BrahMos, Akash, Submarine: विनाशक हथियारों को बेचने का बड़ा करार कर सकता है भारत, ग्राहक बनकर आ रहा ये देश
India-Brazil Defence Deal: फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेचकर भारत ने विनाशक हथियार बेचने की दिशा में बड़ा कदम पहले ही उठा चुका था और अब लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील, भारत में इन विनाशक हथियारों का ग्राहक बनकर आ रहा है।
इस महीने के अंत और अगले महीने की शुरुआत में दो ब्राजीलियाई डिफेंस डेलिगेशन भारत का दौरा करेंगे और उनके एजेंडे में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए 'सहयोग की संभावना' तलाशना शामिल होगा।

ब्राजील, लैटिन अमेरिकी देशों के लिए हथियार प्रणालियों के निर्माण के लिए भारत के साथ संयुक्त उत्पादन केंद्र स्थापित करना चाहता है। जबकि, ब्राजील की एम्ब्रेयर मध्यम परिवहन विमान (MTA) के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) की कॉन्ट्रैक्ट के लिए अपने C-390 को पेश कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों ने विमान निर्माण, सैटेलाइट निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर रक्षा क्षेत्रों में आपसी सहयोग को शामिल करने पर विचार कर रहे हैं। दोनों देशों ने व्यापार प्रतिबंधों को पार करते हुए रक्षा उद्योग में एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाने का फैसला किया है।
भारत और ब्राजील में हो सकता है डिफेंस डील
रिपोर्ट के मुताबिक, पहली यात्रा ब्राजीलियाई सशस्त्र बल के प्रमुख एडमिरल रेनाटो रोड्रिग्स डी अगुइर फ़्रेयर की है, जो जल्द ही भारत का दौरा करेंगे।
अगस्त के अंत में एक और प्रतिनिधिमंडल के भारत आने की उम्मीद है। जिसमें वे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) 'तेजस' और WhAP प्लेटफॉर्म की संभावना तलाशेंगे। इसके अलावा, वो प्रतिनिधिमंडल आकाश और अस्त्र जैसी भारत निर्मित मिसाइल प्रणालियों को खरीदने पर भी विचार करेगा।
ब्राजील में काम करने वाली अभी एकमात्र भारतीय कंपनी एमकेयू कंपनी है, जो भारत में उत्तर प्रदेश से संचालित होती है। एमकेयू पिछले कुछ वर्षों से ब्राजील में काम कर रही है और उसने ब्राजील की संघीय पुलिस, सैन्य पुलिस और सेना के साथ डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट किए हुए हैं।
पिछले साल दोनों देशों के अधिकारियों ने मुलाकातों की झड़ी लग गई थी। 2023 में, भारतीय रक्षा उद्योग ने रियो में LAAD (डिफेंस एक्सपो) में भाग लिया था। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, यंत्र इंडिया लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और भारत-रूस संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस के प्रतिनिधियों ने उस प्रदर्शनी में भाग लिया था।
इसके अलावा, मई 2023 में भारत के संयुक्त सचिव अनुराग बाजपेयी के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्राजील का दौरा किया था और शीर्ष रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की थी।
इसके अलावा पिछले साल ब्राजील के सैन्य प्रमुख भी छह दिवसीय यात्रा पर भारत आए थे।
ब्राजील विशेष रूप से उन देशों का स्कॉर्पीन क्लब बनाने की कोशिश कर रहा है, जो सर्वोत्तम टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान करने के लिए पनडुब्बियों का उत्पादन और संचालन करते हैं।
भारत भी स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का संचालन करता है और इन दिनों ब्राजील में, पनडुब्बियों के रखरखाव के लिए भारत के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की बातचीत चल रही है।
जबकि, सितंबर में आने वाला प्रतिनिधिमंडल तटीय प्रणालियों (Coastal Systems) पर ध्यान केंद्रित करेगा। माना जा रहा है, कि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और ब्राजील के बीच अपतटीय गश्ती जहाजों के अधिग्रहण को लेकर अंतिम समझौता हो सकता है।
इसके अलावा, ब्राजील अपनी पहली परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बी, अल्वारो अल्बर्टो विकसित कर रहा है। ब्राजील और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी के तहत विकसित की गई इस पनडुब्बी के 2029 में लॉन्च होने की उम्मीद है। और यह पनडुब्बी भारतीय ब्रह्मोस-एनजी सिस्टम से लैस हो सकती है।

