ईरान के हमले में बाल बाल बचा मोसाद हेडक्वार्टर, बाहर गिरी बैलिस्टिक मिसाइल, सिर्फ आयरन डोम से बच पाएगा इजराइल?

Iron Dome: नेवातिम एयर बेस से लेकर तेल अवीव के एक रेस्टोरेंट तक, इजराइल में प्रमुख स्थानों को निशाना बनाकर ईरानी मिसाइलों की बौछार ने इजराइल की मिसाइल रक्षा प्रणालियों की लचीलापन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठ रहे हैं, कि क्या ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम इजराइल को बचाने के लिए काफी हैं?

आयरन डोम, एरो 2 और एरो 3 सिस्टम को लंबे समय से इजराइल के लिए प्रभावी ढाल के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है, लेकिन ईरान की तरफ से मंगलवार शाम को विशाल संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों से किए गये हमले ने इजराइल को फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

iranian missile attacks

आइये हम जानने की कोशिश करते हैं, कि क्या ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स एक भीषण युद्ध के दौरान इजराइल करो बचाने के लिए पर्याप्त हैं?

ईरान की मिसाइल रणनीति में तेजी

मंगलवार शाम को हुए मिसाइल हमलों में, जिसमें लगभग 181 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को इजराइल पर दागा गया, तेहरान की सैन्य स्थिति में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है। यह हमला 13 अप्रैल के मिसाइल हमले जैसे पिछले हमलों की तुलना में, पैमाने और तीव्रता के मामले में काफी ज्यादा हैं।

द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास हाई स्पीड वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को तैनात करने का फैसला, जिसमें अनुमानित 10,000 मील प्रति घंटे की गति से यात्रा करने वाली उसकी एडवांस फतेह-2 हाइपरसोनिक मिसाइलें शामिल हैं, इजराइल के खिलाफ उसके खतरनाक इरादों को साफ करता है, कि उसका मकसद इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से ध्वस्त करना है।

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों पर बढ़ती निर्भरता इजराइल के लिए कई चुनौतियां पेश करती है। इन हथियारों को उनकी स्पीड, प्रोजेक्टाइल पथ और पेलोड क्षमता के कारण रोकना मुश्किल है। पेंटागन के प्रवक्ता मेजर जनरल पैट राइडर ने इस बात पर जोर दिया, कि इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलों को लॉन्च करने के पीछे का इरादा स्पष्ट था, "काफी नुकसान पहुंचाना।" जबकि कई मिसाइलों को इजराइल की रक्षा प्रणालियों ने रोक दिया, लेकिन कई मिसाइलों ने सुरक्षा को भेद दिया और एक मिसाइल, मोसाद हेडक्वार्टर के बाहर गिरीं, जिससे पहली बार इजराइल की एक और कमजोरी उजागर हो गई है।

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Iron Dome: ताकत और सीमाएं

2011 में सेवा में आया आयरन डोम, इजराइल के लिए एक गेम-चेंजर रहा है, जिसकी सफलता दर 90 प्रतिशत से ज्यादा है। मुख्य रूप से कम दूरी के खतरों का मुकाबला करने के लिए इसे डिजाइन किया गया, इसने इजरायल को अनगिनत रॉकेट और मोर्टार हमलों से बचाया है, खासकर हमास जैसे गाजा-आधारित समूहों से।

इस बार भी ईरान के भीषण हमले में दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराकर इसने अपनी उपयोगिता साबित की है।

हालांकि, आयरन डोम को ईरान को लॉन्च की गई हाई स्पीड बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है। यह कम दूरी के प्रोजेक्टाइल के खिलाफ़ तो बेहतर है, लेकिन बैलिस्टिक खतरों की जटिलता और वेग के खिलाफ ये संघर्ष करता है। इनका मुकाबला करने के लिए ज्यादा एडवांस और महंगे इंटरसेप्टर की जरूरत होती है, जो यूएस-इजराइली एरो 2 और एरो 3 जैसे सिस्टम कर सकते हैं।

एरो 2 और एरो 3 में कितनी शक्ति?

