Israel Conflict: क्यों इजराइल के साथ भिड़ रहे ये 5 देश? कहां कौन ज्यादा ताकतवर ? 76 साल में कौन ज्यादा क्रूर?

Israel Conflict Explained: 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल पर बड़ा आत्मघाती हमला किया, जिससे 1,200 से ज्यादा इजराइली नागरिकों की मौत हुई। इसके बाद इजराइल ने गाजा पर हवाई हमले शुरू किए। देखते-देखते यह संघर्ष एक साल तक खींच गया, जिसमें गाजा, लेबनान, सीरिया और यमन भी शामिल हो गए।

इस युद्ध में हिजबुल्लाह और ईरान ने बड़ी भूमिका निभाई। संघर्ष की इस बरसी के मौके पर इजराइल और लेबनान के बीच तनाव और बढ़ गया है। आइए जानते हैं कि इजराइल के साथ इन देशों की टकराव की वजहें क्या हैं, कौन सबसे ताकतवर है, और 76 सालों में कौन सबसे क्रूर साबित हुआ है....

Israel Conflict Explainer

इजराइल के दुश्मन और संघर्ष की वजहें
इजराइल के चारों तरफ ऐसे कई देश और संगठन हैं, जो उसके अस्तित्व को चुनौती देते रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से धार्मिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक विवाद शामिल हैं। आइए जानते हैं इजराइल के प्रमुख दुश्मनों के बारे में और उन कारणों पर नजर डालते हैं, जिनकी वजह से इन देशों और संगठनों के साथ इजराइल का संघर्ष होता रहा है।

गाजा (हमास)
हमास, एक सुन्नी इस्लामिक संगठन है, जो गाजा पट्टी से संचालित होता है। यह इजराइल का सबसे बड़ा दुश्मन है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल पर एक बड़े हमले को अंजाम दिया, जिसके बाद दोनों के बीच हिंसक संघर्ष बढ़ गया। गाजा में अधिकतर आबादी सुन्नी मुस्लिम है और 2007 से हमास का यहां नियंत्रण है। हमास इजराइल के अस्तित्व को मान्यता नहीं देता और यही कारण है कि गाजा और इजराइल के बीच कई बार युद्ध हो चुका है।

लेबनान (हिजबुल्लाह)
इजराइल और लेबनान के संबंध 1948 में इजराइल के गठन के बाद से ही तनावपूर्ण रहे हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह एक प्रमुख शिया संगठन है, जो इजराइल के खिलाफ संघर्ष में लगातार सक्रिय है। हिजबुल्लाह को ईरान का समर्थन प्राप्त है और यह संगठन 1982 से इजराइल के खिलाफ लड़ाई कर रहा है। 2023-2024 के संघर्ष के दौरान हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच झड़पें लगातार होती रहीं, जिनमें कई जानें गईं।

इराक
इराक ने भी 1948, 1967 और 1973 के अरब-इजराइल युद्धों में हिस्सा लिया। हालांकि, इराक और इजराइल के बीच पिछले कुछ दशकों में कोई बड़ा सैन्य टकराव नहीं हुआ है, लेकिन इराक का रुख इजराइल के प्रति शत्रुतापूर्ण रहा है। इराक इजराइल को एक अवैध राज्य मानता है और इस क्षेत्र में इसके राजनीतिक प्रभाव का विरोध करता रहा है।

सीरिया
सीरिया में बशर अल-असद की सरकार, जो शिया अलावी समुदाय से है, इजराइल के खिलाफ हमेशा से मुखर रही है। सीरिया और इजराइल के बीच मुख्य विवाद गोलान हाइट्स को लेकर है, जिसे इजराइल ने 1967 के युद्ध में अपने नियंत्रण में ले लिया था। सीरिया इस क्षेत्र को वापस लेने की मांग करता है। साथ ही, सीरिया हिजबुल्लाह और अन्य शिया संगठनों को समर्थन देकर इजराइल का विरोध करता है। इस संघर्ष में ईरान की भूमिका भी अहम है, जो सीरिया को लगातार समर्थन देता है।

यमन (हौथी विद्रोही)
यमन में सक्रिय शिया हौथी विद्रोही भी इजराइल के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करते रहे हैं और कई बार संघर्ष में शामिल होने की धमकी भी दे चुके हैं। यमन की आबादी में 65% सुन्नी और 35% शिया हैं, और हौथी विद्रोही ईरान समर्थित माने जाते हैं। हालांकि यमन ने सीधे तौर पर इजराइल के साथ युद्ध नहीं किया है, लेकिन हौथी विद्रोहियों का इजराइल विरोधी रुख और ईरान से जुड़े उनके संबंध इस संघर्ष को और बढ़ावा देते हैं।

कौन साबित हुआ सबसे क्रूर?
पिछले 76 सालों में, इस संघर्ष के दौरान हर पक्ष पर क्रूरता के आरोप लगे हैं। इजराइल की हवाई हमलों से हजारों नागरिकों की मौत हुई है, जबकि हिजबुल्लाह और हमास के आत्मघाती हमले और मिसाइल दागने की घटनाओं से इजराइली नागरिक मारे गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इजराइल के हमलों में गाजा, लेबनान और सीरिया में बड़ी संख्या में लोग मारे गए।

