इजराइल-हमास युद्ध में 10 दिनों बाद दुनिया में खेमेबाजी, विश्वयुद्ध की आशंका? जानिए सारे सवालों के जवाब

Israel-Gaza-Hamas Conflict: दुनिया में अभी दो युद्ध चल रहे हैं, एक यूक्रेन के साथ रूस का युद्ध तो दूसरा हमास के खिलाफ इजराइल का युद्ध। हमास ने इस युद्ध की शुरूआत 7 अक्टूबर को की थी, जिसे इजराइल ने अंजाम पर पहुंचाने की कसम खाई है। गाजा पट्टी पर लगातार इजराइली बमबारी जारी है और आशंका है, कि अब ग्राउंड ऑपरेशन शुरू हो सकता है।

हमास और इजराइल के बीच चल रही इस लड़ाई का प्रभाव और इसका अंत कहां हो सकता है, इसके बारे में लोगों के मन में सैकड़ों सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं, कि क्या अन्य देश भी इस युद्ध में शामिल होंगे? यूक्रेन संघर्ष के बाद खेमेबाजी में बंटी दुनिया, क्या इस युद्ध में एक दूसरे को तबाह और बर्बाद करने के लिए आमने-सामने आ जाएंगी?

आइये तमाम सवालों के जवाब समझने की कोशिश करते हैं।

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क्या इससे तीसरा विश्व युद्ध हो सकता है?

सवाल उठ रहे हैं, कि क्या यदि ईरान सीधे संघर्ष में शामिल हो जाता है, तो क्या वह अमेरिका और उसके सहयोगियों को सीधे युद्ध में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा? और क्या इससे तीसरा विश्व युद्ध हो सकता है?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी इज़राइल से रिपोर्टिंग करते हुए बीबीसी के इंटरनेशनल एडिटर जेरेमी बोवेन कहते हैं, कि "ईरान या उसके लेबनानी सहयोगी हिजबुल्लाह के युद्ध में शामिल होने पर क्या अमेरिका युद्ध में शामिल होगा, इसपर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन कहते हैं, "नहीं।"

वहीं, अमेरिका ने ईरान को युद्ध से दूर रहने का सख्त संदेश देने के लिए पूर्वी भूमध्य सागर में दो एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात किया है। अमेरिका का कहना है, कि यदि कोई हस्तक्षेप करता है, तो उसे केवल इज़राइल की ही नहीं, बल्कि अमेरिकी सैन्य शक्ति का भी सामना करना पड़ेगा।

लिहाजा, ईरान और अमेरिका दोनों जानते हैं, कि इस युद्ध का नतीजा क्या हो सकता है। ईरान की आर्थिक स्थिति बर्बादी के कगार पर है, लिहाजा अगर ईरान इस युद्ध में शामिल होता है, तो वो उसकी बेवकूफी होगी, लेकिन ईरान के शामिल होने से ये युद्ध भड़क जाएगा।

चीन और रूस किसके साथ हैं?

रूसी मीडिया के मुताबिक, व्लादिमीर पुतिन मंगलवार को शी जिनपिंग के द्वारा आयोजित बेल्ट एंड रोड फोरम के आधिकारिक उद्घाटन समारोह में भाग लेंने बीजिंग पहुंच गये हैं, जहां वो वियतनाम, थाईलैंड, मंगोलिया और लाओस के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।

शिखर सम्मेलन में रूसी नेता मुख्य अतिथि हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वह बुधवार को शी जिनपिंग से बात करेंगे और उस दिन बाद में द्विपक्षीय वार्ता के लिए चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे। वार्ता के दौरान इजराइल-हमास युद्ध प्रमुखता से उठेगा, क्योंकि रूस और चीन ने हाल के दिनों में जारी संघर्ष पर अपना रुख सख्त कर दिया है।

शुक्रवार को पुतिन ने गाजा में इजरायल की कार्रवाई की तुलना नाजी जर्मनी द्वारा लेनिनग्राद की घेराबंदी से की है और ये एक ऐसी तुलना है, जो इजरायल को बहुत नाराज करेगी। उन्होंने कहा, कि जमीनी हमले से नागरिक हताहतों की संख्या "बिल्कुल अस्वीकार्य" हो जाएगी, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया, कि इजराइल पर हमास का हमला क्रूरतापूर्ण था।

