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India-China tension: Indian army के साथ आया ताईवान, कहा- अब ड्रैगन का अंत करना है

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ताइपे। ताइवान जिसे अक्‍सर चीन धमकाता रहता है, अब खुलकर भारत और इंडियन आर्मी के सपोर्ट में आ गया है। ताइवान टाइम्‍स की एक रिपोर्ट ने अपने ही तरीके से लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी तनाव पर भारत और इसकी सेना का समर्थन किया है। अखबार की रिपोर्ट में नजर आ रहा है कि भगवान श्रीराम, ड्रैगन पर तीर मार रहे हैं। आपको बता दें कि पिछले दिनों चीन के एक टॉप जनरल ने ताइवान पर मिलिट्री एक्‍शन की धमकी दी है।

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 ताइवान ने दिया चीन को जवाब

ताइवान ने दिया चीन को जवाब

ताइवान टाइम्‍स ने बुधवार को फोटो ऑफ द डे के साथ भगवान श्रीराम को ड्रैगन पर तीर मारते हुए दिखाया है। फोटो पर लिखा है, 'वी कॉन्‍कर, वी किल,' यानी 'हम जीतें, हमनें मारा।' इसके बाद अखबार ने लिखा है, 'भारत के राम ने लद्दाख सीमा विवाद पर चीन के ड्रैगन को तीर मारते हुए।' इस नई रिपोर्ट के साथ ही ताइवान टाइम्‍स जमकर ट्रेंड करने लगा और लोग इस तस्‍वीर को कई बार सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इस तस्‍वीर को ताइवान को चीन का करारा जवाब माना जा रहा है और विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ताइवान अब खुलकर चीन के विरोध में आ गया है।

भारत सरकार के एक फैसले से तिलमिलाया चीन

भारत सरकार के एक फैसले से तिलमिलाया चीन

पिछले माह केंद्र की सत्‍तारूढ़ बीजेपी सरकार के दो सांसदों ने ताइवान की राष्‍ट्रपति साइ इंग वेन के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्‍सा लिया था। अब बीजेपी सरकार के इस फैसले से चीन को मिर्ची लग गई है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत से कहा कि वह ताइवान का समर्थन करना बंद करें। साथ ही भारत को उसके आतंरिक मामलों में हस्‍तक्षेप न करने के लिए भी कहा गया है। बीजेपी सांसद मिनाक्षी लेखी और राहुल कासवान ने ताइवान की राष्‍ट्रपति वेन के शपथ ग्रहण में न सिर्फ शामिल हुए बल्कि उन्‍होंने वेन को बधाई भी दी थी। मिनाक्षी लेखी और राहुल कासवान 41 देशों के उन 92 मेहमानों में शामिल थे जिन्‍होंने इंटरनेट के जरिए शपथ ग्रहण कार्यक्रम में विदेशी शख्सियतों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

चीन की वन चाइना पॉलिसी किनारे!

चीन की वन चाइना पॉलिसी किनारे!

लेखी और कासवान दोनों ने ही इस बात पर जोर दिया था कि ताइवान और भारत साझा लोकतांत्रिक मूल्‍यों में यकीन रखते हैं। इसके अलावा लेखी ने साइ इंग वेन को अलग से बधाई संदेश भी भेजा जिसे कार्यक्रम में प्‍ले भी किया गया।भारत के दो सांसदों का शपथ ग्रहण में हिस्सा लेने से साफ है कि भारत कहीं न कहीं चीन की 'वन चाइना पॉलिसी' को नजरअंदाज करने लगा है। भारत और ताइवान के बीच साल 2019 में द्विपक्षीय व्‍यापार 7.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि 20 साल पहले यानी साल 2000 में एक बिलियन डॉलर पर था। ताइवान ने भी साल 2016 से 2018 के बीच निवेश में 12 गुना तक इजाफा किया और साल 2018 में यह 360 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया। वहीं 2300 भारतीय छात्रों ने ताइवान के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लिया है।

चीन ने दी ताइवान को हमले की धमकी

चीन ने दी ताइवान को हमले की धमकी

चीन ने पिछले दिनों ताइवान को धमकाया है कि अगर उसने आजादी चाही तो उस पर हमले का विकल्‍प खुला हुआ है। चीन, ताइवान को अपना हिस्‍सा मानता है और राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग पहले ही मिलिट्री एक्‍शन की बात कह चुके हैं। 20 मई को ताइवान की राष्‍ट्रपति साइ इंग वेन ने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया है और कोरोना वायरस के दौरान वह‍ हर पल चीन का खुलकर विरोध करती आई हैं। चीन के चीफ ऑफ ज्‍वॉइन्‍ट स्‍टाफ डिपार्टमेंट और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के सदस्‍य जनरल ली झूचेंग ने कहा कि सेना के प्रयोग के सभी विकल्‍प खुले हुए हैं और चीन, ताइवान पर हमला करेगा।

बनाया एक अजीब कानून

बनाया एक अजीब कानून

साल 2005 में आए इस कानून के बाद ही चीन को ताइवान के खिलाफ कानूनी आधार पर मिलिट्री एक्शन लेने की मंजूरी मिल गई थी। कानून के मुताबिक अगर ताइवान, चीन से बाहर निकलता है या फिर ऐसा करता हुए प्रतीत होता है तो फिर उस पर मिलिट्री एक्‍शन संभव है। जनरल ली ने कहा, 'अगर शांतिपूर्ण तरीके से समाधान की संभावना खत्‍म हो जाती है तो फिर पीपुल्‍स आर्म्‍ड फोर्सेज पूरे देश के साथ जिसमें ताइवान के लोग भी शामिल होंगे, किसी भी अलगाववादी नेता की योजना को सफल होने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।' उन्‍होंने आगे कहा, 'हम यह वादा नहीं करते हैं कि सेना का प्रयोग नहीं होगा और हर जरूरी उपाय का विकल्‍प सुरक्षित रखते हैं ताकि ताइवान स्‍ट्रेट्स पर स्थिति नियंत्रण में रहे।'

जिनपिंग का सपना, ताइवान हो अपना

जिनपिंग का सपना, ताइवान हो अपना

चीन हमेशा से ताइवान पर मिलिट्री एक्‍शन की बात कहता आया है लेकिन यह पहला मौका है जब इसके किसी टॉप जनरल की तरफ से ऐसी टिप्‍पणी की गई है। चीन और ताइवान के बीच विवाद, चीन के सिविल वॉर के समय से ही चल रहा है। वर्ष 1927 में हुए इस सिविल वॉर की वजह से सेनाओं ने चीन की कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया और यह गठबंधन नेशनलिस्‍ट क्‍यूमिनटैंग आर्मी यानी केएमटी के विरोध में हुआ था।वर्ष 1949 में में जब चीन का सिविल वॉर खत्‍म हुआ तक यह पॉलिसी अस्तित्‍व में आई। हारे हुए देश के लोगों को क्‍यूओमिनटैंग कहा गया और ये ताइवान चले गए। यहां पर इन्‍होंने अपनी सरकार बना ली जबकि जीती हुई कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी चीन पर शासन कर रही थी।

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English summary
India's Rama takes on Chinese Dragon how Taiwan is showing support for Indian Army against China in Ladakh over LAC.
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