रूस के बाद अमेरिका के एक और ‘दुश्मन’ ने दिया ‘सस्ता’ तेल खरीदने का ऑफर, क्या करेगी भारत सरकार?

भारत में ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने कहा कि, ईरान ने तेल और गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार को फिर से शुरू करके भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करने की पेशकश की है।

मॉस्को, मार्च 21: रूस के बाद अमेरिका के एक और 'दुश्मन' देश ईरान ने भारत सरकार सामने तेल और गैस खरीदने का बड़ा प्रस्ताव रखा है। ईरान सरकार ने भारत के सामने ऑफर रखते हुए कहा है कि, अगर भारत चाहे, तो दोनों देशों के बीच फिर से तेल व्यापार शुरू हो सकता है और ईरान का सबसे बड़ा ऑफर ये है, कि तेल का ये व्यापार, डॉलर में नहीं, बल्कि दोनों देशों की अपनी करेंसी में होगी। अगर भारत सरकार इस ऑफर को स्वीकार करती है, तो भारत के ऊर्जा सेक्टर को काफी ज्यादा फायदा होगा।

ईरान ने दिया ऑफर

ईरान ने दिया ऑफर

भारत में ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने कहा कि, ईरान ने तेल और गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार को फिर से शुरू करके भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करने की पेशकश की है। चेगेनी ने कहा कि, अगर दोनों देश रुपया-रियाल व्यापार फिर से शुरू करते हैं, तो द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता हुआ करता था, लेकिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ परमाणु समझौते से हटने और उसके तेल निर्यात पर फिर से प्रतिबंध लगाने के बाद नई दिल्ली को आयात रोकना पड़ा था और साल 2018 में भारत ने ईरान से तेल खरीदना बिल्कुल बंद कर दिया था और अपनी निर्भरता सऊदी अरब पर बढ़ाई, लेकिन सऊदी अरब तेल का प्रोडक्शन नहीं बढ़ा रहा है, जिससे भारत पर काफी असर पड़ रहा है।

भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार

भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार

यूक्रेन युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट मचा हुआ है और इन सबके बीच भारत में ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने कहा कि, 'भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरान तैयार है'। एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ईरान के राजदूत ने कहा कि, 'ईरान तेल और गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार शुरू करके भारत की ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।'

रुपया-रियाल तंत्र की पैरवी

रुपया-रियाल तंत्र की पैरवी

उन्होंने आगे कहा, "रुपया-रियाल व्यापार तंत्र दोनों देशों की कंपनियों को एक दूसरे के साथ सीधे सौदा करने और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खत्म करने में मदद कर सकता है।" ईरानी राजदूत के कहने का मतलब ये था, कि भारत, ईरान से जो तेल खरीदे, उसकी कीमत वो रुपये में चुकाए और उन रुपयों से ईरान भारत से सामान खरीद लेगा। यानि, ईरान का ये प्रस्ताव, दोनों देशों के लिए ना सिर्फ फायदेमंद साबित हो सकता है, बल्कि डॉलर के बढ़ते वैल्यू का भी इसपर प्रभाव नहीं पड़ेगा, लिहाजा कच्चे तेल की कीमत पर डॉलर के बढ़ते कीमत का जो प्रभाव पड़ता है, वो नहीं पड़ेगा और भारत में तेल की कीमत थोड़ी कम हो सकती है।

पहले भी था यही व्यापार तंत्र

पहले भी था यही व्यापार तंत्र

आपको बता दें कि, भारत और ईरान के बीच पहले भी आपसी व्यापार के लिए 'रुपया-रियाल' तंत्र ही था, जिसमें भारतीय तेल रिफाइनर एक स्थानीय ईरानी बैंक को रुपये में भुगतान कर रहे थे और उस धन का उपयोग तेहरान द्वारा भारत से आयात के भुगतान के लिए किया गया था। भारत में यूको बैंक को दोनों देशों के व्यापार के बीच रुपयों के लेनदेन का जरिया बनाया गया था। इसने ईरान को भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बाजार बनने के लिए प्रेरित किया था, जबकि, ईरान से पहले सऊदी अरब भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता हुआ करता था, लेकिन, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के बाद, भारत-ईरान के बीच का व्यापार, जो 17 अरब अमेरिकी डॉलर तक चला गया था, वो 2019-20 में घटकर महज 2 अरब डॉलर का हो गया है।

