इंटरपोल ने गुरपतवंत सिंह के खिलाफ नहीं जारी किया रेड कॉर्नर नोटिस, भारत के दावे को बताया बेदम, क्यों?
इंटरपोल के कमीशन फॉर द कंट्रोल ने अगस्त महीने में ही भारत सरकार को अपने फैसले के बारे में बता दिया था, जब उसने भारत सरकार के अनुरोध पर पन्नू के खिलाफ जांच की और पन्नू ने जो अपना एप्लीकेशन दायर किया था।
Khalistan separatist Gurpatwant Singh: इंटरपोल ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू को लेकर भारत सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ केंद्र सरकार के मामले को झटका देते हुए, इंटरपोल ने कनाडा स्थित खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कानूनी सलाहकार और संस्थापक के खिलाफ आतंकी आरोपों पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के भारत के दूसरे अनुरोध को भी खारिज कर दिया है। इंटरपोल का ये फैसला भारत सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

इंटरपोल ने क्यों खारिज किया अनुरोध
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरपोल ने कहा है कि, भारतीय अधिकारी गुरपतवंत सिंह के खिलाफ अपने मामले का समर्थन करने के लिए पर्याप्त जानकारी सौंपने में नाकाम रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि, इंटरपोल की तरफ से भारत सरकार के UAPA कानून की भी संकेतों में आलोचना की गई है और संकेत दिए हैं, कि अल्पसंख्यकों और एक्टिविस्टो के खिलाफ इस कानून का दुरूपयोग किया गया है और उचित प्रक्रिया अपनाए बिना उनके अधिकारों का सम्मान नहीं किया जा रहा है। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि, इंटरपोल ने इस बात को स्वीकार किया है, कि पन्नू एक "हाई-प्रोफाइल सिख अलगाववादी" है और एसएफजे एक ऐसा समूह है, जो एक स्वतंत्र खालिस्तान की मांग करता है। फिर भी, इंटरपोल ने यह निष्कर्ष निकाला है, कि पन्नून की गतिविधियों का एक "स्पष्ट राजनीतिक आयाम" है, जो इंटरपोल के संविधान के अनुसार रेड कॉर्नर नोटिस का विषय नहीं हो सकता है।

अगस्त में भारत को दी गई थी जानकारी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरपोल के कमीशन फॉर द कंट्रोल ने अगस्त महीने में ही भारत सरकार को अपने फैसले के बारे में बता दिया था, जब उसने भारत सरकार के अनुरोध पर पन्नू के खिलाफ जांच की और पन्नू ने जो अपना एप्लीकेशन दायर किया था, उसकी भी जांच की और भारत सरकार के अधिकारियों ने जो रिपोर्ट्स दी थी, उसका मूल्यांकन करने के बाद इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस को खारिज करने का फैसला लिया। सूत्रों ने कहा कि, जून के अंत में आयोजित एक सत्र के दौरान, इंटरपोल आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि, भारत के राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा "अपराध की आतंकवादी प्रकृति" और पन्नू की "संभावित सक्रिय और सार्थक भागीदारी" दिखाने के लिए "अपर्याप्त जानकारी" प्रदान की गई है और उससे ये साबित नहीं होता, कि पन्नू आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है।"

भारत ने इंटरपोल में क्या दलील दी?
आपको बता दें कि, एनसीबी, सीबीआई के अधीन कार्य करता है और भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए रेड कॉर्नर नोटिस अनुरोधों को संसाधित और समन्वयित करता है। वहीं, खालिस्तानी अलगाववादी पन्नू के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से एनसीबी द्वारा 21 मई 2021 को रेड कॉर्नर नोटिस के लिए अनुरोध किया गया था। वहीं, भारत सरकार पहले ही एसजेएफ पर प्रतिबंध लगा चुकी है। इंडियन एक्सप्रेस ने एनआईए से इंटरपोल के कदम के बारे में पूछा, लेकिन एजेंसी के प्रवक्ता टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। सूत्रों ने बताया कि, पन्नू के आवेदन पर इंटरपोल कमीशन में भारत सरकार ने 3 फरवरी 2021 को मोहाली स्थिति विशेष अदालत में दायकर पन्नू के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट का हवाला दिया। इसमें कहा है, कि एनआईए ने अपनी जांच में इस बात को सत्यापित किया है, कि पन्नू 'भर्ती करता है', 'कट्टरपंथी बनाता है'। इसमें एनआईएन ने निहाल सिंह उर्फ फतेह सिंह नाम के एक शख्स का हवाला दिया था और कहा है, कि इस नाम से पहचाने गये एक सहयोगी के नाम से पन्नू सोशल मीडिया के जरिए आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहा है।