ब्राजील क्यों करना चाहता है भारत से समझौता?
2024 की शुरुआत में एक इंटरव्यू में, ब्राजील के रक्षा उत्पादों के सचिव मेजर-ब्रिगेडियर रुई चागास मेस्किटा ने कहा था, कि "जब हम भारत को देखते हैं, तो हम साथ मिलकर काम करना चाहते हैं, ताकि हम संयुक्त रूप से तैयार उत्पाद भी विकसित कर सकें और लैटिन अमेरिकी बाजार में इन विकसित उत्पादों को बेचने के लिए ब्राजील को एक केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर सकें।"
लैटिन अमेरिकी रक्षा बाजार का आकार 2024 में 1.38 अरब अमरीकी डॉलर होने का अनुमान है और 2029 तक इसके 1.78 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
ब्राजील, चिली और कोलंबिया जैसे लैटिन अमेरिकी देश अपनी जमीन और नौसेना बलों पर विशेष ध्यान देकर अपनी सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं।
कोलंबिया अपनी नौसेना को मजबूत करना चाहता है और 2030 तक दो और फ्रिगेट शामिल करने की योजना बना रहा है, जबकि साल 2025 तक इसके बेड़े में छह फ्रिगेट होंगे। इस बीच, पेरू, पैराग्वे और ब्राजील अपने पुराने बख्तरबंद वाहनों के बेड़े को बदलने की सोच रहे हैं। चूंकि ये वाहन जमीनी बलों को महत्वपूर्ण गतिशीलता, सुरक्षा और मारक क्षमता प्रदान करते हैं, इसलिए उनका उत्पादन क्षेत्र की रक्षा अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है।
हालांकि, भारत ने अर्जेंटीना को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए जोरदार पैरवी की थी, लेकिन अमेरिकी दबाव की वजह से अर्जेंटीना को, अमेरिकी सेकेंड-हैंड एफ-16 खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि अर्जेंटीना भारत से नया तेजस फाइटर जेट खरीदना चाहता था।
ब्राजील खरीदेगा भारतीय 'आयरन डोम'
भारतीय "आयरन-डोम" आकाश, जो सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एसएएम) है, ब्राजील उसे खरीदना चाहता है और माना जा रहा है, कि वो जल्द ही ऑर्डर दे सकता है। हालांकि, चीन ने अपने स्काई ड्रैगन 50 को भी ब्राजील के सामने रखा है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि दक्षिण अमेरिकी शीर्ष अधिकारी आकाश मिसाइलों के लिए भारत से 'सरकार-से-सरकार' आधारित सौदे पर जोर दे रहे हैं।
ब्राजील के सैन्य प्रमुख जनरल टॉमस मिगुएल माइन रिबेरो पाइवा ने आकाश एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम हासिल करने के लिए भारत के साथ "सरकार-से-सरकार" समझौते का सुझाव दिया है।
आकाश सिस्टम 4-25 किलोमीटर की रेंज में उड़ने वाले हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट और यूएवी को प्रभावी ढंग से निशाना बना सकता है। यह पूरी तरह से ऑटोमेटिक है और लक्ष्य का पता लगाने से लेकर मार गिराने तक, काफी तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए जाना जाता है। यह एक ही फायरिंग यूनिट का उपयोग करके कमांड गाइडेंस द्वारा 25 किलोमीटर की रेंज में एक साथ चार हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।
चूंकी भारत की मिसाइलों के निर्माण की क्षमता टॉप क्लास है और कई मायनों में अमेरिका को भी टक्कर देता है, इसलिए भारतीय मिसाइलों को लेकर देशों का काफी मजबूत भरोसा है। भारत इस वक्त हाइपरसोनिक मिसाइल का निर्माण कर रहा है, जिसकी क्षमता चीन और रूस के हाइपरसोनिक मिसाइलों से 5 गुना ज्यादा है, जबकि अमेरिका अभी तक हाइपरसोनिक मिसाइल बना भी नहीं पाया है।












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