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शरणार्थी बन अमरीका पहुंचे भारतीय हुए क़ैद, 25 दिनों से भूख हड़ताल पर

By सलीम रिज़वी

अप्रवासी
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अमरीका में ग़ैर-क़ानूनी तौर पर प्रवेश करने के बाद गिरफ़्तार होने वाले कुछ भारतीय नागरिकों की अमरीका में शरण लेने की अर्ज़ी रद्द होने के बाद से वह भूख हड़ताल पर हैं.

टैक्सस प्रांत के अल पासो शहर में कम से कम 4 भारतीय नागरिक अमरीका में शरण की अर्ज़ी अदालत द्वारा नामंज़ूर किए जाने के बाद से आप्रवासन विभाग की जेल में 9 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठ गए.

ये लोग कई महीनों से जेलों में बंद हैं और इनमें से कई लोगों को अमरीका से बाहर करने का अदालती हुक्म भी जारी हो चुका है.

लेकिन आप्रवासन विभाग इन्हें वापस भारत नहीं भेज पा रहा है.

इस तरह क़ैद में महीनों गुज़ारने के बाद इन लोगों की भूख हड़ताल का शुक्रवार को 25वां दिन है.

इनमें से 3 भारतीय नागरिकों की वकील लिंडा कोर्चादो ने बीबीसी हिंदी को बताया कि यह लोग आप्रवासन की हिरासत में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.

वकील के अनुसार इन लोगों को ज़बरदस्ती आईवी ड्रिप्स लगाई जा रही है जिससे इनकी हालत और न बिगड़े. वकील का कहना है कि अब आप्रवासन विभाग इनको ज़बरदस्ती खाना भी खिलाने की कोशिश कर सकता है.

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'ज़बरदस्ती खाना खिलाना एक प्रताड़ना'

वकील लिंडा कोर्चादो ने कहा, "मेरे मुवक्किल अपनी भूख हड़ताल अनिश्चितकाल के लिए जारी रखना चाहते हैं. मैं इसे आत्महत्या का मिशन तो नहीं कहूंगी.. बल्कि यह उनके विरोध का तरीका है..लेकिन अब लगता है कि आप्रवासन विभाग जल्द ही इन लोगों को ज़बरदस्ती खाना भी खिलाने की कोशिश करेगा. जो की एक तरह की प्रताड़ना माना जाता है और इसकी कोई ज़रूरत नहीं है."

वकील का कहना है कि इस तरह कोई 10 लोग विभिन्न जेलों में विरोध के तौर पर अब भूख हड़ताल पर हैं और उनको ज़बरदस्ती आईवी ड्रिप्स लगाई जा रही है.

इन लोगों की मांग है कि अदालत में उनके शरण के मामले की फिर से सुनवाई की जाए और उस दौरान उन्हें जेलों से बाहर रहने दिया जाए.

इनमें से एक मामले में अदालती सुनवाई जारी है जबकि अदालत ने अन्य सभी की अर्ज़ी नामंज़ूर करके अमरीका से बाहर निकालने का हुक्म जारी किया है.

वकील के अनुसार, अभी आप्रवासन विभाग इन लोगों को वापस भारत भेजने की कोशिश में है लेकिन दस्तावेज़ तैयार होने में समय लग रहा है.

उधर टैक्सस के ह्यूस्टन शहर में स्थित भारतीय कंसुलेट ने भी इन क़ैदियों से मिलने की कोशिश की है.

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क़ैदी नहीं बता रहे किस राज्य से हैं

भारतीय कांउसिल जनरल अनुपम रे ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा, "अगर जो व्यक्ति गिरफ़्तार हुआ है वह अपने देश के कांसुलेट के अधिकारियों से मिलना ही नहीं चाहता हो तो हम उससे मुलाक़ात करने के लिए ज़बरदस्ती नहीं कर सकते."

इन क़ैदियों की वकील लिंडा कोर्चादो का कहना है कि उनके मुवक्किल भारतीय नागरिक यह नहीं बताना चाहते हैं कि वह भारत में कहां के रहने वाले हैं. क्योंकि उनको डर है कि भारत में रह रहे उनके परिवार वालों के लिए मुश्किल हो सकती है.

ह्यूस्टन शहर में स्थित भारतीय कांसुलेट में सूत्रों का कहना है कि यह क़ैदी भारत के पंजाब राज्य के रहने वाले हैं.

अमरीका में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से देश में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ प्रशासन ने सख़्त रवैय्या अपनाया हुआ है और हज़ारों लोगों को मैक्सिको की सीमा से अमरीका में ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से प्रवेश करने के जुर्म में गिरफ़्तार किया गया है.

एक भारतीय मूल के अमरीकी वकील गुरपाल सिंह इस तरह के कई मामले में शरण की अर्ज़ी देने वाले लोगों का केस लड़ रहे हैं.

वो कहते हैं कि इस तरह अमरीकी सीमा में ग़ैर-क़ानूनी प्रवेश को रोकना मुमकिन नहीं लगता.

अमरीका
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कमज़ोर हो गए हैं क़ैदी

गुरपाल सिंह कहते हैं, "ऐसे तो हज़ारों मामले हैं. और इसे रोकने का कोई तरीक़ा ही नहीं है. बस यह तभी रुकेगा जब इन देशों में चाहे वह होंदूरास हो, ग्वाटेमाला हो पाकिस्तान हो या भारत हो वहां हालात बेहतर नहीं हो जाते.. अगर हालात बेहतर हो जाएं तो लोग अपनी जान जोखिम में डालकर क्यों यहां आएंगे."

उधर अल पासो शहर की जेल में भूख हड़ताल कर रहे भारतीय नागरिक इतने कमज़ोर हो गए हैं कि उन्हे अब वकील से मिलने के लिए भी व्हील चेयर पर बैठाकर लाया जाता है.

अमरीकन मेडिकल एसोसिएशन क़ैदियों को ज़बरदस्ती खाना खिलाने को अनैतिक मानता है और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस तरह विरोध में भूख हड़ताल को तोड़ने की कोशिश को प्रताड़ना से संबंधित कानून का उल्लंघन माना है.

वकील लिंडा कोर्चादो का कहना है कि वह अमरीकी आप्रवासन विभाग की ओर से इन क़ैदियों को ज़बरदस्ती आईवी ड्रिप्स लगाए जाने और इनको ज़बरदस्ती खाना खिलाने की कोशिश के खिलाफ़ केंद्रीय अदालत में मानवाधिकार हनन का मुकद्दमा दायर करने की कोशिश कर रही हैं.

BBC Hindi
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English summary
Indians as refugees reached America are imprisoned now on hunger strike from 25 days
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