आबादी और जातीय विभाजन:

  • गाजा (सुन्नी बहुल क्षेत्र): गाजा पट्टी में 90% से अधिक आबादी सुन्नी मुस्लिम है। यहां का सबसे प्रमुख संगठन हमास है, जो सुन्नी विचारधारा का पालन करता है।
  • लेबनान (धार्मिक और जातीय विविधता): यहां की जनसंख्या धार्मिक और जातीय रूप से बहुत विभाजित है। यहां की 34% आबादी ईसाई है, जबकि 31% सुन्नी और 31% शिया मुस्लिम (हिजबुल्लाह) हैं। शिया संगठन हिजबुल्लाह लेबनान में शिया समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है।
  • सीरिया (शिया नेतृत्व, सुन्नी बहुसंख्या): सीरिया की 15%-20% आबादी शिया है, लेकिन यहां की सरकार शिया अलावी समुदाय के हाथों में है। बशर अल-असद की सरकार शिया नेतृत्व में चलती है, और यह ईरान व इराक के शिया शासन के साथ गठबंधन में है। सीरिया में सुन्नी बहुसंख्या है, जो अलावी शासकों से नाराज है। इस असंतोष ने कई विद्रोहों को जन्म दिया है, जिनमें से कुछ इस्लामिक स्टेट समूह के साथ जुड़े हुए हैं।
  • यमन (शिया हौथी विद्रोही) : यमन में 65% आबादी सुन्नी और 35% शिया है। यहां शिया हौथी विद्रोही उत्तरी यमन में प्रभाव रखते हैं और उन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर, दक्षिणी यमन में सुन्नी आबादी का दबदबा है। हौथी विद्रोही इजराइल का विरोध करते हैं, और उनका संघर्ष भी क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भूमिका निभाता है।
  • इजराइल (यहूदी बहुल देश): इजराइल की 74% आबादी यहूदी है, जबकि 17% मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, जिनमें सुन्नी मुस्लिम शामिल हैं। शिया मुस्लिम समुदाय यहां लगभग नहीं के बराबर है।
  • ईरान (शिया बहुल देश): ईरान की 90% आबादी शिया है और यह देश दुनिया में शिया इस्लाम का सबसे बड़ा केंद्र है। ईरान का नेतृत्व कट्टर शिया विचारधारा पर आधारित है और इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व में फैला हुआ है। ईरान में केवल 10% आबादी सुन्नी है।
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संघर्ष के कारण:
इजराइल का गाजा,लेबनान, सीरिया और यमन से संघर्ष की जड़ें धार्मिक और भू-राजनीतिक हैं। शिया-सुन्नी विभाजन और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भी इसमें एक बड़ा कारक है। ईरान, जो एक शिया बहुल देश है, इन संघर्षों में शिया गुटों जैसे हिजबुल्लाह, हौथी और सीरियाई सरकार को समर्थन देता है। दूसरी ओर, सुन्नी संगठन जैसे हमास और अन्य अरब देश इजराइल का विरोध करते हैं।

एक नजर में समझें कहां किसका प्रभुत्व?

  • गाजा: सुन्नी मुस्लिम बहुमत है और हमास का नियंत्रण है।
  • लेबनान: यहां शिया मुस्लिम (हिज़्बुल्लाह) का प्रभुत्व। खासकर दक्षिणी लेबनान और बेक्का वैली में है। सुन्नी मुस्लिम का प्रभुत्व उत्तरी लेबनान और त्रिपोली जैसे क्षेत्रों में है।
  • सीरिया: सुन्नी बहुमत है, लेकिन शिया अलवाइट राष्ट्रपति असद का शासन है।
  • यमन: उत्तर में ज़ैदी शिया हौती विद्रोही और दक्षिण में सुन्नी मुस्लिम का प्रभाव है।

इजराइल और हिजबुल्लाह के संघर्ष की टाइमलाइन

  • 1948: इजराइल की स्थापना के साथ ही लेबनान और अन्य अरब देशों ने इजराइल पर हमला किया। इस युद्ध के बाद ग्रीन लाइन बनाई गई, जो इजराइल और उसके पड़ोसियों के बीच की अस्थायी सीमा बनी।
  • 1982: इजराइल ने लेबनान पर हमला किया और हिज़्बुल्लाह का उदय हुआ। हिज़्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन से इजराइल के खिलाफ लड़ाई शुरू की।
  • 2006: इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच एक बड़े युद्ध ने हजारों लेबनानी और इजराइली नागरिकों की जान ली।
  • 2023: हमास के हमले के बाद हिजबुल्लाह ने भी इजराइल पर रॉकेट दागने शुरू किए। इजराइल ने जवाब में लेबनान के हिज़्बुल्लाह ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच संघर्ष और बढ़ गया।

