Israel-Iran War: भीषण युद्ध में फंस चुका है मिडिल ईस्ट, इजराइल से युद्ध करना अब ईरान की मजबूरी क्यों है?
The Israel-Iran War has intensified with Iran's direct attacks on Israel, reflecting a critical moment for regional alliances and stability amid Hezbollah's challenges.
Israel-Iran War: इजराइल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है। हालांकि, दोनों पक्ष दशकों से लड़ रहे हैं, लेकिन अभी तक का ये संघर्ष, काफी हद तक गुप्त अभियानों की आड़ में चल रहा था, लेकिन अब प्रॉक्सी वॉर का समय खत्म हो गया है और अब मान लेना चाहिए, कि मिडिल ईस्ट युद्ध की भीषण चपेट में फंस चुका है।
1 अक्टूबर को ईरान ने इजराइल के खिलाफ एक बड़ा और सीधा हमला किया, जो कि हमास नेता इस्माइल हानिया और हिज्बुल्लाह के प्रमुख, महासचिव हसन नसरल्लाह की इजराइल हमले में हुई मौत का 'दोहरा बदला' था। ईरान का ये पिछले 6 महीने में इजराइल पर दूसरा बड़ा हमला था। दोनों हमलों को मिलाकर ईरान ने इजराइल पर करीब 200 बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी हैं, हालांकि इजराइल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।

और शायद यही वजह है, कि अभी तक ईरान के खिलाफ इजराइल की अभी तक सीधी प्रतिक्रिया तत्काल नहीं हुई है, बल्कि माना जा रहा है, कि इजराइल अभी तैयारी कर रहा है। हालांकि, इजराइल का ईरान पर पिछला हमला ज्यादा खतरनाक नहीं था, बल्कि माना गया, कि ईरान पर पिछला इजराइली हमला, अपनी ताकत 'दिखाने' के मकसद से ज्यादा था।
अप्रैल में पहली बार दोनों देशों के बीच हुई इस लड़ाई को कई लोगों ने इस बात का संभावित संकेत माना, कि दोनों पक्ष खुले युद्ध में उलझने के बजाय तनाव कम करना पसंद करेंगे। लेकिन उसके बाद से पानी काफी बह चुका है और अब हालात ऐसे हो चुके हैं, बस लड़ाई का औपचारिक ऐलान ही बाकी है।
इजराइल ने अब गाजा पट्टी में हमास की क्षमताओं को काफी हद तक कुचल दिया है और अब इजराइल का ऑपरेशन लेबनान में हिज्बुल्लाह के फन को कुचलने की है, लेकिन अगर हिज्बुल्लाह खत्म होता है, तो पूरे क्षेत्र में ईरान का वर्चस्व ही खत्म हो जाएगा और ईरान ऐसा कभी नहीं चाहेगा, लिहाजा उसे हर हाल में हिज्बुल्लाह को बचाना ही होगा।