एरो 2 और एरो 3 सिस्टम, जिन्हें खास तौर पर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है, वो हाई स्पीड के खतरों के खिलाफ इजराइल की रक्षा की रीढ़ हैं। उदाहरण के लिए, एरो 3 पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर मिसाइलों को रोक सकता है, जो इसे बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कंपोनेंट बनाता है।

हालांकि, जैसा कि मंगलवार की बमबारी ने दिखाया है, इन एडवांस प्रणालियों की भी अपनी सीमाएं हैं। इजराइल पर करीब 200 मिसाइलों को एक साथ रोकने में ये मिसाइलें पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाए हैं। हालांकि, ये बात अलग है, कि इन मिसाइलों के गिरने से इजराइल को नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि ये मिसाइलें ऐसी जगह गिरीं, जो पहले से वीरान थीं, लेकिन ये सिर्फ भाग्य की बात है।

इसके अलावा, इन एयर डिफेंस सिस्टम की इंटरसेप्टर मिसाइल महंगी है और ईरान, मिसाइलों को जल्दी-जल्दी लॉन्च करके इजराइली सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती है और उसके रणनीति भंडार को कम कर सकती है, जिससे लंबे समय तक हमले के दौरान इन सुरक्षाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है।

ईरान की इतनी बड़ी मात्रा में मिसाइलें दागने की क्षमता, जिसमें एडवांस हाइपरसोनिक वेरिएंट भी शामिल हैं, वो इजराइल की रक्षा रणनीति को चुनौती देती है। एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोकने के लिए पल भर में फैसला लेने में या फिर कॉर्डिनेशन में देर हुई, तो ये मिसाइलें तबाही मचा सकती हैं और बहुत हद तक संभव है, कि ये एयर डिफेंस सिस्टम को ही ध्वस्त कर दे।

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इजराइल पर ईरानी हाइपरसोनिक खतरा

ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों, जैसे कि फतेह-2, का शामिल होना मिसाइल युद्ध में एक खतरनाक बदलाव को दर्शाता है। मैक 5 से ज्यादा की स्पीड से यात्रा करने के लिए डिजाइन की गई हाइपरसोनिक मिसाइलों का पता लगाना और उन्हें रोकना बेहद मुश्किल है। उनकी अत्यधिक स्पीड, उनकी पहचान करने और फिर उन्हें रोकने के लिए फैसला करने की क्षमता को काफी कर देती है।

इससे पहले की आदमी कोई फैसला ले, ये मिसाइलें अपने टारगेट को हिट कर जाती हैं, जिससे मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इन मिसाइलों से बचाव के लिए अत्याधुनिक तकनीक की आवश्यकता होती है, और यह अनिश्चित है कि इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए इजराइल की मौजूदा प्रणालियां कितनी तैयार हैं। इन मिसाइलों की गति बहुत ज्यादा है, जिससे गलती की संभावना कम हो जाती है, और ये सबसे एडवांस मिसाइल रक्षा नेटवर्क में भी कमजोरियां का खुलासा कर देती हैं।

क्या इजराइल को नई रणनीति बनाने की जरूरत है?

इन घटनाक्रमों के मद्देनजर, इजराइल को अपनी मिसाइल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई रणनीतियों और तकनीकों पर विचार करना चाहिए। आयरन डोम, एरो 2 और एरो 3 लंबे समय से इजरायल की सुरक्षा के स्तंभ रहे हैं, लेकिन मिसाइल खतरा खतरनाक दर से विकसित हो रहा है।

इजराइल पहले से ही लेजर-आधारित डिफेंस सिस्टम विकसित कर रहा है, जैसे कि "आयरन बीम", जो मौजूदा मिसाइल रक्षा नेटवर्क का पूरक हो सकता है। लेजर सिस्टम काफी कम खर्चे पर ऑपरेट किया जाता है, क्योंकि ये फिजिकल इंटरसेप्टर के बजाय ऊर्जा पर निर्भर करते हैं। फिलहाल इस डिफेंस सिस्टम को डेवलप किया जा रहा है, जिसकी क्षमता प्रकाश की गति से मिसाइलों को नष्ट करने की है और ये इजराइल को दीर्घकालिक रक्षा समाधान प्रदान करता है।

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