पिछले एक साल में हुए हमलों को टाइमलाइन में समझें

  • 7 अक्टूबर 2023: हमास ने इजराइल के दक्षिणी इलाकों पर लगभग 5,000 रॉकेट दागे। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में करीब 1200 से ज्यादा लोग मारे गए। इस घटना के बाद इजराइल ने गाजा पर जोरदार हवाई हमले शुरू किए।
  • 8 अक्टूबर 2023: हमास के हमले का जवाब देने के लिए, इजराइल ने 'ऑपरेशन स्वोर्ड्स ऑफ आयरन' शुरू किया। गाजा पट्टी पर भीषण बमबारी की गई और इजराइल ने 48 घंटों में करीब तीन लाख रिजर्व सैनिक जुटाए।
  • 9 अक्टूबर 2023: इजराइल ने गाजा पट्टी की पूरी तरह से घेराबंदी की। गाजा, जहां करीब 20 लाख फलस्तीनी रहते हैं, 2007 से हमास के नियंत्रण में है। इसके बाद से यह क्षेत्र इजराइल की घेराबंदी के अधीन है।
  • 13 अक्टूबर 2023: इजराइली सेना ने गाजा के उत्तरी हिस्से के नागरिकों को 24 घंटे के अंदर अपने घर खाली करने का आदेश दिया। हालांकि, कुछ लोग दक्षिण की ओर भागे, लेकिन कई लोग अपने स्थान पर डटे रहे।
  • 17 अक्टूबर 2023: गाजा शहर के अल-अहली अस्पताल में एक बड़ा विस्फोट हुआ, जिसमें 471 लोगों की मौत हुई। हमास ने इस हमले के लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया, जिसे इजराइल ने खारिज कर दिया।
  • 19 अक्टूबर 2023: ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर ड्रोन और मिसाइलें दागी। उन्होंने गाजा के समर्थन में लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को भी निशाना बनाया। यह संघर्ष का एक और नया मोर्चा था, जो अगले साल तक जारी रहा।
  • 27 अक्टूबर 2023: इजराइली सेना ने गाजा में एक जमीनी अभियान शुरू किया। इस अभियान का उद्देश्य गाजा के नीचे सुरंगों के जटिल नेटवर्क को नष्ट करना था।
  • नवंबर 2023: इस अवधि में इजराइल ने गाजा, लेबनान और सीरिया में कई सामरिक ठिकानों पर बड़े हमले किए। गाजा में 15,000 से अधिक मौतें, जबकि हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमलों में 300 लोग मारे गए।
  • 24 नवंबर 2023: इजराइल और हमास के बीच बंधकों की अदला-बदली के लिए सीजफायर हुआ, जिसमें इजराइल के 105 और फिलिस्तीन के 240 बंधकों को रिहा किया गया।
  • 2 जनवरी 2024: हमास के नेता सालेह अल-अरूरी मारे गए।
  • जनवरी-मार्च 2024: इस दौरान इजराइल ने गाजा, लेबनान और सीरिया में हमले तेज किए। गाजा में 10,000 से अधिक लोगों की मौत। हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई में 200-300 लड़ाके मारे गए।
  • अप्रैल-जून 2024: ईरान ने हिजबुल्लाह और हमास को समर्थन बढ़ाया, जिससे इजराइल के खिलाफ हमले बढ़े। गाजा में 25,000 से अधिक मौतें। लेबनान में 500 से अधिक लोगों की जान गई, जिनमें हिजबुल्लाह के सदस्य और नागरिक शामिल थे।
  • जुलाई-सितंबर 2024:इस दौरान, हिजबुल्लाह के कई टॉप लीडर मारे गए। गाजा में 6,000 से अधिक लोगों की मौत। लेबनान और सीरिया में कई हिजबुल्लाह लड़ाके मारे गए।
  • 18 सितंबर: लेबनान में हिजबुल्लाह के लड़ाकों के एकाएक 5 हजार से ज्यादा पेजरों में धमाके हुए। इसमें कई लड़के मारे गए।

हिजबुल्लाह की पूरी लीडरशिप का खात्मा

  • हसन नसरल्लाह - हिजबुल्लाह चीफ
  • फुआद शुकर - हिजबुल्लाह रदवान फोर्स टॉप कमांडर
  • इब्राहिम अकील - ऑपरेशन चीफ
  • अली करारी - साउथ लेबनान चीफ कमांडर
  • वसीम अल तवील - रदवान फोर्स कमांडर
  • तालिब सलीम अब्दुल्लाह - हिजबुल्लाह नसार यूनिट कमांडर
  • मोहम्मद नासेर - अजीज यूनिट कमांडर

इजराइल पर पिछले एक साल में हुए हमले

  • गाजा - 13200
  • लेबनान - 12400
  • ईरान - 400
  • यमन - 180
  • सीरिया - 60

नोट- (इनपुट कई मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स से लिया गया है। वनइंंडिया आंकड़ों को लेकर दावा नहीं करता है।)

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