इजरायल की एक स्टडी में वैक्सीन की बूस्टर डोज के दिखे बेहतर नतीजे, 4 गुना तक मजबूत हुआ इम्यून सिस्टम
नई दिल्ली, अगस्त 23। भारत समेत दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज को लेकर चर्चा बहुत जोरों पर है। हाल ही में अमेरिका ने तो अपने यहां बूस्टर डोज को मान्यता दे दी है और 20 सितंबर से वहां बूस्टर डोज लगना भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में ये सवाल अभी भी उठ रहे हैं कि क्या कोरोना को मात देने के लिए बूस्टर डोज लगाना जरूरी है और अगर जरूरी है भी तो बूस्टर डोज कितनी कारगर है? इन सभी सवालों के जवाब इजरायल की एक स्टडी में मिल जाएंगे, जो हाल ही में की गई है।
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फाइजर की बूस्टर डोज के दिखे अच्छे नतीजे
इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा एक स्टडी के जारी किए गए परिणामों के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज काफी हद तक संक्रमण को कम करने और उसके रोकने में असरदार है। इस स्टडी के डाटा से पता चलता है कि फार्मास्युटिकल कंपनी फाइजर की कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज से इम्युनिटी में काफी सुधार देखने को मिला है। स्टडी में सामने आया है कि फाइजर वैक्सीन की तीसरी डोज 60 साल या फिर उससे अधिक उम्र के लोगों में संक्रमण को रोकने और गंभीर परिणामों से बचाने में काफी असरदार है।
दो डोज के मुकाबले बूस्टर डोज से अधिक मजबूत हुआ इम्यून सिस्टम
स्टडी के मुताबिक, 60 साल और उससे उपर के जिन लोगों को फाइजर वैक्सीन की बूस्टर डोज दी गई, उनकी इम्युनिटी सिस्टम दो डोज लेने वाले लोगों के मुकाबले 4 गुना ज्यादा है। दोनों श्रेणी के लोगों की तुलना 10 दिन की समयसीमा के आधार पर की गई। बूस्टर डोज लेने वाले लोगों में 10 दिन के बाद वायरस का गंभीर असर होने का खतरा 5 से 6 गुना कम नजर आया।
अमेरिका समेत इन देशों ने बूस्टर का किया है ऐलान
आपको बता दें कि बूस्टर डोज की जरूरत को इस हिसाब से भी समझा जा सकता है कि अमेरिका समेत कई देशों ने अपने यहां पर बूस्टर डोज को लगाने की अनुमति दे दी है। इनमें अमेरिका के अलावा कनाडा, जर्मनी और फ्रांस का नाम शामिल है। भारत में भी बूस्टर डोज को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। इसके अलावा कई देशों में बूस्टर डोज के बेहतर परिणामों के लिए कई अध्ययन भी चल रहे हैं।












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