मोदी सरकार की नीतियों से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ता जा रहा भारत का दबदबाः एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, हमारा लक्ष्य भारत को एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र (मैन्युफैक्चरिंग हब) बनाना है। इसके साथ ही देश को 2025 तक पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के रूप में उभारना है।

Image: (Twitter/@DrSJaishankar)
भारत के विदेश मंत्री साइप्रस के दौरे पर हैं। भारत के किसी विदेश मंत्री की डेढ़ दशक बाद निकोसिया यात्रा है। शुक्रवार को एक बिजनेस इवेंट को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का दबदबा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा, भारत को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए महत्वपूर्ण स्थान बनाने में मोदी सरकार की आर्थिक दृष्टि से संचालित व्यापार नीतियों और सुधारों ने योगदान दिया।
470 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य
एस जयशंकर ने आगे कहा, हम अपने इतिहास में सर्वाधिक FDI प्रवाह प्राप्त कर रहे हैं। पिछले वर्ष हमें FDI के रूप में 81 अरब डॉलर मिले। वर्ष 2021-22 के लिए पहली बार हमारा निर्यात 400 अरब डॉलर के पार गया और इस साल हमने 470 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा है। हम दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बन गए हैं। अब हम करीब 100 यूनिकॉर्न की मेजबानी कर रहे हैं। वर्तमान में हमारे पास यूनिकॉर्न्स की तीसरी सबसे बड़ी संख्या है।
भारत को बनाएंगे मैन्युफैक्चरिंग हब
विदेश मंत्री ने कहा, हमारा लक्ष्य भारत को एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इसके साथ ही देश को 2025 तक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के रूप में उभारना है। एस जयशंकर ने आगे कहा, कोविड महामारी के दौरान हम टीकों के निर्माण के सबसे बड़े वैश्विक केंद्रों में से एक थे और हमने 100 देशों को टीकों की आपूर्ति की। उन्होंने कहा, जी20 के लिए हमारा आदर्श वाक्य वसुधैव कुटुंबकम है। इसे हमने कोविड महामारी के दौरान व्यवहार में लाया है।
मुक्त व्यापार समझौते का समर्थन
वहीं, साइप्रस के विदेश मंत्री इयोनिस कसौलाइड्स ने कहा कि उनके देश ने यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत की गति का समर्थन किया है। साइप्रस में एक व्यावसायिक कार्यक्रम में बोलते हुए, कसौलाइड्स ने कहा, "यूरोपीय संघ और भारत के बीच संबंधों में और सहयोग के लिए महान गुंजाइश की मान्यता है। इस संबंध में, हम ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता की गति का समर्थन करते हैं।" साइप्रस यूरोपीय संघ के भीतर एक मजबूत आवाज है, और यूरोपीय संघ-भारत संबंधों को ठोस रूप से मजबूत करने की आवश्यकता है।"












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