गैस परियोजना भी शुरू करने को तैयार

गैस परियोजना भी शुरू करने को तैयार

इसके साथ ही, ईरान के राजदूत ने आगे कहा कि, अगर भारत की मर्जी होती है, तो ईरान भारत में प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए रुकी हुई ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन परियोजना को पुनर्जीवित करने और वैकल्पिक मार्ग खोजने के लिए नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करने का भी इच्छुक है। ईरान का ये प्रस्ताव भी भारत के लिए काफी ज्यादा अहम और फायदेमंद है। इसके साथ ही, भारत पिछले कई सालों से ईरान से कई अन्य उत्पादों का भी आयात करता था, जैसे यूरिया, पेट्रोकेमिकल्स, जैविक फल, जबकि अरब राष्ट्र भारत से कृषि वस्तुओं, फार्मास्यूटिकल्स, लोहा और इस्पात और ऑटोमोबाइल, क्लिंकर, सीमेंट का आयात करते थे।

ईरान ने दिए कई ऑफर

ईरान ने दिए कई ऑफर

इसके साथ ही ईरान के दूत ने कहा कि, ईरान ने व्यापारियों, पर्यटकों और छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए भारतीयों के लिए कागज रहित, इलेक्ट्रॉनिक बहु वीजा जारी करने की प्रणाली शुरू की है। आपको बता दें कि, भारत और ईरान के संबंध पिछले कई सालों से काफी मजबूत रहे हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गये प्रतिबंधों की वजह से भारत को काफी नुकसान हुआ है। वहीं, ईरान ने कहा है कि, अगर भारत चाहे, तो फिर से इस संबंध को शुरू किया जा सकता है और दोनों देशों का व्यापार जल्द ही 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। आपको बता दें कि, रूस ने भी भारत को सस्ते दर पर तेल बेचने का ऑफर दिया था, जिसके बाद इंडियन ऑयल ने रूसी कंपनी के साथ 30 लाख बैरल कच्चे तेल का करार किया है, जबकि भारत की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी बीपीसीएल ने भारी रियायती दरों पर 20 लाख बैरल की बुकिंग की है। आपको बता दें कि, रूस भारत को करीब 25 प्रतिशत कम कीमत पर कच्चा तेल बेच रहा है।

ईरान से कितना तेल खरीदता था भारत?

ईरान से कितना तेल खरीदता था भारत?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा ईरान से खरीदता था। भारत ईरान से कच्चा तेल आयात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश था। लेकिन, अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदना रोक दिया था। वहीं, अमेरिकी धमकियों के बाद वेनेजुएला से कच्चा तेल की आयात करने में भी भारत ने आधा से ज्यादा कटौती कर दी थी। 2019 में भारत ने जहां वेनेजुएला से 15.9 मिलियन कच्चा तेल आयात करता था, लेकिन 2020 में वेनेजुएला से भारत ने सिर्फ 7.65 मिलयन टन ही तेल खरीदा। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था। आंकड़ों के मुताबिक, ईरान ने 2018-19 में भारत को 2.36 करोड़ टन कच्चे तेल की आपूर्ति भारत को की। वहीं, 2017-18 में भारत ने ईरान से 2.25 करोड़ टन कच्चा तेल खरीदा था। वहीं भारत ने UAE से 2018-19 में 1.74 करोड़ टन तेल की आपूर्ति की थी।

इराक से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है भारत

इराक से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है भारत

भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा कच्चे तेल की आपूर्ति इराक से करता है। 2017-18 से पहले भारत तेल के लिए सबसे ज्यादा सऊदी अरब पर निर्भर रहता था। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कॉमर्शियल इंटेलीजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCIS) के आंकड़ों के मुताबिक इराक ने 2018-2019 वित्तवर्ष में भारत को 4.66 करोड़ टम कच्चा तेल बेचा। यह 2017-18 के मुकाबले 2 प्रतिशत ज्यादा था

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