पन्नू के खिलाफ लगाए कई आरोप
सूत्रों के अनुसार, भारत ने इंटरपोल कमीशन को बताया कि, इन कृत्यों में "प्रमुख भारतीय नेताओं की हत्या, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को जलाना, आतंकी कृत्यों को अंजाम देने के लिए हथियार खरीदना" और उनके "आतंकवादी गिरोह" में "भर्ती" करना शामिल है। इसके साथ ही भारत ने कहा कि, भारत का मानना है कि, इन तरह के कृत्यों को अंजाम देने के लिए पन्नू ने विदेशों से भारत में एक्टिव संगठनों को धन मुहैया कराया है और इसके लिए उसने अपने अलग अलग छद्म तरीकों का इस्तेमाल किया है। भारत ने इंटरपोल को बताया कि, पन्नू का लक्ष्य भारत के पंजाब में आतंकवाद को फिर से जिंदा करना, निर्दोष लोगों की जान लेना और "अलगाववादी" एजेंडे को बढ़ावा देना है।

पन्नू ने भारत के आरोपों को खारिज किया
सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, इंटरपोल कमीशन में पन्नू ने अपने ऊपर लगाए गये तमाम आरोपों को खारिज कर दिया और भारत के रेड कॉर्नर नोटिस के अनुरोध को 'साइलेंट एक्टिविस्ट' करार दिया। पन्नू ने इस बात से भी इनकार किया, कि एसएफजे एक आतंकवादी संगठन है और उसने दावा किया, कि उसकी कानूनी प्रथा सिखों के लिए "आत्मनिर्णय" को बढ़ावा देने और "मानवाधिकारों के हनन के बारे में पीड़ितों" की ओर से अमेरिका और कनाडा में शिकायत दर्ज करने के लिए थी। पन्नू ने इंटरपोल में सौंपी गई अपनी दलील में कहा कि, उसने सितंबर 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ न्यूयॉर्क में अलग-अलग सिविल क्लेम्स दायर किए थे, जिसमें दावा किया गया था कि, पंजाब में सिखों के साथ दुर्वव्यहार हो रहा है।

इंटरपोल ने क्यों लिया ये फैसला?
भारत के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल का फैसला कई प्वाइंट्स पर आधारित हैं, जिसमें इंटरपोल के संविधान के अनुच्छेद-3 का हवाला दिया गया है, जो संगठन को "राजनीतिक, सैन्य, धार्मिक या नस्लीय चरित्र के किसी भी हस्तक्षेप या गतिविधियों" को करने से रोकता है। इंटरपोल ने जनवरी 2019 में भारत सरकार द्वारा नवंबर 2018 में दायर अनुरोध को भी खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय अधिकारियों से पन्नू के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की मांग की थी। वहीं, इस बार इंटरपोल ने भारतीय अनुरोध में कई कमियों की ओर इशारा किया है। खासकर तीन मामलों में जानकारी की कमी की बात कही है। इंटरपोल ने कहा है कि, भारतीय अधिकारी पन्नू और फतेह सिंह या एनआईए मामले में अन्य आरोपियों के बीच कथित संबंध को सत्यापित नहीं कर सके, पन्नू के बैंक विवरण या कथित अंतरराष्ट्रीय वायर ट्रांसफर पर ज्यादा जानकारी नहीं दे सके और कथित आतंकी गतिविधियों में उसकी संलिप्तता को भी साबित नहीं कर सके। इंटरपोल के आयोग ने यह भी बताया कि, पन्नू को बिना किसी दोषसिद्धि के यूएपीए के तहत "आतंकवादी" घोषित किया गया है। आपको बता दें कि, पन्नू को गृह मंत्रालय ने यूएपीए के तहत 38 "आतंकवादियों" में से एक के रूप में सूचीबद्ध कर रखा है।

इंटरपोल का यूएपीए पर तंज
इसके साथ ही इंटरपोल ने भारत सरकार के यूएपीए कानून को लेकर भी अपनी टिप्पणी की है, जिसमें इंटरपोल के आयोग ने संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के ओपन लेटर्स का हवाला देते हुए कहा कि, "यूएपीए की 'गैरकानूनी गतिविधियों' और 'आतंकवादी संगठनों की सदस्यता' की अस्पष्ट परिभाषा राज्य एजेंसियों को विवेकाधीन शक्तियां प्रदान करती है, जो न्यायिक निरीक्षण को कमजोर करती है और इस प्रक्रिया में नागरिक स्वतंत्रता का हनन होता है"।

पन्नू के खिलाफ भारत में मामले
सूत्रों के अनुसार, एनआईए ने अगस्त 2020 में पंजाब के मोगा में उपायुक्त कार्यालय के परिसर में तिरंगे को नुकसान पहुंचाने और "खालिस्तान झंडा" फहराने सहित पन्नू और एसएफजे के खिलाफ कम से कम तीन चार्जशीट दायर की हैं। वहीं, जुलाई 2019 में भारतीय गृहमंत्रालय ने SFJ को "ऐसी गतिविधियों में लिप्त होने के लिए" गैरकानूनी संघ "के रूप में घोषित किया, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए प्रतिकूल हैं, और देश की शांति, एकता और अखंडता को बाधित करने की क्षमता रखते हैं"। इंटरपोल की वेबसाइट के अनुसार, 200 भारतीय नागरिकों सहित भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोध पर 279 व्यक्तियों को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। इनमें गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और कुछ सिख अलगाववादी शामिल हैं। वहीं, पन्नू के खिलाफ भारत के हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के अलावा अकेले पंजाब में ही 22 मामले दर्ज हैं, जिनमें से कुछ मामले एनआईए ने दर्ज किए हुए हैं।
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