बस बहुत हो गया, भारतीयों को कूड़ा समझना बंद करो

इस पूरे मुद्दे पर एक ऑनलाइन याचिका जारी की गई है। इस ऑनलाइन याचिका का टाइटल ही सारी कहानी कह देता है। इस याचिका को- 'भारतीयों को कूड़ा समझना बंद करो,' टाइटल दिया गया है। यह याचिका change.org पर पोस्ट की गई है। याचिका पर 900 से ज्यादा लोग साइन कर चुके हैं।
इस याचिका का आइडिया आईटी प्रफेशनल अरुण अशोकन को आया, जो इंडियन हाइमीशन में अपने अनुभव से बेहद दुखी हैं। उन्होंने बताया कि वह वहां पर अपने दो महीने के बच्चे के जन्म पंजीकरण के लिए गए थे। जो भी डॉक्यूमेंट्स हाइकमीशन की वेबसाइट पर बताए गए थे, वह सारे उनके पास थे।
चार घंटे तक लाइन में इंतजार करने के बाद जब वह काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि वेबसाइट पर गलत डॉक्यूमेंट्स दिए गए हैं और उन्हें अपने आप ही सही डॉक्यूमेंट्स के बारे में पता करना होगा।
अशोकन का दावा है कि हाइकमीशन के कर्मचारी बहुत रूखा व्यवहार करते हैं। वह कहते हैं कि वह तीन बार वहां गए हैं और हर बार उनका व्यवहार बहुत रूखा था। आप चाहे कितने भी फोटो और दस्तावेज ले जाओ, वे आपसे प्यार से बात नहीं करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब इस बारे में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त रंजन मथाई से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस याचिका के जरिए जो सुझाव आएंगे, उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि हमने इलेक्ट्रॉनिक नियुक्तियों का सिस्टम शुरू किया है।
हमारे पास एक पब्लिक रेस्पॉन्स यूनिट भी है। साथ ही हम अपने सेवाओं को सुधारने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। उच्चायोग ने वेबसाइट अपडेट कर दी है और याचिका करने वाले लोगों से बातचीत पर भी सहमति जताई है।












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