चीन और पाकिस्तान.. दुश्मनों के खिलाफ भारत ने बनाया नया न्यूक्लियर प्लान, क्या पहले दागेगा परमाणु मिसाइल?
India Nuclear Plan: भारत अपने स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड (SFC), जिसे स्ट्रैटजिक न्यूक्लियर कमांड के नाम से भी जाना जाता है, उसमें लगातार विस्तार कर रहा है। नवीनतम परीक्षण में, भारत ने अपनी नई पीढ़ी की अग्नि-प्राइम बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसकी मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर है और यह पाकिस्तान के खतरों का मुकाबला करेगी।
परमाणु हथियारों को लेकर चीन नो फर्स्ट यूज़ (NFU) नीति का पालन करता है, लेकिन उसने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है, कि कोई भी देश उसके क्षेत्र पर कब्जा कर रहा है, या फिर किसी देश ने उसकी जमीन पर कब्जा कर रखा है, तो एनएफयू अमान्य होगा।

वहीं, पाकिस्तान परमाणु हथियारों को लेकर पहले इस्तेमाल न करने की सख्त नीति का पालन नहीं करता है। इसके बजाय, यह पहले उपयोग सिद्धांत को बनाए हुआ है, जिसका अर्थ है, कि पाकिस्तान किसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ पहले भी परमाणु बम का इस्तेमाल कर सकता है।
मिसाइल टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करता भारत
मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) टेक्नोलॉजी के साथ भारत ने 6 हजार किलोमीटर दूर तक मार करने वाली अग्नि-5 मिसाइल क्षमता का परीक्षण कर लिया है और माना जा रहा है, कि अग्नि-5 मिसाइल का टेस्ट चीन को ही ध्यान में रखकर किया गया है।
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने ओडिशा तट के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से देश की नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-प्राइम के सफल परीक्षण की घोषणा की है। ये परीक्षण, अग्नि-प्राइम का दूसरा प्री-इंडक्शन नाइट लॉन्च है। यह मिसाइल 700 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली पिछली पीढ़ी की अग्नि-II की जगह लेगी।
जैसे-जैसे भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी मिसाइलों की सीमा बढ़ाई है, टेक्नोलॉजी का भी उसी तरह से विस्तार होता गया है। अब मिसाइलों की पुरानी टेक्नोलॉजी को ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी से बदलने की कोशिशें की जा रही हैं।
अग्नि-पी, भारत की पहली छोटी दूरी की मिसाइल है, जो नई अग्नि-IV और अग्नि-V बैलिस्टिक प्रणालियों जैसे एडवांस रॉकेट मोटर्स, प्रोपेलेंट, एवियोनिक्स और नेविगेशन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी से लैस है।
अग्नि-पी से पहले, भारत ने अग्नि-V में एक और टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया था, जो अग्नि के पिछले वेरिएंट में इस्तेमाल नहीं की गई थी और इस टेक्नोलॉजी के तहत इस मिसाइल का रखरखाव काफी आसान हो जाता है और काफी तेजी से इसे फायर किया जा सकता है।

कनस्तर टेक्नोलॉजी क्या है?
मिसाइलों के कनस्तरीकरण का मतलब है, परिवहन के दौरान पर्यावरणीय तत्वों से बचाने के लिए मिसाइलों को एक सीलबंद, जलवायु-नियंत्रित ट्यूब के अंदर संग्रहीत करना। यह मिसाइल के साथ स्थायी वारहेड ले जाने की अनुमति देता है और प्रक्षेपण से पहले इसे फिर से असेंबल करने की जरूरत नहीं होती है। इससे संकट उत्पन्न होने पर परमाणु हथियार लॉन्च करने में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिलती है।
भारत ने 2015 में अग्नि-V पर पहली बार कनस्तर टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया था, जिसके बाद भारत को सुविधा मिल गई, कि अब वो कहीं से भी, किसी भी समय बैलिस्टिक मिसाइल अपने दुश्मन में दाग सकता है।
कनस्तर टेक्नोलॉजी, मिसाइलों को सड़क मार्ग से ले जाने लायक बनाता है और 50 टन से ज्यादा वजन वाली मिसाइलों को काफी आसानी से सड़क के रास्ते ना सिर्फ एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाया जा सकता है, बल्कि रास्ते से ही, चलते चलते ही किसी टारगेट पर फायर किया जा सकता है।
एक मिसाइल से कई लक्ष्यों पर वार
मार्च में, भारत ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक के साथ लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, अग्नि-V का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस तकनीक ने भारत को अपने दो आक्रामक परमाणु-संचालित पड़ोसियों- चीन और पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा लचीली प्रतिरोधक क्षमता प्रदान की है।
यानि, इस टेक्नोलॉजी के साथ भारत एक ही मिसाइल से पांच अलग अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकता है। यानि, युद्ध की स्थिति में काफी ज्यादा समय की बचत होने के साथ साथ दुश्मन के ज्यादातर ठिकानों को एक ही मिसाइल से तबाह किया जा सकता है।
कनस्तर टेक्नोलॉजी के साथ भारत पश्चिम में अपने पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र पर हमला करने में सक्षम हो चुका है। अग्नि-V और पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों, चीन को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है, जो तेजी से अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहा है।
MIRV टेक्नोलॉजी कई हथियारों को रोकने की कोशिश कर रहे विरोधियों के एयर डिफेंस सिस्टम पर भारी पड़कर बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा कवच को को भेदने में भी सक्षम है। एक MIRVed मिसाइल कई वॉरहेड से लैस होगी, जिससे एक ही मिसाइल एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकेगी या कई वॉरहेड के साथ एक ही लक्ष्य पर हमला कर सकेगी। इस तरह की व्यवस्था से एमआईआरवी को मिसाइल रोधी तकनीक से रोकना भी कठिन हो जाएगा।
अग्नि-V की MIRV तकनीक को 'दिव्यास्त्र' नाम दिया गया है, और आगे जाकर दूसरी भारतीय मिसाइलों में इस टेक्नोलॉजी की इस्तेमाल की जाएगी। पनडुब्बियों पर MIRVed मिसाइलों के उपयोग से उनकी जीवित रहने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि परमाणु पनडुब्बियों का पता लगाना मुश्किल होता है।
50 टन वजनी अग्नि-V की ऑपरेशनल तैनाती ने चीन के खिलाफ भारत की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा दिया, जिसके पास डोंग फेंग-41 जैसी मिसाइलें हैं। 12,000-15,000 किलोमीटर की रेंज के साथ, DF-41 मिसाइल, किसी भी भारतीय शहर तक मार कर सकती है। लेकिन, अब अग्नि-V ने चीन के सबसे उत्तरी हिस्से तक मार करने की क्षमता विकसित कर ली है, जो बताता है, कि भारत अपने दुश्मनों को लेकर कितनी तेजी से तैयारी कर रहा है, ताकि देश के खिलाफ दुश्मन आंख उठाने की जहमत तक ना कर सकें।
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