यूक्रेन से लौटे भारतीय छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी! रूस बोला- ‘आपके लिए हमारे यूनिवर्सिटी के दरवाजे खुले हैं’

रूस ने उन सभी भारतीय छात्रों को अपने यहां के विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए आमंत्रित किया है, जिन्हें यूक्रेन से युद्ध के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर जान बचाते हुए भारत लौटना पड़ा था।

रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के 24 नवंबर को 9 महीने पूरे हो जाएंगे। इस युद्ध का अंत हाल फिलहाल होता दिख नहीं रहा है। अगर यह युद्ध रुकता भी है तो यूक्रेन में फिर से विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई व्यवस्था जल्द पटरी पर आ पाएगी इसमें संदेह है। ऐसे में वहां स्टडी कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। अब ऐसे छात्र रशियन यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेकर अपनी पढ़ाई जारी रख पाएंगे।

रूसी दूत बोले- नहीं होगी भाषा की दिक्कत

रूसी दूत बोले- नहीं होगी भाषा की दिक्कत

चेन्नई में रूस के महावाणिज्य दूत ओलेग अवदीप ने कहा कि यूक्रेन छोड़ने वाले भारतीय छात्र रूस में अपनी शिक्षा जारी रख सकते हैं। ओलेग ने कहा, "भारतीय छात्रों को रूसी विश्वविद्यालयों में एडमिशन दिया जाएगा, जहां वे अपने संबंधित कोर्स के साथ पढ़ाई जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा वे यूक्रेन के लोगों की भाषा के बारे में जानते हैं। वहां के अधिकतर लोग रूस भाषा बोलते हैं। ऐसे लोग जो रूसी भाषा बोल सकते हैं उनका मोस्ट वेलकम है।"

जहां छूटी पढाई वहीं से कर सकते हैं शुरू

इससे पहले भी रूस भारतीय छात्रों को ऐसा भरोसा दे चुका है। रूसी दूतावास के उप प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने जुलाई में कहा था कि यूक्रेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अब रशियन यूनिवर्सिटीज में अपनी पढ़ाई जा जारी रख सकते हैं। उन्होंने जहां से अपनी पढ़ाई को विराम दिया था यानि जहां से कोर्स छोड़ा था, वो अब वहीं से अपनी पढ़ाई जारी कर सकते हैं। अब उन्हें बीच में पढ़ाई छोड़ने की परेशानी से भी निजात मिल पाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की भी शरण में गए मेडिकल छात्र

सुप्रीम कोर्ट की भी शरण में गए मेडिकल छात्र

गौरतलब है कि यूक्रेन से लौट ये छात्र पिछले 8 महीनों से अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्पष्ट कर चुकी है कि वह इन छात्रों को भारतीय विश्वविद्यालयों में जगह नहीं दे सकती क्योंकि नेशनल मेडिकल कमीशन ऐक्ट में ऐसा करने का प्रावधान नहीं है। केंद्र ने कहा कि ये छात्र दो कारणों से विदेश गए थे। नीट में बुरा प्रदर्शन और सस्ती शिक्षा की वजह से। ख़राब मेरिट वाले छात्रों को भारत के प्रीमियर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला देने से दूसरी तरह की कानूनी समस्याएं पैदा होंगी। साथ ही ये छात्र यहां की फीस का खर्च भी वहन नहीं कर पाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने वेब पोर्टल बनाने की दी सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने वेब पोर्टल बनाने की दी सलाह

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव देते हुए कहा कि केंद्र इन मेडिकल छात्रों की सहायता के लिए एक वेब पोर्टल बनाकर विदेशी विश्वविद्यालयों का विवरण उपलब्ध कराए, जहां वे सरकार के अकादमिक गतिशीलता कार्यक्रम के अनुसार अपना पाठ्यक्रम पूरा कर सकते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि वे एक वेब पोर्टल शुरू करें जिसमें विदेशों में मौजूद विश्वविद्यालय की खाली सीटों, फीस जैसी जानकारी दी जाए।

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