UNGA Ukraine Resolution 2026: UN में रूस-यूक्रेन युद्ध पर सीजफायर प्रस्ताव पास, भारत ने फिर क्यों बनाई दूरी?
UNGA Ukraine Resolution 2026: रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध को चार साल पूरे हो चुके हैं। इस चौथी बरसी के मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में शांति की दिशा में एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत ने एक बार फिर अपनी 'रणनीतिक कूटनीति' का परिचय देते हुए मतदान से दूरी बना ली।
रूस-यूक्रेन युद्ध के 4 साल होने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'यूक्रेन में स्थायी शांति के लिए समर्थन' शीर्षक से एक प्रस्ताव पेश किया गया। 193 सदस्यीय महासभा में इस प्रस्ताव को बहुमत से अपना लिया गया, लेकिन मतदान के पैटर्न ने दुनिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में पेश किया गया, जब रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए पूर्ण पैमाने के आक्रमण को चार साल पूरे हो चुके हैं। युद्ध की लंबी अवधि और बढ़ते मानवीय संकट के बीच यह मतदान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
India Abstains Russia Ukraine Vote: भारत सहित 51 देशों ने क्यों बनाई दूरी?
भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहते हुए एक बार फिर यह संकेत दिया कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध पर तटस्थ और संतुलित रुख बनाए रखना चाहता है। भारत इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र में ऐसे कई प्रस्तावों पर मतदान से परहेज करता रहा है, जिनमें सीधे तौर पर किसी एक पक्ष की आलोचना की गई हो।
भारत के अलावा मतदान से दूरी बनाने वाले देशों में कई बड़े और प्रभावशाली राष्ट्र शामिल रहे, जिनमें अमेरिका, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बांग्लादेश, श्रीलंका और बहरीन जैसे देश भी शामिल हैं। इन देशों का रुख यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं।
UNGA Vote के मुख्य आंकड़े कुछ ऐसे रहे
इस बार का मतदान बेहद चौंकाने वाला रहा क्योंकि भारत के साथ मतदान से दूरी बनाने वाले 51 देशों में अमेरिका भी शामिल था। आमतौर पर यूक्रेन का सबसे बड़ा समर्थक रहने वाला अमेरिका इस बार भारत, चीन, ब्राजील और यूएई जैसे देशों की कतार में खड़ा नजर आया। इस प्रस्ताव पर हुए मतदान के परिणाम कुछ इस प्रकार रहे:
पक्ष में वोट: 107 देशों ने यूक्रेन के समर्थन में और तत्काल युद्धविराम के पक्ष में मतदान किया।
विरोध में वोट: 12 देशों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया (जिनमें रूस, बेलारूस, उत्तर कोरिया, ईरान और क्यूबा जैसे देश शामिल हैं)।
मतदान से पिछे हटें: भारत सहित 51 देशों ने मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
UNGA Ukraine Resolution प्रस्ताव की मुख्य मांगें क्या हैं?
पारित किए गए प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए रूस और यूक्रेन के बीच बिना किसी शर्त के तुरंत पूर्ण युद्धविराम हो। यूक्रेन की संप्रभुता और उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं (समुद्री जल सहित) का सम्मान। जंग के दौरान युद्धबंदियों की अदला-बदली और जबरन निकाले किए गए नागरिकों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षित वापसी कि जाए।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस प्रस्ताव पर क्या कहा?
यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने उन 107 देशों का आभार जताया जो जीवन की रक्षा के लिए उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने इसे शांति की ओर एक आवश्यक कदम बताया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस युद्ध को 'वैश्विक चेतना पर कलंक' करार दिया। उन्होंने कहा 2025 का साल यूक्रेन के नागरिकों के लिए सबसे घातक रहा है, जहां सबसे अधिक मौतें दर्ज की गई हैं।
यह युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, उतना ही विनाशकारी होगा। तत्काल और पूर्ण युद्धविराम ही एकमात्र समाधान है। हालांकि महासभा का यह प्रस्ताव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। भारत का मतदान से दूर रहना यह दर्शाता है कि वह किसी भी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय शांति के लिए मध्यस्थता और स्वतंत्र विदेश नीति के विकल्प को खुला रखना चाहता है।












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