काबुल से आधी रात में निकाला गया था भारतीय मिशन, तालिबान ने सुरक्षित पहुंचाया एयरपोर्ट
काबुल, 18 अगस्त। एक बड़ी बिल्डिंग के गेट के बाहर मशीनगन और रॉकेट से चलने वाले ग्रेनेड लॉन्चर से लैस आतंकियों का समूह खड़ा। आस-पास से फायरिंग की आवाजें और उस बिल्डिंग के अंदर 150 लोग फंसे हुए। इस स्थिति में आने की कल्पना करना ही किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। लेकिन ये सिर्फ कल्पना में नहीं बल्कि हकीकत में हुआ था अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में, जब तालिबान लड़ाकों ने भारतीय दूतावास को घेर रखा था। अंदर दूतावास में 150 भारतीय राजनयिक और नागरिक मौजूद थे जो दिल थाम कर बैठे हुए थे और किसी तरह बस यहां से निकलकर अपने देश पहुंच जाना चाहते थे।
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भारतीय दूतावास के बाहर खड़े थे तालिबान लड़ाके
रविवार को जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था उसके पहले शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि तालिबान इतनी जल्दी राजधानी पर कब्जा कर लेंगे। लेकिन अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़कर भागने के बाद स्थितियां तेजी से बदलीं और काबुल में तालिबान के लड़ाके घुस आए। इसके बाद राजधानी में अफरातफरी का आलम बन गया और अफगानिस्तान से विदेशी मिशनों के बाहर जाने का सिलसिला शुरू हो गया। भारतीय मिशन भी इनमें से एक था जो अब बंद हो चुका है और राजदूत समेत सभी राजनयिक वापस आ चुके हैं। लेकिन इन सभी की वापसी इतनी आसान नहीं थी। मिशन के वापस आने के बाद जो कहानी सामने आई है वह दहलाने वाली है।
एक समय ऐसा भी आया था जब 150 भारतीय राजनयिकों व नागरिकों का दल अफगानिस्तान छोड़ाने की तैयारी कर रहा था उसी समय तालिबान के लड़ाके भारतीय दूतावास के गेट के बाहर पहुंच गए थे। बाहर तालिबान के पहुंचने की खबर सुनते ही अंदर बैठे लोगों की सांसें थम गई थी। डर था कि तालिबान कहीं बदला न लें क्योंकि जब अमेरिकी नेतृत्व में हुए हमले के बाद जब तालिबान हटाए गए थे तो नई गठित सरकार का भारत ने पुरजोर समर्थन किया था। यही वजह थी कि अंदर बैठे लोगों को डर था कि तालिबान कहीं बदला न लें।
लेकिन भारतीय दूतावास के बाहर तालिबान लड़ाके बदला लेने के लिए, बल्कि अंदर फंसे भारतीय राजनयिकों को काबुल हवाई अड्डे तक ले जाने के लिए मौजूद थे। जहां पर भारतीयों को वापस देश लाने के लिए भारतीय वायुसेना का विमान तैयार खड़ा था।
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान लड़ाकों ने भारतीय मिशन को सुरक्षित काबुल एयरपोर्ट तक पहुंचने में मदद की थी। एएफपी के संवाददाता के मुताबिक जब दो दर्जन वाहनों में से पहला वाहन सोमवार देर रात जब दूतावास से बाहर निकला तो कुछ तालिबान लड़ाके उन्हें देखकर मुस्कराए और हाथ भी हिलाया। इनमें से एक तालिबान लड़ाका उन्हें शहर के ग्रीन जोन से बाहर जाने वाली सड़क और वहां से हवाई अड्डे की मुख्य सड़क के लिए रास्ता दिखाते हुए गया।

