SCO सम्मेलन में फिर छाया जयशंकर का 'नमस्ते डिप्लोमेसी', हाथ जोड़कर सॉफ्ट पावर कैसे बढ़ा रहा भारत? जानिए

भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने सॉफ्ट पावर, जैस अधात्म, योग, फिल्म, शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य, अहिंसा के सिद्धांत, महात्मा बुद्ध और खान-पान के जरिए अपने सॉफ्ट पावर को लगातार आगे बढ़ाया है।

Namaste Diplomacy

SCO Meeting In India Namaste Diplomacy: भारत ने पिछले कुछ सालों में वैश्विक राजनीति में लगातार अपना कदम बढ़ाया है। खासकर कोविड संकट के बाद से भारत ने अपनी डिप्लोमेसी में कुछ परिवर्तन किए हैं और उनमें से एक परिवर्तन है, भारत की सॉफ्ट पावर की छवि को मजबूत करना।

हालांकि, भारत की सभी सरकारों ने अपने अपने हिसाब से सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी के लिए काम किया है, लेकिन मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सॉफ्ट पावर बढ़ाने के लिए तेजी से काम किए गये हैं।

सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी उस कूटनीति को कहा जाता है, जिसके तहत बगैर सैन्य शक्ति या किसी तरह की जबरदस्ती का इस्तेमाल किए अपने हितों के मुताबिक सहयोग प्राप्त कर लेना। भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने सॉफ्ट पावर, जैस अधात्म, योग, फिल्म, शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य, अहिंसा के सिद्धांत, महात्मा बुद्ध और खान-पान के जरिए अपने सॉफ्ट पावर को गढ़ा है।

जिसमें ताजा सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी भारत का 'नमस्ते' है, जो दुनियाभर के देशों में तेजी से फैला है। खासकर कोविड के समय में दुनियाभर के नेता, जब हाथ नहीं मिला सकते थे, तो एक दूसरे का अभिभादन करने के लिए नमस्ते करना शुरू किया।

भारत की नमस्ते डिप्लोमेसी

नमस्ते डिप्लोमेसी ने भारत के सॉफ्ट पॉवर को नये सिरे से गढ़ा है और दुनियाभर के लोगों के बीच भारत को नई पहचान दी है, जिसमें भारत का विनम्रता झलकता है।

भारत इस वक्त शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर रहा है और गोवा में ये सम्मेलन चल रहा है। जिसमें भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर नमस्ते डिप्लोमेसी को आगे बढ़ा रहे हैं। एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए इसके लिए आठ सदस्य देशों के विदेश मंत्री गोवा पहुंचे हैं और उनसे सार्वजनिक मुलाकात के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने हाथ मिलाने के बजाए नमस्ते कहकर उनका अभिनंदन किया है।

सबसे दिलचस्प बात ये है, कि एस. जयशंकर के नमस्ते के जवाब में सभी एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों ने नमस्ते कहकर उनका अभिवादन किया। यहां तक कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भी भारतीय विदेश मंत्री के नमस्ते के जवाब में नमस्ते कहा।

एससीओ सम्मेलन की ये तस्वीरें दुनियाभर के देशों में जाएंगी, जिससे भारत की विनम्रता का प्रचार होगा और भारत के साथ दुनिया के देशों का 'पब्लिक-टू-पब्लिक' कनेक्शन बढ़ेगा।

कोविड के समय दुनिया में फैला नमस्ते

हालांकि, भारत में नमस्ते कहने की परंपरा हजारों सालों से रही है और भारत में किसी का अभिवादन नमस्ते कहकर ही किया जाता है, लेकिन मोदी सरकार ने इसे बतौर डिप्लोमेसी इस्तेमाल किया है। खासकर कोविड संकट के समय में, जब हाथ नहीं मिला सकते थे, उस वक्त नमस्ते पूरी दुनिया में छा गया।

दुनियाभर के कई वैश्विक नेताओं को आपसी मुलाकात के दौरान हाथ मिलाने की जगह नमस्ते कहकर अभिभावन का आदान-प्रदान करते हुए देखा गया। भारतीय हमेशा विश्वगुरु (दुनिया के गुरु) होने की कल्पना करते हैं और कोरोनावायरस के साथ, हम उस कल्पना के एक कदम और करीब आ गए हैं। कोरोना वायरस संकट के समय में दुनिया में नमस्ते शुरू हो गया था और हाथ मिलाना और गले मिलना बंद हो गया था।

उस वक्त जर्मनी की चांसलर एंजला मर्केल हैरान रह गईं थीं, जब उनके गृहमंत्री ने उनसे हाथ मिलाने की जगह नमस्ते कहकर उनका अभिवादन किया था।

हाथ मिलाने की कब हुई थी शुरूआत

हाथ मिलाने की शुरुआत ईसा पूर्व 5वीं सदी में यूनान में हुई थी। यह शांति की घोषणा थी और यह प्रदर्शन करने के लिए था, कि किसी के भी हाथ में हथियार नहीं है। और कोविड के समय में नमस्ते नया हथियार-मुक्त इशारा बन गया।

चीन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, स्पेन, रोमानिया, पोलैंड, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात में भी कोविड के समय हाथ मिलाने की जगह नमस्ते कहने की प्रथा चली, जिससे भारत के सॉफ्ट पावर में काफी विस्तार हुआ है और इसने भारत के शांतिवाद को दुनियाभर में फैलाया है। लिहाजा, अब भारत लगातार नमस्ते डिप्लोमेसी को बढ़ाने में लगा हुआ, ताकि दुनिया में एक नये और मजबूत भारत का उदय हो सके।

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