भारत-मालदीव में डिफेंस को लेकर अहम बातचीत, जयशंकर की गंभीर डिप्लोमेसी से फिर भारतीय खेमे में मुइज्जू?

India-Maldives Talk: भारत की गंभीर कूटनीति का ही परिणाम है, कि जिस मोहम्मद मुइज्जू ने पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव से पहले से ही भारत के खिलाफ 'India Out' कैम्पेन चला रखी थी, अब उनका हृदय परिवर्तन हो रहा है और अब वो धीरे धीरे बातचीत की टेबल पर लौट आए हैं।

इस साल की शुरुआत में मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने मालदीव में तैनात तमाम भारतीय वर्दीधारी सैनिकों को वापस चले जाने के लिए कह दिया था और फिर मालदीव के मंत्रियों की प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों ने दोनों देशों के बीच के तनाव को बढ़ा दिया था, लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने गंभीरता से अपनी डिप्लोमेसी का परिचय दिया।

India Maldives hold defence talks

और अब वर्दीधारी सैन्य कर्मियों को वापस बुलाए जाने के बाद पहली बार, नई दिल्ली और माले ने शुक्रवार को शीर्ष अधिकारियों के स्तर पर रक्षा वार्ता की है, जिसमें उन्होंने "चल रही रक्षा सहयोग परियोजनाओं" और "आगामी द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों" पर चर्चा की।

डिफेंस टेबल पर लौटे भारत-मालदीव

दोनों देशों के बीच हुई ये बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के पिछले वर्ष "इंडिया आउट" अभियान के तहत पदभार ग्रहण करने के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में ठंडक बनी हुई है। पिछली रक्षा सहयोग वार्ता पिछले वर्ष मार्च में माले में हुई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह पद पर थे।

भारत और मालदीव के बीच 5वीं रक्षा सहयोग वार्ता पर रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव गिरिधर अरामने ने किया, जबकि मालदीव के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल के रक्षा बल प्रमुख जनरल इब्राहिम हिल्मी ने किया।

बयान में कहा गया, कि "बैठक में दोनों पक्षों को द्विपक्षीय रक्षा सहयोग से जुड़े मामलों पर चर्चा करने का अवसर मिला। इसमें अन्य बातों के अलावा चल रही विभिन्न रक्षा सहयोग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना भी शामिल है।"

बयान में कहा गया है, कि "दोनों पक्षों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान और क्षमता विकास परियोजनाओं जैसे साझा हितों के कुछ अन्य क्षेत्रों पर भी विचार-विमर्श किया। आगामी द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास में भागीदारी के पहलुओं पर भी चर्चा की गई।"

बयान में आगे कहा गया, कि बातचीत का पूरा दायरा "उत्पादक" रहा, जो निकट भविष्य में दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ाएगा और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि लाएगा।

वहीं, बयान का लहजा और भाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले साल के आखिर में द्विपक्षीय संबंधों को झटका लगा था।

नवंबर 2023 में सत्ता में आने के तुरंत बाद, चीन समर्थक माने जाने वाले मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से अपने सैन्य कर्मियों को उनके देश से वापस बुलाने का अनुरोध किया था। मुइज्जू ने "इंडिया आउट" के नारे पर मौजूदा राष्ट्रपति सोलिह को चुनाव में हराया था।

और फिर गतिरोध में फंसे, दोनों देश इस साल 2 फरवरी को सहमत हुए, कि 10 मार्च से 10 मई के बीच, भारत मालदीव में तैनात 80 से अधिक सैन्य कर्मियों को वापस बुला लेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था, कि मालदीव में दो हेलीकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान "सक्षम भारतीय तकनीकी कर्मियों" द्वारा संचालित किए जाएंगे, जो "मौजूदा कर्मियों" की जगह लेंगे। सैन्य कर्मियों को बदलने का काम पूरा होने के बाद, मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने इस साल मई में भारत का दौरा किया था।

धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं भारत-मालदीव संबंध

इसके एक महीने बाद, राष्ट्रपति मुइज्जू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया था। वहीं, अगस्त में, मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद मालदीव की पहली उच्च-स्तरीय यात्रा में, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने के लिए माले गए थे।

रक्षा सचिव स्तर की वार्ता, द्वीप राष्ट्र से वर्दीधारी कर्मियों की वापसी के बाद संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। हालांकि, रक्षा वार्ता को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बातें नहीं कही गईं हैं, लेकिन भारत और मालदीव ने अतीत में मजबूत रक्षा सहयोग का आनंद लिया है।

2020 में भारत ने मालदीव को डोर्नियर विमान उपहार में दिया था और 2019 में एक गश्ती पोत भी सौंपा था। पिछले साल नई दिल्ली ने माले को तटीय रडार प्रणाली भी दी थी। पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनकी तत्कालीन मालदीव समकक्ष मारिया दीदी ने उथुरु थिला फाल्हू (यूटीएफ) एटोल के सिफावारू में तटरक्षक बल के 'एकथा हार्बर' की आधारशिला रखी थी, जो मालदीव में सबसे बड़ी भारतीय अनुदान सहायता परियोजनाओं में से एक है। इस सुविधा का मकसद मालदीव के तटरक्षक बल की क्षमताओं को मजबूत करना और क्षेत्रीय मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रयासों को सुविधाजनक बनाना था।

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