दूतावास के अंदर था डर का माहौल
भारतीयों को बाहर निकालने के लिए तालिबान की मदद लेने का फैसला दूतावास ने ही लिया था। इसके लिए तालिबान से तब संपर्क तब किया गया जब रविवार को शहर पर कब्जा करने के बाद ग्रीन जोन के आस-पास किलेबंदी कर दी थी और उनके लड़ाके शहर के चेकपोस्ट पर नजर आने लगे थे।
रविवार को शहर पर तालिबान के कब्जा होने से पहले ही भारतीय में मिशन में 200 से अधिक लोग इकठ्ठा हुए थे। इनमें से एक चौथाई से ज्यादा लोगों को पहले ही अफगानिस्तान से बाहर निकाल दिया गया था जबकि 150 लोग अभी भी मिशन के अंदर थे जिन्हें वापस लाया जाना था।
इस समूह के साथ चल रहे एक अधिकारी के हवाले से एएफपी ने बताया है कि जब दूसरे समूह को निकाला जा रहा था उस दौरान तालिबान सामने आए और ग्रीन जोन से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी। इसके बाद उन्होंने (भारतीय अधिकारियों) ने तालिबान से बात करने और उनके काफिले को सुरक्षित निकालने के लिए कहने का फैसला किया।
इसके लिए दिन में दो बार तालिबान से अपील की गई जो विफल रहीं। जैसे ही प्रयास विफल होने की खबर मिलती दूतावास के अंदर मौजूद कर्मचारियों का दिल बैठ जाता। इस दौरान अंदर बैठे लोग हाउस अरेस्ट जैसा फील कर रहे थे।

तालिबान ने गोलियां चलाकर दिलाया रास्ता
आखिरकार कई घंटे के प्रयास के बाद दूतावास परिसर से कारें भारतीयों को लेकर बाहर निकलीं और हवाई अड्डे की पांच किलोमीटर की यात्रा शुरू की जिसे पूरा करने में पांच घंटे लगे। इस दौरान कार में बैठे लोग हमेशा अनजान हमले के डर के साये में रहे।
जब भारतीय दूतावास के लोग हवाई अड्डे की तरफ बढ़ रहे थे तो रास्ते में नई चेकपोस्ट बनी हुई थी। कुछ दूरी पर रास्ते में एक चौराहे पर काफी भीड़ होने पर भारतीय काफिले के साथ चल रहे तालिबान लड़ाके अपनी गाड़ियों से कूद गए और भीड़ पर अपनी बंदूके तान दी जिसके लोगों ने रास्ता खाली किया।
यही नहीं एक चौराहे के आस-पास जमा भीड़ को डराने के लिए तालिबान लड़ाकों ने हवा में कई राउंड फायरिंग की थी। काफिले के हवाई अड्डे पर पहुँचने के बाद तालिबान लड़ाकों का एस्कॉर्ट चला गया। एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों ने स्थिति संभाली हुई थी और उड़ानों का समन्वय कर रहे थे।

जब लगा कि यही निकल जाने का समय है
यहां पर भारतीय वायुसेना का सी-17 विमान इंतजार कर रहा था जिसमें सभी सवार हुए और इसने सुबह उड़ान भरी और भारत के गुजरात में वायु सेना के एक अड्डे पर उतरा।
काबुल से वापस लौटने वालों में एयर इंडिया के कर्मचारी शिरीन पाठारे भी थे। काबुल से उड़ान भरते हुए उन्होंने कहा कि मैं वापस आकर बहुत खुश हूं। भारत स्वर्ग है।
एक अन्य भारतीय, जो काबुल में मौजूद थे, ने वापसी की पहले ही अराजकता और हालात की कहानी बनाई। एएफपी को अपना नाम न छापने की शर्त पर इस भारतीय ने बताया कि उड़ान भरने से पहले तालिबान का एक समूह उनके ऑफिस पर पहुंचा था। हालांकि उन्होंने विनम्रता से बातचीत की लेकिन वे जाते समय उनकी दो गाड़ियां साथ लेते गए। जिसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि उनके और उनके परिवार के जाने का समय हो गया है।












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