भारत को सस्ता तेल सप्लाई के लिए उतरे मैदान में नए खिलाड़ी, दे रहे भारी डिस्काउंट
नई दिल्ली, 29 जुलाईः भारत के लिए सस्ता रूसी तेल को खरीदने के कई और रास्ते खुलते दिख रहे हैं। यूक्रेन पर रूसी हमले के पांच महीने गुजर जाने के बाद अब कई छोटे इंटरनेशनल बिजनेसमैन भारत को उस रूसी तेल की आपूर्ति करने के लिए आगे आ रहे हैं जो रूस के विरोधी खेमे ने लेने से इंकार कर दिया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की सरकारी रिफायनरी जैसे इंडियन ऑइल कॉर्परेशन छोटे और कम साख वाले व्यापारियों से तेल खरीदने के लिए तैयार हो रही हैं।

छोटे व्यापारियों के साथ काम करना आसान
अधिकारियों के मुताबिक रूसी उत्पादकों के साथ काम करने की बजाए, इन व्यापारियों के साथ काम करना अधिक आसान है क्योंकि इसमें ब्यूरोक्रेसी कम होती है जो कि डील को तेज कर देती है। फिलहाल वेलब्रेड और मॉन्टफोर्ट जैसी कंपनियां भारतीय खरीददारों को रूसी तेल बेच रही हैं और वो कोरल एनर्जी और एवरेस्ट एनर्जी जैसे ट्रेडर्स की राह पर चल रही हैं। यह कंपनियां बड़े समूहों जैसे विटोल ग्रुप की कमियों को पूरा करने के लिए तैयार हैं।

स्विट्जरलैंड, दुबई और सिंगापुर में कंपनियों का ऑफिस
अधिकारियों के अनुसार इन कंपनियों के कार्यालय स्विट्जरलैंड, दुबई और सिंगापुर में हैं। फिलहाल ब्लूमबर्ग ने जब इस बारे में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, वेलब्रेड, मॉन्टफोर्ट, रोसनेफ्ट जैसी कंपनियों से सवाल करने के लिए ईमेल भेजे तो किसी का जवाब नहीं आया। व्यापारियों और जहाज के बिचौलियों ने कहा कि वो इन कंपनियों के बारे में अधिक नहीं जानते, केवल इतना जानते हैं कि वो समय समय पर ईंधन लाती-ले जाती रहती हैं।

श्रीलंका को भी मिल रहा तेल
ट्रेडिंग कंपनियां कई बार बिचौलियों का काम भी करती हैं जिससे विक्रेताओं और खरीददारों के बीच जो कमियां हैं उन्हें पूरा किया जा सके। सैद्धांतिक तौर से कुछ कंपनियां रूसी निकायों के साथ काम करना जारी रख सकती हैं जिनपर प्रतिबंध लगे हैं। इसके साथ ही ये इस बात का भी ध्यान रखती हैं कि अलग-अलग पेमेंट की शर्तों का प्रस्ताव दिया जा सके ताकि फंड की मूवमेंट बनी रहे। रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका को मई में कोरल एनर्जी ने रूसी तेल का जहाज पहुंचाया था। तब से श्रीलंका को भी इस ट्रेडर से कई बार तेल मिल चुका है।

इन कंपनियों से मिलता है भारी डिस्काउंट
वंदा इनसाइट की फाउंडर वंदना के मुताबिक भारतीय रिफायनरियां भी अब इन नए, छोटे ट्रेडर्स के साथ डील करने का खतरा उठाना चाहती हैं, क्योंकि इनसे मिलने वाला डिस्काउंट बेहद अधिक है और इन्हें मना करना आसान नहीं है। हम जानते हैं कि भारतीय रिफायनरियां चाहती हैं कि रूसी कार्गो की आपूर्ति उन्हें डिलीवरी बेसिस पर हो। जब तक नए ट्रेडर यह ज़रूरत पूरी कर रहे हैं, यह काम बनता रहेगा।

8 डॉलर तक का मिल रहा डिस्काउंट
अधिकारियों के अनुसार, व्यापारियों की नई खेप, रूसी यूराल क्रूड ऑइल की सप्लाई पर करीब 8 डॉलर प्रति बैरल तक का डिस्काउंट दे रही हैं। कुछ व्यापारी दिरहम जैसी वैकल्पिक करेंसी में भी पेमेंट की सुविधा दे रहे हैं। इसके साथ ही भारत के सेंट्रल बैंक ने भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अपनी करेंसी में करने की एक योजना की घोषणा की है।

रिकॉर्ड गति से तेल आयात कर रहा इंडियन ऑयल
विश्लेषिकी फर्म केप्लर के अनुसार, जैसा कि बदलाव चल रहा है, इंडियन ऑयल, रिकॉर्ड गति से रूसी तेल का आयात कर रहा है और अपने निजी प्रतियोगियों को पछाड़ रहा है। केप्लर डेटा शो के मुताबिक जुलाई में रूसी तेल की आमद औसतन 450,000 बैरल प्रति दिन रही है, जो कि पिछले महीने से 44% अधिक है। जबकि रूसी बैरल की भारत की कुल खरीद 3% बढ़कर लगभग 1 मिलियन बैरल हो गई है।












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