Israel-Hamas War: गाजा के बच्चों और आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइलेंट किलर कौन हैं?
Israel-Hamas War: गाजा के निवासी, जो इजराइल और हमास के बीच युद्ध से बच गए हैं, वो अब साइलेंट किलर्स का निशाना बन रहे हैं। ये साइलेंट किलर्स हैं भूख, बीमारी, शरणार्थी शिविरों की भयावह स्थिति, रूह कंपा देने वाली सर्दी में नंगा बदन।
गाजा पट्टी के लोग इन अदृश्य हत्यारों से लगातार जूझ रहे हैं। वो लगातार फैल चुकी बीमारियों के खतरे का सामना कर रहे हैं। शरणार्थी शिविरों में लोग ठूंसे जा चुके हैं। शरणार्थी शिविरों में लोगों के पास पैर पसारने तक की जगह नहीं बची है, लिहाजा लोग शिविरों के बाहर कठोर ठंड भरी रात को गुजारते हैं और उसपर से कभी भी इजराइली बम गिरने का खौफ पसरा होता है।

अल-मवासी जैसे शरणार्थी शिविरों में मवेशियों की तरह ठूंसे हुए लोग, भोजन और साफ पानी और आश्रय की कमी के कारण बीमारी के खतरे का सामना कर रहे हैं।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है, कि डॉक्टरों के लिए आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण गाजा में पूरी स्वास्थ्य प्रणाली घुटनों पर आ चुकी है। गाजा में काम कर रहे डॉक्टरों के साथ-साथ सहायता कर्मियों ने समाचार एजेंसी को बताया, कि अपरिहार्य महामारी इस क्षेत्र को तोड़ कर रख देगी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है, कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में दस्त के मामले 66% बढ़कर 59,895 हो गए हैं और इसी अवधि में बाकी आबादी में दस्त के मामले 55% से ज्यादा बढ़ गए हैं।
डब्ल्यूएचओ को डर है, कि ये संख्या विस्फोटक की सीमा रेखा को पार कर सकती है। इजराइली हमले से पहले भी गाजा के अस्पतालों की स्थिति कोई अच्छी नहीं थी, लेकिन 7 अक्टूबर के बाद स्थिति दयनीय हो गई है। अस्पतालों में घायल बच्चों की चीखें कलेजा चीर रही होती हैं, लेकिन उनका इलाज करने के लिए कोई वहां मौजूद नहीं होता है। दर्द से कराहते ज्यादातर बच्चे या तो अस्पताल में, या अस्पतालों के बाहर दम तोड़ रहे हैं।
जेम्स एल्डर, संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (यूनिसेफ) के मुख्य प्रवक्ता ने कहा, कि "बीमारियों का तूफान शुरू हो चुका है और यह कितना बुरा हो सकता है, इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है।"

