'हरदीप सिंह निज्जर कुख्यात हत्यारा था, कोई संत नहीं...', इंडियन एजेंसीज की कनाडा को दो टूक
India-Canada row: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाने के बाद, दोनों देशों में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। कनाडा ने अभी तक इस बात के विश्वसनीय सबूत नहीं दिए हैं कि खालिस्तान टाइगर फोर्स (Khalistan Tiger Force (KTF) के आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत का हाथ था।
वहीं दूसरी और कनाडाई खुफिया विभाग लगातार इस कहानी को आगे आगे बढ़ा रहा है कि हरदीप सिंह निज्जर सरे में गुरु नानक गुरुद्वारे का प्रमुख था और एक धार्मिक विचारधारा वाला आदमी था। अब भारतीय खुफिया एजेंसियों ने अपने डोजियर में दावा किया है कि हरदीप सिंह निज्जर अपने चचेरे भाई और गुरुद्वारे पूर्व अध्यक्ष रघबीर सिंह निज्जर को धमकी देकर गुरुद्वारे का प्रमुख बन गया था।

इंडियन इंटेल ने कहा, 'हरदीप सिंह निज्जर कुख्यात हत्यारा था, कोई धार्मिक प्रमुख नहीं...'
भारतीय खुफिया एजेंसियों के डोजियर में कहा गया है कि, हरदीप सिंह निज्जर एक आतंकी और कुख्यात हत्यारा था, वो कई धार्मिक प्रमुख या संत नहीं थी। हरदीप सिंह निज्जर खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के आतंकवादी गुरदीप सिंह उर्फ दीपा हेरनवाला का पुराना सहयोगी था, जो 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में 200 से अधिक हत्याओं में शामिल था।
डोजियर के मुताबिक, हरदीप सिंह निज्जर, एक अन्य गिरोह के सरगना गुरनेक सिंह उर्फ नेका के अपराध में भी शामिल किया था।
कैसे जाली पासपोर्ट पर कनाडा भाग था हरदीप सिंह निज्जर!
डॉजियर में कहा गया है कि हरदीप सिंह निज्जर 1996 में "रवि शर्मा" के नाम पर जाली पासपोर्ट पर कनाडा भाग गया और ट्रक ड्राइवर और प्लंबर के तौर पर वहां काम करने लगा। कनाडा में ही वह पाकिस्तान स्थित केटीएफ (Khalistan Tiger Force (KTF) प्रमुख जगतार सिंह तारा के संपर्क में आया और अप्रैल 2012 में बैसाखी जत्था सदस्य होने की आड़ में पाकिस्तान का दौरा भी किया।
केटीएफ का प्रमुख रह चुका था निज्जर!
डॉजियर में कहा गया है कि, केटीएफ प्रमुख जगतार सिंह तारा के विचारों से प्रभावित होकर हरदीप सिंह निज्जर कट्टरपंथी था। दावा ये भी किया गया है कि इन सबमें पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने उसकी मदद की थी।
डॉजियर में कहा गया है कि, तारा ने निज्जर को 2012 और 2013 में हथियार और विस्फोटक की ट्रेनिंग दी थी। डोजियर में यह भी दावा किया गया है कि 2013 में, तारा ने अमेरिका स्थित हरजोत सिंह बिरिंग को कनाडा भेजा था। जिसने निज्जर को हैंडहेल्ड जीपीएस डिवाइस का उपयोग करने की भी ट्रेनिंग दी थी। 2015 में तारा को थाईलैंड से भारत निर्वासित करने के बाद, निज्जर ने केटीएफ के संचालन प्रमुख की भूमिका निभाई थी।
कनाडाई अधिकारियों ने नहीं लिया कोई एक्शन!
डोजियर के मुताबिक, तब तक निज्जर के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी हो चुका था। यह नवंबर 2014 में जारी किया गया था। लेकिन राजनीतिक दबाव की वजह से कनाडाई इमीग्रेशन अधिकारियों ने इसे दो बार अस्वीकार किया और रेड कॉर्नर नोटिस के बावजूद भी निज्जर को नागरिकता प्रदान की गई थी।
कनाडा में केटीएफ का प्रभार संभालने के बाद, निज्जर केटीएफ मॉड्यूल सदस्यों की पहचान, नेटवर्किंग, ट्रेनिंग, फंडिंग और संचालन में सक्रिय रूप से शामिल था,












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