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भारत को झटका देने के लिए चीन दे सकता है चाबहार पोर्ट पर दस्तक

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नई दिल्ली। ईरान के चाबहार पोर्ट पर भारत और चीन के बीच नया क्षेत्रीय राजनीतिक तनाव पैदा होने जा रहा है। इस पोर्ट पर भारत को 50 बिलियन डॉलर का खर्च करना है, लेकिन लगातार हो रही देरी की वजह से ईरान अब चीन की मदद लेना चाहता है। ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 1,800 किमी दूर चाबहार पोर्ट का निर्माण करने के लिए 2003 में सबसे पहले भारत ने दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन कंस्ट्रक्शन निर्माण में हो रही देरी की वजह से अब बीजिंग को मौका मिल सकता है।

पाक-चीन को मिल चुका है निवेश का निमंत्रण

पाक-चीन को मिल चुका है निवेश का निमंत्रण

पिछले माह मार्च में ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने अपने इस्लामाबाद दौरे पर कहा था कि चाबहार पर अगर पाकिस्तान और चीन निवेश करना चाहते हैं तो तेहरान उनका वेलकम करेगा। पाकिस्तान में ग्वादर, श्रीलंका में हम्बनटोटा के अलावा म्यांमार और बांग्लादेश में चीन अपने पोर्ट का निर्माण करने में लगा है। ऐसे में चाबहार पर चीन की नजर भारत को रणनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।

चीन कर सकता है मुश्किलें खड़ी

चीन कर सकता है मुश्किलें खड़ी

पाकिस्तान के पश्चिमी सीमा से लगा चाबहार पर चीन के किसी भी प्रकार का निवेश भारत के लिए मुश्किलें खडी करेगा, बल्कि देश की रणनीति को भी कमजोर कर सकता है। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर चीन पहले से ही 50 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है और चीनी मर्चेंट पहले से ही वहां चाबहर पोर्ट के आसपास अपनी मजबूती से तैनाती दिखा चुके हैं। इस रिपोर्ट पर ऑस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी के नेशनल सिक्यॉरिटी कॉलेज के सीनियर रिसर्च फेलो डेविड ब्र्यूस्टर कहते कि भारत चाहेगा कि चाबहार पर चीन अपनी उपस्थिति और बंदरगाह के संचालन में शामिल नहीं होता है तो भी बीजिंग अपने अधिकारियों से नई दिल्ली के प्रभाव को कम करना चाहेगा।

चाबहार पर भारत की अभी भी प्राथमिकता

चाबहार पर भारत की अभी भी प्राथमिकता

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि चाबहार पर चीन निवेश करने के लिए दिलचस्पी दिखाएगा या नहीं। वहीं, पाकिस्तान ने चाबहार पर निवेश करने के लिए अपनी दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, ईरान का निर्माण सबसे महत्वपूर्ण है, जो कि ओमान की खाड़ी का सबसे बड़ा व्यापारिक हब बनने जा रहा है। तेहरान में ईरान-इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख इब्राहिम जामिली ने कहा कि चाबहार पर भारत की प्राथमिकता है, लेकिन अगर और भी निवेशक आना चाहते हैं तो इसके लिए बहुत कम जगह है।

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English summary
India’s grip on strategic port, Chabahar, loosens as Iran turns to China
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