मैदान-ए-जंग में उतरने पर ईरान क्यों है मजबूर?
गाजा से लेबनान की तरफ इजराइल का रुख 31 जुलाई 2024 को हमास के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख इस्माइल हानिया की तेहरान में हुई हत्या के साथ मेल खाता है। कथित इजरायली ऑपरेशन को ईरान की संप्रभुता के अपमान के रूप में देखा गया था। यह एक शर्मनाक घटना भी थी, जिसने ईरान के आंतरिक सुरक्षा तंत्र की नाकामी को उजागर कर दिया।
भले ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने इजराइल के खिलाफ "कठोर प्रतिक्रिया" की कसम खाई थी, लेकिन सितंबर तक ईरान ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। तेहरान की निष्क्रियता ने कई मध्य पूर्व विश्लेषकों को यह सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया, कि क्या ईरानी प्रतिक्रिया कभी भी अमल में आएगी?
ऑब्जर्वर्स का मानना है, कि अगर अब हिब्जुल्लाह को बचाने ईरान मैदान में नहीं उतरता है, तो प्रॉक्सी संगठनों का, जिसे ईरान 'प्रतिरोध की धूरी' कहता है, उसपर से विश्वास खत्म हो जाएगा और आरान ऐसा नहीं चाहेगा।
ईरान के सामने सबसे बड़ी दिक्कत, लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल के 'सीमित' अभियान रोकना है, क्योंकि अगर ज्यादा दिनों तक इजराइली अभियान चला, तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि फिर हिज्बुल्लाह के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा।
ऑब्जर्वर्स का मानना है, कि एक अक्टूबर का इजराइल पर ईरान का हमला, ईरान की इसी मजबूरी को दिखाता है, कि वो खुद को उपयोगी बनाए रखना चाहता है।
इजराइल की बढ़त को चुनौती दे पाएगा ईरान?
ईरान को उम्मीद है, कि वह हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल की कामयाबियों को धीमा कर देगा और संभावित रूप से पलट देगा, खासकर तब जब इजराइल दक्षिणी लेबनान में जमीनी अभियान शुरू कर चुका है। बेशक, इजराइली जमीनी सैनिकों को अब दुनिया की सबसे सक्षम गुरिल्ला लड़ाकू सेना से निपटना होगा - जिसने 2006 के इजराइल-हिज्बुल्लाह युद्ध के दौरान काफी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया था।
फिर भी, इजराइल को ईरान हल्के में नहीं ले सकता है और सिर्फ हिज्बुल्लाह पर नहीं छोड़ सकता, कि वो इजराइल से अकेले निपटे। और हिज्बुल्लाह के टॉप लीडरशिप का सफाया, ईरान में इस्लामी गणराज्य के मुकुट रत्न के रूप में देखे जाने वाले "प्रतिरोध की धुरी" के लिए एक बड़ा झटका है। इस संबंध में, ईरान का एक अक्टूबर का हमला, हिज्बुल्लाह को अपने नये नेता की नियुक्त करने, उसे फिर से संगठित होने और इजराइल के जमीनी आक्रमण के खिलाफ संगठित होने का समय देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
इज्जत बचाने की क्रूर कला?
यह ईरान को इज्जत बचाने में भी मदद करता है, खास तौर पर उसके बाहरी प्रॉक्सी नेटवर्क के दूसरे हिस्सों द्वारा इसे किस तरह देखा जाता है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानि IRGC - बाहरी ऑपरेशनों के कॉर्डिनेशन के लिए हिज्बुल्लाह, हमास और हूती विद्रोहियों पर निर्भर रहता है और इसीलिए वो इन संगठनों को धन, हथियार और ट्रेनिंग देता है। लेकिन, पिछले साल अक्टूबर में गाजा पट्टी में इजराइली ऑपरेशन शुरू होने के बाद से, हकीकत ये है कि ईरान वास्तविक तौर पर हमास की मदद नहीं कर पाया है। समर्थन की कमी ने निस्संदेह हमास को काफी नुकसान पहुंचाया है, इसके कई सदस्य या तो मर चुके हैं या छिपे हुए हैं और अब आक्रामक अभियान चलाने में असमर्थ हैं, जिसके कारण इजराइल के सैन्य नेताओं ने दावा किया हैस कि हमास को प्रभावी रूप से पराजित किया जा चुका है।
जब गाजा में लड़ाई शुरू हुई, तो उसके बाद से IRGC का कहीं पता नहीं चला है।
वहीं, अब जबकि इजराइल ने अपना ध्यान लेबनान पर केंद्रित कर लिया है और हिज्बुल्लाह के खिलाफ कई शुरुआती सामरिक सफलताएं हासिल कर ली हैं, तो ईरान दो मुख्य कारणों से चुपचाप खड़ा होकर नहीं देख सकता। सबसे पहले, गाजा में एक साल की लड़ाई ने यह दिखा दिया है, कि इजराइल अपनी सीमाओं पर खतरों को खत्म करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है - जिसमें अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक दबाव का सामना करने या ईरान की सीमाओं के भीतर काम करने की इच्छा भी शामिल है।
और दूसरा, ईरान के दूसरे प्रतिनिधि समूह यह देख रहे हैं, कि क्या तेहरान उनका समर्थन जारी रखेगा - या उन्हें अकेला छोड़ देगा, जैसा कि उसने हमास के साथ किया है।
अकला कदम कौन आगे बढ़ाएगा?
इन परस्पर जुड़ी घटनाओं और मजबूरियों ने संभवतः ईरान के नेताओं को 1 अक्टूबर को इजराइल के खिलाफ दूसरा विशाल, सीधा मिसाइल हमला करने के लिए प्रेरित किया है। तेहरान के किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने में यह हमला कितना प्रभावी होगा, फिलहाल यह अज्ञात है।
इस्लामिक रिपब्लिक ने दावा किया कि 90% बैलिस्टिक मिसाइलों ने इजराइल में अपने टारगेट को हिट किया है, जबकि इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस हमले को "पराजित और अप्रभावी" बताया है। हालांकि, असत्यापित सेलफोन वीडियो में कई बैलिस्टिक मिसाइलों को इजरायल में जमीन पर पहुंचने के बाद विस्फोट करते हुए दिखाया गया है।
हालांकि, यह लगभग तय है कि यह संघर्ष में अंतिम चरण में नहीं है। इजराइल तब तक अपने अभियान को नहीं रोकेगा, जबतक वो लेबनान में अपने लक्ष्य को हासिल ना कर ले और ये लक्ष्य, हिज्बुल्लाह को खत्म करना है। और इजराइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के नवीनतम जवाबी हमले के लिए जवाबी कार्रवाई की कसम भी खाई है।
आईआरजीसी नेताओं ने इस चेतावनी का जवाब अपनी खुद की एक जवाबी धमकी के साथ दिया है, कि यदि इजराइल 1 अक्टूबर के हमले का सैन्य रूप से जवाब देता है, तो ईरान फिर से अनिर्दिष्ट "कुचलने वाले और विनाशकारी हमलों" के साथ जवाब देगा।
यानि, कोई भी पक्ष पीछे नहीं हट रहा है और इसीलिए यही कहा जाना चाहिए, कि इजराइल और ईरान अब युद्ध में हैं। और इजराइल का अगला कदम तय करेगा, कि युद्ध कितना भयानक हो सकता है और ईरान के साथ युद्ध किस तरह आगे बढ़ेगा, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि यह एक युद्ध है।












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