्रधान मंत्री अहमद जाहिद हमीदी ने उस समय कहा था कि, संदिग्धों को एक विदेशी खुफिया एजेंसी के साथ यूरोपीय के तौर पर पहचान की गई थी। वहीं, पुलिस ने कहा कि दो हमलावरों ने कुआलालंपुर के सेतापक जिले में एक रिहायशी इमारत के सामने हमास के सदस्य अल-बत्श का लगभग 20 मिनट तक इंतजार किया था और कम से कम 10 गोलियां दागीं थीं, जिनमें से चार गोलियों की वजह से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। हमास ने मोसाद पर अल-बत्श की हत्या का भी आरोप लगाया। हालांकि, इजराइल ने आरोप को खारिज कर दिया था। वहीं, मलेशियाई अपहरण कांड मामले में जेरूसलम पोस्ट ने मंगलवार को कहा कि, साल 2021 में इजरायल-हमास संघर्ष में गाजा में 230 लोग मारे गये, जबकि इजरायल में 12 लोग मारे गये और इजरायली एजेंसी मोसाद ने कहा कि, "उनकी नीति है, कि हमास के कार्यकर्ता दुनिया के किसी भी कोने में हैं, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा"। (सभी तस्वीर- फाइल)
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