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POK में कोई जीते, कोई हरे ! पकिस्तान तो बदस्तूर जुल्म ढायेगा

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नई दिल्ली, 26 जुलाई। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इमरान खान की सरकार ने चुनाव में जम कर धांधली की। यह आरोप पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज पार्टी ने लगाये हैं। दरअसल पीओके में चुनाव, दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की एक कोशिश है। यहां कहने के लिए एक प्रांतीय असेम्बली है जिसके चुनाव से सरकार का गठन होता है।

imran khan party won by rigging in kashmir election pakistan will inflict atrocities

हकीकत में यह प्रांतीय सरकार, केन्द्रीय हुकूमत और सेना की कठपुतली होती है। पाकिस्तानी सेना अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए पीओके में पिछले कई दशक से जुल्म ढा रही है। पीओके के लोग पाकिस्तानी हुकूमत को जरा भी पसंद नहीं करते। 2017 में पाकिस्तान के एक अखबार ने एक सर्वे प्रकाशित किया था जिसमें कहा गया था कि पीओके के 73 फीसदी लोग चाहते हैं कि उनका इलाका पाकिस्तान की दखलंदाजी से मुक्त हो जाए। यानी पीओके के लोग पाकिस्तान के चंगुल से आजाद होना चाहते हैं। इस सर्वे से पाकिस्तान सरकार इतनी चिढ़ गयी कि उसने अखबार को ही बंद करा दिया। भारत हमेशा से पीओके में चुनाव का विरोधी रहा है क्यों कि यह इलाका पुराने जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा है।

क्या है पीओके ?

क्या है पीओके ?

1947 में भारत की आजादी के समय अंग्रेजों ने रियासतों के सामने ये विकल्प रखा था कि वे अपनी मर्जी के मुताबिक भारत या पाकिस्तान के साथ रह सकते हैं। उस समय जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह थे। उन्होंने हिंदुस्तान या पाकिस्तान में से किसी के साथ जाना मंजूर नहीं किया। राजा हरि सिंह ने जम्मू कश्मीर रियासत को आजाद रखने का फैसला किया। भारत और पाकिस्तान का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था। जम्मू कश्मीर की बहुसंख्यक आबादी मुसलमान थी लेकिन राजा हिंदू थे। पाकिस्तान चाहता था कि यह रियासत धर्म के आधार पर उसके साथ आ जाए। लेकिन राजा हरि सिंह ने कश्मीर को आजाद रखने का फैसला किया तो पाकिस्तान चिढ़ गया। उसने कबायली छापामारों के आगे कर कश्मीर पर हमला कर दिया। कहने के लिए ये हमला कबायलियों ने किया था लेकिन लड़ाई पाकिस्तानी फौज लड़ रही थी। पाकिस्तान के हमले से राजा हरि सिंह घबरा गये। उन्होंने भारत से मदद की गुहार लगायी। तब राजा हरि सिंह ने भारत में विलय के लिए संधि की। इस संधि में तहत कश्मीर के रक्षा, विदेश और संचार मामलों पर भारत का नियंत्रण हो गया। भारतीय फौज ने पाकिस्तानी सैनिकों के दांत खटटे कर दिया। पाकिस्तान को पीछे लौटना पड़ा। लेकिन जब युद्ध विराम लागू हुआ तो कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान का कब्जा रह ही गया था।

कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा

कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा

1947 में पाकिस्तान ने धोखे से जम्मू-कश्मीर राज्य की करीब 13 हजार 300 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया था। इसी भूभाग को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) कहा जाता है। चूंकि यह जमीन कश्मीर रियासत का हिस्सा रही है इसलिए भारत इस पर अपना अधिकार मानता है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान सैन्य अभियान में दखल किये गये किसी क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को बदल नहीं सकता है। इसलिए भारत पीओके में चुनाव को अवैध मानता है। पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कशमीर को दो प्रशासनिक क्षेत्रों में बांट रखा है। एक को वह आजाद कश्मीर (हम कहते हैं पीओके) और दूसरे को वह गिलगित-बल्टिस्तान कहता है। पीओके के लोग भी यहां होने वाले चुनाव को अवैध मानते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान चुनाव की ओट में उन पर जुल्म ढाने का एक तरह से लइसेंस हासिल कर लेता है। चुनाव के पहले पीओके के लोगों में इमरन खान सरकार के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा था। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी थी और कहा था कि इमरान सरकार उन लोगों को गुलाम बनाने की तैयारी में है। चुनाव प्रचार के समय स्थानीय लोगों में इतना गुस्सा था कि उन्होंने इमरान सरकार के एक मंत्री को पीटने के लिए दूर तक खदेड़ दिया था। मंत्री को बचाने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी।

पीओके में पाकिस्तान का अत्याचार

पीओके में पाकिस्तान का अत्याचार

मोहम्मद सज्जाद राजा पीओके के मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्होंने पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि पाकिस्तान, पीओके के लोगों के साथ जानवरों जैसा सलूक करता है। पाकिस्तान ने आजाद कश्मीर चुनाव अधिनियम 2020 बना कर स्थानीय लोगों के नागरिक अधिकार छीन लिये हैं। उन्होंने ये बात जेनेवा में आयोजित संयुक्त राषट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में कही थी। उन्होंने आरोप लगाय़ा था कि पाकिस्तानी सेना पीओके में जुल्म ढा रही है। हालात ये हो गये हैं कि जो भी पाकिस्तानी हुकूमत का विरोध करता है उसका कत्ल कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों की संस्कृति और पहचान को मिटाने की लगातार कोशिश हो रही है। इसलिए अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को बिना वक्त गंवाये कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन सज्जाद राजा की आवाज अनसुनी कर दी गयी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल हो या कोई दूसरा मानवाधिकार संगठन, कोई भी सज्जाद राजा की मदद के लिए आगे नहीं आया है।

पीओके भारत के लिए समस्या

पीओके भारत के लिए समस्या

दरअसल पीओके भारत के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द है। पाकिस्तान ने अधिकतर आतंकी प्रशिक्षण केन्द्र इन्ही इलाकों में खोल रखे हैं। लेकिन भारत ने पाकिस्तान को जवाब देने के लिए एक नयी तरकीब निकाली है। चूंकि भारत पीओके को अपना हिस्सा मानता है इसलिए दूरदर्शन और आकाशवाणी से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की भी वेदर रिपोर्ट प्रसारित की जाती है। दूरदर्शन और रेडियो पर पीओके के मीरपुर, मुजफ्फराबाद, गिलगिट जैसे शहरों के मौसम का हाल बताया जाता है। इससे पाकिस्तान बेहद चिढ़ा हुआ है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एक हद तक भारत के लिए हमदर्दी भी बढ़ी है। बहरहाल, पीओके में रविवार को हुए चुनाव से स्थानीय लोग नाखुश हैं, क्यों कि कोई जीते कोई हारे, उनकी किस्मत तो बदलने वाली नहीं।

English summary
imran khan party won kashmir election by rigging pakistan will inflict atrocities
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