Iran Protest: ‘गोली चली तो जवाब मिलेगा’ खामेनेई को ट्रंप की खुली धमकी, ईरान में सत्ता संकट की ओर बढ़ रहे हालात
Iran Anti Government Protest: ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। देशभर में भड़के सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी दी है।
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है या उन्हें कुचलने की कोशिश करती है, तो अमेरिका सीधे दखल देगा। विस्तार से जानिए ट्रंप ने क्या कहा और ईरान के ताजा हालात कैसे हैं...

"ईरान बड़ी मुसीबत में है" ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन को चेतावनी देते हुए कहा, ईरान बड़ी मुसीबत में है। लोग उन शहरों पर भी कब्जा कर रहे हैं, जिनके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था। हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं। अगर वे पहले की तरह लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो हम दखल देंगे और ऐसा प्रहार करेंगे, जहां उन्हें सबसे ज्यादा दर्द होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि पहले भी कुछ मौकों पर अमेरिका ने पीछे हटने का फैसला किया था, लेकिन अब हालात अलग हैं। उनके मुताबिक, "ईरान ने अपने ही लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया है और अब उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।"
'गोली मत चलाओ, वरना हम भी चलाएंगे'
शनिवार, 10 जनवरी को ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को और सख्त चेतावनी देते हुए कहा,बेहतर होगा कि आप गोलीबारी शुरू न करें, क्योंकि अगर आपने ऐसा किया, तो हम भी जवाबी कार्रवाई करेंगे। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़े, तो अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले सकता है।
Iran Protest: कैसै शुरू हुआ आंदोलन?
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों की जड़ देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा रियाल की लगातार गिरती कीमत ने आम जनता का गुस्सा भड़का दिया है। 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के दो बाजारों से शुरू हुआ यह विरोध धीरे-धीरे देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। अब यह सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस्लामी शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप ले चुका है।
31 प्रांतों में फैले प्रदर्शन,इंटरनेट बंद, उड़ानें रद्द
मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं के मुताबिक, ये प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के इलाकों तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं। अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency (HRANA) के अनुसार, अब तक कम से कम 65 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है।
हालात काबू में रखने के लिए ईरानी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। देश के कई हिस्सों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय और सूचनाओं के प्रसार को रोका जा सके। ईरान के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला "देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति" को देखते हुए लिया गया है। प्रदर्शनों का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है। दुबई और ईरान के बीच कम से कम 17 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
खामेनेई का पलटवार, अमेरिका पर आरोप
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने शुक्रवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रंप को अहंकारी बताते हुए कहा कि उनके हाथ ईरानी लोगों के खून से सने हैं। खामेनेई ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल के "आतंकी एजेंट" देश में हिंसा भड़का रहे हैं। ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित भाषण में खामेनेई ने कहा,ये लोग अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश कर सकें। उन्हें अपने देश की हालत पर ध्यान देना चाहिए।
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गोलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को "कठोर, अधिकतम और बिना किसी कानूनी नरमी" के सजा दी जाएगी। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज हो सकती है।
रेजा पहलवी की ट्रंप से अपील
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी इस मौके पर डोनाल्ड ट्रंप से हस्तक्षेप की अपील की है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा,मिस्टर प्रेसिडेंट, यह तत्काल और बेहद जरूरी अपील है। ईरान के लोगों की मदद के लिए कृपया हस्तक्षेप करने के लिए तैयार रहें। रेजा पहलवी लगातार सोशल मीडिया के जरिए लोगों से खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील कर रहे हैं। उनके आह्वान के बाद ही गुरुवार और शुक्रवार को बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों के बीच पहलवी के समर्थन और उनके ईरान लौटने के नारे भी सुनाई दिए।
संकट गहराने के संकेत
ईरान में जारी ये विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद इस्लामी गणराज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं। एक ओर जनता का गुस्सा सड़कों पर है, तो दूसरी ओर अमेरिका की खुली चेतावनी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरानी सरकार आगे क्या कदम उठाती है और क्या अमेरिका वास्तव में किसी तरह की सीधी कार्रवाई की ओर बढ़ता है।
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