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LCA Tejas: बाइडेन प्रशासन ने तेजस फाइटर जेट को बनाया अपंग? अमेरिकी कंपनी पर भारत ने ठोका जुर्माना

LCA Tejas Fighter Jet: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर हो रही चर्चा का कोई नतीजा नहीं निकला है। भारत ने स्वदेशी लड़ाकू विमान लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट Mk1A को शक्ति प्रदान करने के लिए इंजन देने में नाकाम रहने के लिए अमेरिकी एयरो-इंजन निर्माता GE एयरोस्पेस पर जुर्माना ठोक दिया है।

इससे न सिर्फ भारतीय वायु सेना (IAF) के आधुनिकीकरण की योजना में देरी हुई है, बल्कि रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में अमेरिका की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे हैं। और यही वजह है, कि भारत ने अभी तक अमेरिकी लड़ाकू जेट का विकल्प नहीं चुना है, जो भारत की पीढ़ियों के अविश्वास की वजह से है।

US-India defence relations

भारत 114 मध्यम-भूमिका वाले लड़ाकू विमान (MRFA) विमान खरीदना चाहता है, लेकिन तेजस फाइटर जेट का इंजन देने में अमेरिका ने जिस तरह से आनाकानी की है, उसे देखते हुए यही लगता है, कि भारत शायद अमेरिका के इस सौदे को ना कह दे।

भारत के 114 MRFA के लिए लॉकहीड मार्टिन F-16 का एडवांस वेरिएं F-21 पेश कर रहा है, और बोइंग ने F/A-18 ब्लॉक III सुपर हॉर्नेट और F-15 EX की पेशकश की है। वहीं, अन्य दावेदार फ्रांसीसी राफेल और स्वीडिश JAS-39 ग्रिपेन हैं। लेकिन, किसी भी सौदे को फाइनल करने से पहले, भारत को जरूर ये ध्यान में रखना होगा, कि किस तरह से अमेरिका, एलसीए तेजस के निर्माण में बाधा बन रहा है और इंजनों की सप्लाई नहीं कर रहा है।

एलसीए तेजस का इंजन नहीं दे रहा अमेरिका!

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने LCA-Mk-1A लड़ाकू विमानों के लिए 99 F-404 इंजनों की आपूर्ति के लिए 2021 में जीई से कॉन्ट्रैक्ट किया था, इसके बाद 2023 में एलसीए एमके II के लिए जीई-414 इंजनों के लिए एक और समझौता किया, जिस पर प्रधान मंत्री मोदी की यूएस यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए।

दुर्भाग्य से, डिलीवरी में देरी ने LCA-Mk-1A बनने की सीमा को बार बार बढ़ा रहा है। ये देरी उस वक्त हो रही है, जब भारतीय वायुसेना को तत्काल विमानों की जरूरत है, और दोनों ही दुश्मन, चीन और पाकिस्तान अपने एयरफोर्स बेड़े को एडवांस कर चुके हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अब जीई ने मार्च/अप्रैल 2025 के आसपास डिलीवरी को लेकर विंडो बनाया है।

और इन देरी को कम करने के लिए, भारत एक अस्थायी उपाय के रूप में सेकेंड-हैंड इंजनों के उपयोग पर विचार कर रहा है, वहीं देरी के लिए भारत सरकार ने अमेरिकी कंपनी GE पर भारी भरकम जुर्माना लगाया है।

US-India defence relations

अमेरिका पर विश्वास करना क्यों हो सकता है घातक?

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अविश्वास की बुनियाद पर बनी है। जिसमें 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए प्रतिबंध और पाकिस्तान के साथ संघर्ष के दौरान, भारत के दुश्मन को मदद पहुंचाना शामिल है।

इन मुद्दों ने ऐतिहासिक रूप से भारत को अमेरिका के साथ रक्षा संबंधों को गहरा करने में सतर्क किया है, खासकर रूसी सैन्य उपकरणों पर लंबे समय से निर्भरता और भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी एफ-16 का उपयोग करने को देखते हुए। इन चुनौतियों के बावजूद, अमेरिका भारत की रक्षा खरीद रणनीति में एक प्रमुख खिलाड़ी बना हुआ है, हालांकि उसने अभी तक भारत के साथ कोई बड़ा लड़ाकू विमान सौदा नहीं किया है।

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियां भारत-अमेरिका संबंधों की उतार-चढ़ाव भरी प्रकृति को रेखांकित करती हैं, क्योंकि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की निंदा की और प्रधानमंत्री मोदी के साथ साझेदारी की सराहना की है। मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की नीतियों की ट्रंप की आलोचना और फिर से चुने जाने पर अमेरिका-भारत संबंधों को मजबूत करने की उनकी प्रतिज्ञा दोनों देशों के बीच गतिशीलता में एक और परत जोड़ती है, जो भविष्य में नीति और सहयोग में संभावित बदलावों का सुझाव देती है।

ट्रंप खत्म कर पाएंगे भारत के साथ अविश्वास का रिश्ता?

17 साल के अनुभव और संघर्ष अध्ययन एवं शांति प्रबंधन में मास्टर डिग्री रखने वाली विदेशी मामलों की जानकार रितु शर्मा, इन घटनाक्रमों को भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और रक्षा संबंधों को आकार देने में महत्वपूर्ण मानती हैं। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत का लक्ष्य अपनी वायु सेना का आधुनिकीकरण करना और रक्षा प्रौद्योगिकी में रणनीतिक स्वतंत्रता हासिल करना है।

फ्रांस, लगातार भारत का समर्थन कर रहा है, जिसमें सफ्रान ने भारत को इंजन टेक्नोलॉजी के स्वामित्व की पेशकश की है, और ये कारगिल संघर्ष के दौरान सैटेलाइट नेविगेशन समर्थन से इनकार करने वाले अमेरिका के ऐतिहासिक रुख के विपरीत है। अमेरिकी धोखे के बाद, भारत खुद का नेविगेशन सिस्टम NavIC सिस्टम विकसित कर रहा है, जो रक्षा क्षमताओं में रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने की तरफ बड़ा कदम है।

इंजन की आपूर्ति में देरी के लिए जीई एयरोस्पेस पर लगाया गया जुर्माना भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में व्यापक चुनौतियों को उजागर करता है। जैसे-जैसे भारत रक्षा में आधुनिकीकरण और रणनीतिक स्वतंत्रता की ओर अग्रसर है, अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्तियों के साथ उसके संबंधों की गतिशीलता निरंतर विकसित हो रही है, जो पिछले अनुभवों और भविष्य की आकांक्षाओं से काफी प्रभावित है।

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