इजरायल ने नेतन्याहू सरकार की बड़ी कामयाबी, न्यायिक सुधार से जुड़ा बिल पारित, सुप्रीमकोर्ट की ताकत होगी कमजोर
इजरायल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बावजूद संसद में न्यायिक सुधार से जुड़ा एक अत्यधिक विवादास्पद विधेयक पारित कर दिया गया है। बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के लिए इसे एक बड़ी जीत बताई जा रही है।
सोमवार को वोटिंग के दौरान विपक्षी नेताओं ने इसका बहिष्कार किया। इस दौरान संसद के बाहर हजारों लोग नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते दिखे। पुलिस ने इन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल भी किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया।

विपक्ष द्वारा इस वोटिंग का बहिष्कार करने के बाद इसे संसद में 64-0 से पारित कर दिया गया। नेसेट (संसद) में अपनी टिप्पणी में, विपक्षी नेता यायर लैपिड ने इस कदम को इजरायल के बहुमत पर एक अति अल्पसंख्यक द्वारा कब्ज़ा बताया।
वहीं, इजरायल के न्याय मंत्री यारिव लेविन ने सांसदों को बधाई देते हुए कहा, "हमने न्यायिक प्रणाली को सही करने के लिए एक ऐतिहासिक प्रक्रिया में पहला कदम उठाया है।"
यह कानून सुप्रीम कोर्ट की ताकत को कमजोर करती है। इस बिल के पास होने के बाद देश की कोई भी अदालत मोटे तौर पर सरकार या किसी मंत्री द्वारा दिए गए आदेश पर रोक नहीं लगा सकेगी।
इसके अलावा इजरायली अदालतें संसद से बने कानूनों की समीक्षा नहीं कर पाएंगी और ना ही उन्हें खारिज कर पाएंगी। इतना ही नहीं, संसद में बहुमत के जरिए अदालत के फैसले को बदला जा सकता है।
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक अदालतों की शक्ति को कमजोर करने वाला यह पहला बिल है। सोमवार को सिर्फ एक बिल पास हुआ है। आने वाले वक्त में इससे जुड़े और कई न्यायिक सुधार बिला पारित कराए जाने हैं।
इसी साल देश में भारी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विवादित न्यायिक सुधार कानून को लेकर यू-टर्न ले लिया था। हालांकि सरकार का तर्क है कि सत्ता में असंतुलन को ठीक करने के लिए ये सुधार आवश्यक हैं, क्योंकि हाल के दशकों में राजनीतिक निर्णयों में अदालतों का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है।












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