राफेल, सुखोई, चिनूक... चीन को भीषण जवाब देने की तैयारी, आज पूर्वी कमान के सभी जेट्स उतारेगा भारत
चीन ने पिछले कुछ महीनों से अपनी वायुसेना की गतिविधियों को सीमा के पास बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से भारतीय रडार में उनकी गतिविधियां कैप्चर हो रही हैं। लिहाजा, इंडियन एयरफोर्स भी लगातार एक्टिव मोड पर है।
Indian Air Force: भारतीय वायु सेना की पूर्वी वायु कमान गुरुवार से अपनी युद्ध-क्षमता और रणनीति का परीक्षण करने के लिए दो दिवसीय प्रमुख अभ्यास करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन एयरफोर्स इस दौरान भीषण युद्धाभ्यास करने वाली है, जिसका मकसद चीन को सीधे तौर पर चेतावनी देना होगा। अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में चीनी सैनिकों के साथ हुए संघर्ष के बाद से ही इंडियन एयरफोर्स काफी आक्रामक मोड में है और लगातार उड़ानें भर रही है।

भीषण अभ्यास करेगी वायुसेना
हालांकि, इस अभ्यास की योजना बहुत पहले बनाई गई थी, लेकिन यह ऐसे समय में होने वाला है, जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और इंडियन आर्मी के सैनिकों के बीच 9 दिसंबर की झड़प के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर फिर से तनाव बढ़ गया है। सूत्रों ने कहा कि, भारतीय वायुसेना के अभ्यास के मद्देनजर चीनियों ने भी अपनी सतर्कता बढ़ा दी है और अपने शिगात्से हवाईअड्डे पर अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट तैनात कर दिए हैं। ओपन इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन, जो लोकप्रिय ट्विटर हैंडल @detresfa के लिए प्रसिद्ध हैं, उन्होंने बढ़ी हुई चीनी गतिविधि को मैप किया है जिसमें लंबी दूरी के निगरानी वाले ड्रोन की तैनाती शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, बार बार होने वाली चीनी युद्धाभ्यासों ने भारतीय लड़ाकू विमानों को उड़ान भरने के लिए मजबूर किया था। ये चीनी विमान भारतीय सीमा के पास उड़ान भर रहे थे, जिसे भारतीय रडार कैप्चर कर रहा था। हालांकि, चीनी विमान अपनी सीमा में उड़ान भर रहे थे, इसीलिए इंडियन एयरफोर्स के विमान सिर्फ निगरानी बरत रहे थे।
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इस बार का अभ्यास कैसा होगा?
सूत्रों ने कहा कि, जो हवाई अभ्यास कमांड स्तर पर होगा, इसके तहत इंडियन एयरफोर्स अपने सभी लड़ाकू विमानों के साथ युद्धाभ्यास करेगा और ये भीषण होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, "पूर्वी वायु कमान द्वारा अभ्यास एक विशेष परिदृश्य में अपनी रणनीति को मान्य करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। भारतीय वायुसेना की सभी प्रॉपर्टी इस कार्रवाई में शामिल होगी।" उन्होंने कहा कि, इस अभ्यास के दौरान पश्चिम बंगाल के हासीमारा में तैनात राफेल और एसयू-30 एमकेआई भी शामिल होंगे। सूत्रों ने यह भी कहा कि, अभ्यास का फोकस इस बात की पुष्टि करना है, कि किसी विशेष परिदृश्य में आक्रामक और रक्षा रणनीति कितनी जल्दी काम आ सकती है। हालाँकि, सूत्रों ने इस बात की जानकारी देने से इनकार कर दिया, इस युद्धाभ्यास का पूरा परिदृश्य क्या हो सकता है और इसमें कुल कितने विमान शामिल होने वाले हैं।

पूर्वी कमान के सभी बेस होंगे शामिल
इंडियन एयरफोर्स के इस अभ्यास में पूर्वी कान के सभी बेस सक्रिय होंगे, जिनमें असम के तेजपुर, छाबुआ, जोरहाट, पानागढ़ शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि, अभ्यास के दो तत्व हैं, जिनमें रक्षा युद्धाभ्यास, वायु रक्षा संपत्तियों को सक्रिय करना और आक्रामकता शामिल हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा कि, इस अभ्यास के दौरान प्रारंभिक चेतावनी वाले विमानों को ऑपरेशन में लाया जाएगा और अंधेरे में भी ऑपरेशन की क्षमता की जांच की जाएगी। दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में जब से एलएसी पर तनाव बढ़ा है, तब से भारतीय वायुसेना पूरी तरह से ऑपरेशनल अलर्ट पर है और उसने कई ऑपरेशन किए हैं।

पूरी तरह से आक्रामक वायुसेना
सूत्रों ने कहा कि, भारतीय वायुसेना ने चीन की "एंटी एक्सेस एरिया डेनियल (A2AD)" की रणनीति का मुकाबला करने के लिए एक पूर्ण आक्रामक और रक्षात्मक तैनाती की है। इस साल के मध्य से एलएसी पर चीन की हवाई गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे दोनों वायुसेनाओं की बेचैनी बढ़ गई है। अगस्त में, भारत और चीन के वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने तनाव को कम करने के लिए बातचीत भी थी। भारत और चीन के बीच हुए समझौते के मुताबिक, कोई भी लड़ाकू विमान या हथियारबंद हेलीकॉप्टर एलएसी के 10 किलोमीटर के दायरे में नहीं आ सकता है। वहीं, रसद हेलीकाप्टरों की भी सीमा एक किलोमीटर तय की गई है।












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