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ISIS ज्वाइन करने वाली महिलाओं को भारत नहीं आने देगी मोदी सरकार, केरल की रहने वालीं हैं चारों

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नई दिल्ली, जून 12: भारत से भागकर इस्लामिक स्टेट में शामिल होने वाली चार महिलाओं को लेकर मोदी सरकार न बड़ा फैसला किया है। रिपोर्ट है कि मोदी सरकार ने आतंकी संगठन में शामिल होने वाली चारों महिलाओं को भारत नहीं आने देने का फैसला किया है। ये चारों महिलाएं केरल की रहने वाली थीं और अफगानिस्तान के जेल में बंद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये चारों महिलाएं केरल से भागकर अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में अपने पति के साथ गईं थीं और फिर इन्होंने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ज्वाइन कर लिया था।

केरल की हैं चारों महिलाएं

केरल की हैं चारों महिलाएं

चारों महिलाएं केरल की रहने वाली हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में इस्लाम का शासन स्थापित करने की मकदस से बनाए गय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट को 2016-18 में ज्वाइन किया था। उस वक्त आईएसआईएस ने दुनियाभर के मुस्लिमों से आईएसआईएस ज्वाइन करने की अपील की थी, लेकिन चंद मुस्लिमों का उन्हें समर्थन मिला था। और भारत से भी करीब दर्जन भर लोग भागकर अफगानिस्तान और सीरिया पहुंचे थे। इन चारों महिलाओं के पति अलग अलग घटनाओं में मारे जा चुके हैं और ये महिलाएं इस्लामिक स्टेट्स की फाइटर थीं। हालांकि, इन्होंने दिसंबर 2019 में अफगानिस्तान प्रशासन के सामने सरेंडर कर दिया था और फिर इन्हें जेल भेज दिया गया था।

408 सदस्य हैं जेल में बंद

408 सदस्य हैं जेल में बंद

अफगानिस्तान सुरक्षा निदेशालय के प्रमुख अहमद जिया सरज के मुताबिक अफगानिस्तान की अलग अलग जेलों में 13 देशों के 408 इस्लामिक स्टेट के सदस्य बंद हैं। जिनमें भारत के चार, चीन के 16, पाकिस्तान के 299, बांग्लादेश के 2 और मालदीव के भी 2 कैदी हैं। अफगानिस्तान सरकार ने कहा है कि इस्लामिक स्टेट के कैदियों को उनके देश भेजने के लिए सभी 13 देशों के साथ उनकी बातचीत हो रही है। हालांकि, नई दिल्ली स्थिति अफगानिस्तान के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर बात करने से मना कर दिया है। वहीं, काबुल में अधिकारियों का कहना है कि वो भारत सरकार के फैसले का इंतजार कर रहा हैं।

वापस नहीं आने देगी सरकार

वापस नहीं आने देगी सरकार

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार इन चारों महिलाओं को वापस भारत आने नहीं देना चाहती है। द हिंदू ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सरकार के अलग अलग एजेंसियों के बीच इस मुद्दे पर एक सहमति नहीं बन पाई है और इस बात की उम्मीद काफी कम है कि उन्हें वापस भारत आने की इजाजत दी जाए। रिपोर्ट के मुतिबिक, जब इन महिलाओं ने आत्मसमर्पण कर दिया था, उसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों ने दिसंबर 2019 में इन महिलाओं से मुलाकात की थी। ये चारों महिलाएं अपने बच्चों के साथ अफगानिस्तान की जेल में बंद हैं।

महिलाओं की पहचान

महिलाओं की पहचान

मार्च 2020 में Stratnewsglobal.com नाम की एक वेबसाइट ने एक इन महिलाओं से पूछताछ का एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में तीन महिलाएं दिखाई दे रहीं थीं। वीडियो के आधार पर इन तीन महिलाओं की पहचान सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा, रफीला, मेरिन जैकब उर्फ मरियम और निमिशा उर्फ फातिमा ईसा के तौर पर की गई थी। वहीं, अफगानिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि दो और भारतीय महिलाओं और एक पुरूष ने अफगानिस्तान अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पिण किया था।

महिलाओं की सोच है कट्टरपंथी

महिलाओं की सोच है कट्टरपंथी

अधिकारियों के मुताबिक इन महिलाओं को सरकारी गवाह बनाने और घर वापसी के लिए विचार किया गया था और फिर इनसे पूछताछ भी की गई थी, लेकिन इंटरव्यू के दौरान पता चला था कि इन महिलाओं की सोच काफी ज्यादा कट्टरपंथी है ऐसे मे अफगानिस्तान के अधिकारियों से उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अपील की जाएगी। वहीं, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के कहने पर इंटरपोल ने भी इनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था। भारतीय नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी यानि एनआईए ने 2017 में एक चार्जशीट दाखिल किया था, जिसमें 21 महिलाओं और पुरूषों के नाम थे और सभी के सभी केरल के रहने वाले थे, जिनमें सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा का नाम भी था। ये सभी लोग 2016 में भारत से भागे थे और फिर इन सभी लोगों ने अफगानिस्तान जाकर आईएसआईएस ज्वाइन कर ली थी। ये सभी ईरान के रास्ते पैदल चलते हुए अफगानिस्तान तक पहुंचे थे।

इंजीनियर है सेबेस्टियन

इंजीनियर है सेबेस्टियन

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि सोनिया सेबेस्टियन एक इंजीनियर ग्रेजुएट है और 31 मई 2016 को अपने पति अब्दुल राशिद के साथ मुंबई एयरपोर्ट से निकली थी। एनआईए के मुताबिक दोनों पति पत्नी ने जुलाई 2015 में ही पडन्ना और कासरगोड में इस्लामिक स्टेट के लिए गुप्त कक्षाओं का आयोजन किया था, जिसमें जिहाद को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कक्षाओं का आयोजन किया गया था।

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English summary
The central government will not allow four women, who fled Kerala to join the Islamic State, to return to India.
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