UK-India Week 2018: भारतीय छात्र हर जगह जा रहे हैं लेकिन यूके नहीं आ रहे

लंदन। लंदन में हो रहे यंग लीडर फोरम कॉन्क्लेव में आज युवा सशक्तिकरण के खिलाफ चुनौतियों पर चर्चा हुई। आयोजित कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि डायस्पोरा के युवा नेता मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के निर्माण और बेहतर सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में कैसे मदद कर सकते हैं। ओला के स्ट्रेटजिक इनीशिएटिव्स प्रमुख आनंद शाह ने कहा कि, पहचान आपके अनुभव पर आधारित होना चाहिए, क्योंकि यह हमें नेतृत्व करने की शक्ति देती है। यह फर्क नहीं पड़ता कि आपका काम क्या है।

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आनंद शाह ने कहा कि, किसी ऐसे देश के लिए प्यार होना चाहिए जो आपकी मातृभूमि और बसने वाली भूमि दोनों हो। भारतीय डायस्पोरा से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'आप इस दुनिया में जो भी छोड़ते हैं वह विरासत का प्रभाव है। हम में से प्रत्येक अपनी पहचान का प्रतिनिधित्व करता है: आधा-ब्रिट, आधा-भारतीय। वहीं 35 वर्ष से कम उम्र के युवा उद्यमियों, पेशेवरों और सार्वजनिक क्षेत्र के नेताओं से बात करते हुए कंबोडिया में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक ने कहा कि भारतीय डायस्पोरा को सक्रिय होना चाहिए और एक स्वर में बात करनी चाहिए, हमारे बीच के राजनीतिक नेताओं को इसे समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यूके-इंडिया कॉन्क्लेव में लॉन्च किया गए टेक एक्सचेंज द्विपक्षीय गलियारे के भीतर शुरू होने में स्टार्टअप की मदद की जाएगी। एक्सेस इंडिया प्रोग्राम के तहत यूके की 25 कंपनियों का पहला समूह भारत में अपना विस्तार करने के लिए तैयार हैं। दिनेश पटनायक ने राजनीतिक दलों के सदस्यों से बातचीत करते हुए कहा कि भारतीय छात्र हर जगह जा रहे हैं लेकिन यूके नहीं आ रहे हैं।

दिनेश ने इस बात को तबज्जो देते हुए कहा कि, भारतीय छात्र यूके के विश्वविद्यलयों में नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि संस्थानों को कैसे स्थापित किया जाना चाहिए और देशों में एक मुक्त गतिशीलता की आवश्यकता है, महत्वपूर्ण रूप से ब्रिटेन में। दिनेश ने इस बात पर भी जोर दिया किया कि भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए यूके तो जा रहे हैं लेकिन बिट्रिश छात्र भारत नहीं आते हैं।

सत्र के दौरान, इंडिया इंक के सीईओ मनोज लाडवा ने कहा कि भारत यूके निर्यात के बारे में चिंतित है, यह यूके-भारत की दोस्ती को दिखाता है और सम्मेलन के विषय को बताता है - ग्लोबल ब्रिटेन मीट ग्लोबल इंडिया। सोशल इंपैक्ट राउंड टेबल में पहली बार है जब लोग ब्रिटिश एशियाई ट्रस्ट के काम करने के तरीकों को देखने के लिए एक साथ आ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमने सम्मेलन के दौरान एक बहुत ही मजबूत संदेश दिया है कि भारतीय नौकरी निर्माता हैं ना कि नौकरी लेने वाले। आज हम ब्रिटेन-भारत संबंधों के भविष्य की तलाश रहे है।

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