दूसरी तरफ, चीन ने ऐतिहासिक रूप से फ़िलिस्तीन का समर्थन किया है, जैसा कि शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ ने किया था। लेकिन पुतिन ने खुद को इजराइल के सहयोगी के तौर पर पेश किया है। द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध के दौरान प्रकाशित एक संस्मरण के दौरान यहूदी लोगों के प्रति उनके "विशेष रूप से मैत्रीपूर्ण रवैये" के लिए रूसी नेता की प्रशंसा की है।

लिहाजा, चीन और रूस सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि इस युद्ध से इन दोनों ही देशों का कोई लेनादेना नहीं है। चीन की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है, लिहाजा वो किसी और का युद्ध अपने सिर कतई नहीं लेगा।

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इजराइल का मकसद क्या है?

पिछले युद्धों में, इज़राइल ने "हमास पर कड़ा प्रहार" करने की कसम खाई थी, ताकि इज़राइल में रॉकेट दागने की उसकी क्षमता को नष्ट कर दिया जा सके, जिसमें हमास के बनाए गये भूमिगत सुरंगों का विशाल जाल भी शामिल था।

लेकिन ये लड़ाई अलग तरह की हो गई है। इस बार इज़राइल "हमास को नष्ट करने" की कसम खा रहा है। इजराइल का कहना है, कि इस संगठन को इस्लामिक स्टेट समूह की तरह ही ख़त्म कर दिया जाना चाहिए।

इज़राइल के पास हमास के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने, उसकी सुरंगों को नष्ट करने और उसके कमांड और नियंत्रण नेटवर्क को पंगु बनाने की सैन्य ताकत है।

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है, कि इज़राइल इस बारे में कितना जानता है कि गाजा में क्या होने वाला है। हमास धमकी दे रहा है, कि ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान इजराइ गाजा पट्टी का एक अलग ही रूप देखेगा, लिहाजा हमास के हमले को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

हमास का हमला करने का मकसद क्या था?

हमास के प्रवक्ता मोहम्मद अल-दीफ ने इस वक्त हमले की वजह बताया है, कि "बस! अब बहुत हो गया"। उन्होंने कहा, यह हमला हमास द्वारा गाजा और वेस्ट बैंक दोनों में इजरायलियों के हाथों फिलिस्तीनियों द्वारा लगातार उकसावे और अपमान के जवाब में था।

विश्लेषकों का मानना है कि अन्य, अघोषित कारण भी रहे होंगे।

हमले से पहले, इज़राइल और सऊदी अरब संबंधों को सामान्य बनाने की राह पर थे। जिसका हमास और उसके समर्थक ईरान दोनों ने विरोध किया था। सउदी ने अब उन वार्ताओं को सस्पेंड कर दिया है।

इसके अलावा, हमास की कोशिश इजराइल की अंदरूरी राजनीति को भड़काने की है। इजराइल में पिछले दो सालों से बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व सरकार और मौजूदा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा, न्यायिक सुधार कानून ने नेतन्याहू को वीलेन बना दिया है। हमास की कोशिश इस हमले से नेतन्याहू के खिलाफ माहौल भड़काना था, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। युद्ध के दौरान इजराइल के सभी पार्टी एक हो गये हैं और उन्होंने मिलकर युद्ध कैबिनेट का निर्माण किया है। लिहाजा, हमास की ये चाल नाकाम हो गई है।

इजिफ्ट ने क्रॉसिंग क्यों कर रखा है बंद?

कुछ लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं, कि मुसलमान इस्लाम के नाम पर भाईचारे की बात करते हैं। तो फिर मिस्र ने गाजा के साथ अपनी सीमा को क्यों बंद रखा है?