हेपेटाइटिस-ए का विस्फोट
डॉ. अहमद अल-फर्रा ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, कि उनके वार्ड में अत्यधिक निर्जलीकरण से पीड़ित बच्चे भरे हुए हैं, जिनमें से कई मामलों में मरीजों के अब गुर्दे खराब हो चुके हैं। वह दक्षिणी गाजा में खान यूनिस के नासिर अस्पताल में बाल चिकित्सा वार्ड के प्रमुख हैं।
अल-फ़र्रा का कहना है, कि उन्हें पिछले 14 दिनों में खान यूनिस में हेपेटाइटिस ए के 15 से 30 मामलों के बारे में पता चला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अल-फ़र्रा के हवाले से कहा, कि "वायरस की ऊष्मायन अवधि तीन सप्ताह से एक महीने तक है, इसलिए एक महीने के बाद हेपेटाइटिस ए के मामलों की संख्या में विस्फोट हो जाएगा।"
समाचार एजेंसी ने डब्ल्यूएचओ का हवाला देते हुए कहा है, कि गाजा पट्टी के 36 अस्पतालों में से 21 बंद हो चुके हैं, 11 आंशिक रूप से काम कर रहे हैं हैं और चार न्यूनतम क्षमता के साथ चल रहे हैं।
गाजा में एमएसएफ के संचालन के लिए आपातकालीन चिकित्सा समन्वयक मैरी-ऑरे पेरेउट ने 10 दिन पहले खान यूनिस में एक स्वास्थ्य केंद्र को खाली करने के बाद कहा, कि "पहली बात तो यह है, कि यदि मामले की इसी रफ्तार से आगे बढ़ते रहे, तो पेचिश जैसी किसी महामारी पूरे गाजा में फैल जाएगी, और दूसरी निश्चितता यह है, कि न तो स्वास्थ्य मंत्रालय और न ही मानवीय संगठन उन महामारियों की प्रतिक्रिया को कंट्रोल करने में सक्षम होंगे।"
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के अकादमिक शोधकर्ताओं ने पिछले महीने एक शोध पत्र में चेतावनी दी है, कि संघर्ष के अप्रत्यक्ष स्वास्थ्य प्रभाव समय के साथ खराब हो जाएंगे। उन्होंने बाधित आहार और देखभाल के साथ-साथ माताओं के बिगड़ते पोषण के कारण शिशु कुपोषण के बढ़ते बोझ की चेतावनी दी है।
गाजा में सहायता कर्मियों का कहना है, कि शोधकर्ताओं ने जो भविष्यवाणी की थी वह सच हो रही है। उन्हें डर है कि बीमारियां भी उतने ही बच्चों की जान ले लेंगी, जितने अब तक के युद्ध में मारे गए हैं।
गाजा पर शासन करने वाले आतंकवादी समूह हमास का दावा है, कि इजरायली जवाबी कार्रवाई के कारण करीब 19,000 लोग मारे गए हैं, जिनमें से दो-तिहाई महिलाएं और बच्चे हैं, जो उनके नेतृत्व में हुए आतंकवादी हमले के कारण हुआ था, जिसमें 7 अक्टूबर को 1,200 से ज्यादा इजरायली नागरिक मारे गए थे।
युद्ध से गाजा में हर तरफ तबाही
युद्ध ने अब 13 लाख गज़ावासियों को आंतरिक रूप से विस्थापित कर दिया है और उन्हें भूमध्य सागर के किनारे भूमि की एक पतली पट्टी में तथाकथित सुरक्षा स्थलों में रखा गया है।
यूएनआरडब्ल्यूए के संचार निदेशक जूलियट टौमा ने कहा, कि "कई आश्रयस्थल अपनी क्षमता से चार या पांच गुना से ज्यादा क्षमता तक भर चुके हैं और ज्यादातर आश्रय स्थल, शौचालय या शॉवर या साफ पानी से सुसज्जित नहीं हैं।
टौमा ने कहा, कि वे ठीक से काम करने के लिए पूरी तरह से सुसज्जित नहीं हैं क्योंकि यूएनआरडब्ल्यूए के 135 कर्मचारी मारे गए हैं और 70% कर्मचारी युद्ध के कारण अपने घर छोड़कर भाग गए हैं, जिसके कारण एजेंसी 28 प्राथमिक स्वास्थ्य क्लीनिकों में से केवल नौ का संचालन कर रही है।
स्वास्थ्य के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत त्लालेंग मोफोकेंग ने कहा, "चिकित्सा पद्धति पर हमला हो रहा है।" हमलों में 300 से ज्यादा गज़ान स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मंत्रालय कर्मचारी मारे गए हैं, लिहाजा उन परिस्थितियों में अब काम करने वाले लोग नहीं मिल रहे हैं।"ईरान जाने के लिए अब वीजा की नहीं होगी जरूरत... दुनिया में भारतीय पासपोर्ट का फिर से बजा डंका












Click it and Unblock the Notifications