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भारत सदियों तक गुलाम रहा, मानवाधिकार पर लेक्चर दिया तो.. भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों की बाइडेन को सलाह

India-America News: मानवाधिकार को लेकर भारत पर बार बार सवाल उठाने वाले बाइडेन प्रशासन को उनकी ही पार्टी के भारतीय मूल के सांसदों ने एक तरह से सवाल खड़े करते हुए कहा है, कि बार बार भारत को मानवाधिकार पर लेक्चर देने का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

भारतीय-अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने इस बात पर जोर दिया है, कि वे भारतीय नेतृत्व के साथ मानवाधिकार के मुद्दे उठाने जारी रखेंगे, लेकिन मानवाधिकार को लेकर भारत को लेक्चर देने का कोई फल नहीं निकलेगा।

India-America News

भारतीय मूल के सांसदों ने क्या कहा?

भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना ने भारतीय समाज पर पड़े उपनिवेशवाद का जिक्र किया और कहा, कि उपनिवेशवाद का प्रभाव भारत को मानवाधिकारों पर लेक्चर देने वाले देशों से सावधान करता है।

रो खन्ना ने कहा, कि "भारत सौ सालों से ज्यादा वक्त तक उपनिवेश रहा है, इसलिए, जब हम मानवाधिकारों के बारे में बातचीत करते हैं, और आप (विदेश मंत्री) जयशंकर या किसी अन्य के साथ बातचीत करते हैं, तो आपको यह समझना होगा, कि ये एक ऐसा संदेश जाता है, कि आप भारत को लेक्चर देने के नजरिए से बात कर रहे हैं। तो फिर वो कहते हैं, कि ये औपनिवेशिक शक्तियां हैं, जो हमें सैकड़ों सालों से उपदेश दे रहे हैं, तो फिर ये लाभदायक नहीं होगा।

भारतीय समुदाय के सदस्यों के लिए आयोजित शिखर सम्मेलन 'देसी डिसाइड्स' में बोलते हुए रो खन्ना ने साफ शब्दों में कहा है, कि 'मानवाधिकार पर भारत को लेक्चर देने का कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है।'

कार्यक्रम में बोलते हुए रो खन्ना ने आगे कहा, "अगर आप भारत के साथ बातचीत करते हैं, तो फिर आपको इस तरह से बातचीत करनी चाहिए, कि हमारे यहां के लोकतंत्र में ये-ये खामियां हैं, आपके लोकतंत्र में क्या खामियां हैं और हम सामूहिक रूप से लोकतंत्र और मानवाधिकारों को लेकर कैसे आगे बढ़ा सकते हैं? मुझे लगता है, कि बातचीत करने का ये तरीका रचनात्मक नजरिया है और इससे बातचीत के कुछ फायदे हो सकते हैं।"

पैनल चर्चा के दौरान रो खन्ना के साथ-साथ तीन अन्य भारतीय अमेरिकी सांसद, श्री थानेदार, प्रमिला जयपाल और डॉ. अमी बेरा भी शामिल हुए थे।

आपको बता दें, कि रो खन्ना वो अमेरिकी सांसद हैं, जिन्होंने अमेरिकी संसद में भारत को प्रतिबंधों से बचाने वाला बिल पास करवाया था और वो अकसर अमेरिकी संसद में भारत के पक्ष में बोलते रहते हैं।

'अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण पार्टनर है भारत'

वहीं, सांसद रो खन्ना से सहमति जताते हुए प्रमिला जयपाल ने कहा, कि "हमें लेक्चर नहीं देना चाहिए, मैं रो (खन्ना) से सहमत हूं। लेकिन, हमें संयुक्त राज्य अमेरिका के सभी हितों के बारे में सोचना होगा। यह निश्चित रूप से आर्थिक मुद्दा होगा। भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है, हम अन्य क्षेत्रीय गतिशीलता और वैश्विक गतिशीलता के कारण एक महत्वपूर्ण भागीदार हैं।"

उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला, कि अमेरिका को भारत में जो हो रहा है, उसे उसी तरह देखना चाहिए, जैसे वह कई मुद्दों पर चीनी सरकार की आलोचना करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है, कि वह मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी नहीं चाहता है।

वहीं, सांसद श्री थानेदार ने कहा, कि वह भारत-अमेरिका के बीच मजबूत रिश्ते के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा, कि "हमें एक मजबूत अमेरिका-भारत रिश्ते की जरूरत है। भारत ऐतिहासिक रूप से रूस और अमेरिका दोनों पक्षों से खेलता रहा है। लेकिन अब समय आ गया है, कि भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मजबूत दोस्ती के लिए प्रतिबद्ध हो, और यह ऐसी चीज है जिस पर मैं काम करना चाहता हूं।"

उन्होंने कहा, कि "संयुक्त राज्य अमेरिका को भारत की शक्ति, उसकी आर्थिक शक्ति को पहचानना होगा और चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए भारत ही सबसे अच्छा समाधान है। इसलिए, मैं सिर्फ मजबूत भारत-अमेरिका संबंधों पर काम कर रहा हूं।"

मानवाधिकारों पर कैसे ज्ञान देता रहता है अमेरिका?

मानवाधिकार को मुद्दा बनाकर अमेरिका लंबे अर्से से भारत को लेक्चर देने की कोशिश करता रहा है, जिससे दोनों देशों के संबंध अकसर असहज होते नजर आए हैं।

पिछले महीने, भारत ने भारत में मानवाधिकारों के हनन पर संयुक्त राज्य अमेरिका की एक रिपोर्ट की तीखी आलोचना करते हुए कहा था, कि अमेरिकी रिपोर्ट भारत को लेकर "गहरी पक्षपातपूर्ण और खराब समझ" को दर्शाती है।

अमेरिकी विदेश विभाग की 2023 मानवाधिकार रिपोर्ट में भारत में विभिन्न मानवाधिकारों के हनन की "विश्वसनीय रिपोर्ट" का उल्लेख किया गया है, जिसमें मणिपुर जातीय हिंसा और कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या जैसे "अंतरराष्ट्रीय दमन" को शामिल किया गया है।

अमेरिकी विदेश विभाग की 2023 मानवाधिकार रिपोर्ट ने मानवाधिकारों के हनन जिसमें न्यायेतर हत्याएं, जबरन गायब करना, कठोर जेल की स्थिति, मनमानी गिरफ्तारी या हिरासत और अंतरराष्ट्रीय दमन जैसे मामलों का जिक्र किया गया है। इसमें यह भी दावा किया गया है, कि भारत सरकार ने मानवाधिकारों का हनन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर न्यूनतम कदम उठाए।

जिसको लेकर विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा था, कि "यह रिपोर्ट बेहद पक्षपातपूर्ण है और भारत को लेकर खराब समझ को दर्शाती है। हम इसे कोई महत्व नहीं देते हैं और आपसे भी ऐसा करने का आग्रह करते हैं।"

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