बीबीसी के इंटरनेशनल एडिटर जेरेमी बोवेन ने कहा, कि "इस्लाम एक आस्था है लेकिन जरूरी नहीं कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की राजनीति से परे हो।" हो सकता है, कि मिस्र के लाखों मुसलमान, गाजा में नागरिकों की पीड़ा को कम करना चाहते हैं।

लेकिन मिस्र सरकार, राफा क्रॉसिंग के माध्यम से गाजा से नियमित पहुंच की अनुमति नहीं देती है। 2007 में हमास के वहां कब्ज़ा करने के बाद से इजराइल द्वारा गाजा की घेराबंदी में मिस्र का भरपूर साथ मिला था। इसके अलावा, मिस्र अपने देश में शरणार्थियों की बाढ़ नहीं चाहता है।

हमास की जड़ें मुस्लिम ब्रदरहुड में हैं, जो एक सदी पहले मिस्र में स्थापित हुआ एक संगठन है। ब्रदरहुड इस्लामी शिक्षा और विश्वास के अनुरूप राज्यों और समाज को नया आकार देना चाहता है।

लेकिन, मिस्र की सेना उस नीति का विरोध करती है। इसने 2013 में एक निर्वाचित मुस्लिम राष्ट्रपति को उखाड़ फेंका था। मिस्र के वर्तमान शासन के हमास के साथ संबंध जरूर हैं, और अतीत में यह हमास और इज़राइल के बीच की कड़ी रहा है। लेकिन वह फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की आमद नहीं चाहता।

यूनाइटेड नेशंस क्यों नहीं कर रहा हस्तक्षेप?

मुख्य कारण यह है, कि कई देश इज़राइल से अपने हवाई हमले रोकने का आग्रह नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे मानते हैं, कि इजराइल पर हमास द्वारा हमला किया गया है और उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है।

ब्रिटेन के प्रधान मंत्री ऋषि सनक ने आज सुबह कहा: "मैंने इजरायली प्रधान मंत्री के साथ नागरिकों पर प्रभाव को यथासंभव कम करने की आवश्यकता को उठाया है।"

संयुक्त राष्ट्र ने भी इज़रायल से नागरिक हताहतों से बचने का आग्रह किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कुछ दिन पहले कहा था, कि "अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून का सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बरकरार रखा जाना चाहिए। नागरिकों की रक्षा की जानी चाहिए और उन्हें कभी भी ढाल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।"

हिज़्बुल्लाह की तुलना हमास से कैसे की जाती है?

गाजा पट्टी से आगे उत्तर में, लेबनान और इज़राइल के बीच तनाव बढ़ रहा है। हिज्बुल्लाह, जो एक लेबनानी सैन्य, राजनीतिक और सैन्य संगठन है, वो लंबे समय से इज़राइल द्वारा हमास की तुलना में अधिक दुर्जेय ताकत के रूप में देखा गया है। इजराइल, हिज्बुल्लाह को आतंकी संगठन मानता है।

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, भारी हथियारों से लैस ईरान समर्थित समूह के पास अनुमानित 130,000 रॉकेट और मिसाइलें हैं।

इस शस्त्रागार का अधिकांश हिस्सा छोटे, मानव-पोर्टेबल और बिना निर्देशित सतह से सतह पर मार करने वाले तोपखाने रॉकेटों से बना है। लेकिन इसमें विमान-रोधी और जहाज-रोधी मिसाइलों के साथ-साथ इज़राइल के अंदर तक मार करने में सक्षम निर्देशित मिसाइलें भी शामिल हैं।

हिज़्बुल्लाह के नेता ने दावा किया है कि उसके पास 100,000 लड़ाके हैं, हालांकि स्वतंत्र अनुमान 20,000 और 50,000 के बीच है। कई लोग अच्छी तरह से प्रशिक्षित हैं और युद्ध में निपुण हैं, और सीरियाई गृहयुद्ध में लड़ चुके हैं।

वहीं, इज़राइल का मानना है, कि हमास के पास अनुमानित 30,000 लड़ाके हैं।

लिहाजा, लड़ाई की स्थिति में हिज़्बुल्लाह, इजराइल को गंभीर नुकसान जरूर पहुंचा सकता है, लेकिन ये भी तय है, कि इजराइल, हिज़्बुल्लाह के साथ साथ लेबनान को भी नक्शे से मिटा देगा।

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