पाकिस्तान अपनी मौत मरेगा...PM मोदी की सच हुई भविष्यवाणी, दिवालिया होने के बाद अगले एक साल में क्या होगा? जानिए

पाकिस्तान के पूर्व पीएम और क्रिकेट के दिग्गज रहे इमरान खान की इस हफ्ते हुई गिरफ्तारी ने देश भर में सेना के खिलाफ गुस्से को भड़का दिया है। पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हो रहा है, कि उसके हेडक्वार्टर्स पर हमले हो रहे हैं।

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Imran Khan News: पाकिस्तान में गृहयुद्ध के हालात बन रहे हैं और मंगलवार रो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक देश को फूंकने पर तुले हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण का एक अंश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये बयान साल 2019 में दिया था और उस वक्त उन्होंने जिन्ना के देश को लेकर जो भविष्यवाणी की थी, वो अब सच साबित हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने वो भाषण उस वक्त दिया था, जब बालाकोट पर भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने 'मैं भी चौकीदार' कार्यक्रम में कहा था, कि "देश में एक माहौल बन रहा है और ये माहौल हमें आगे भी बनाना है। हमें दुनिया की बराबरी करनी है"। पीएम मोदी ने आगे कहा था, कि "हमने अपना बहुत सारा समय इंडिया-पाकिस्तान, इंडिया पाकिस्तान करके बर्बाद किया है। अरे वो अपनी मौत मरेगा, तो उसको छोड़ दो, हम आगे निकल चलें।"

आज जब पाकिस्तान जल रहा है, इमरान खान के समर्थकों ने अपनी ही फौज के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है, जब पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी ने अपनी ही सेना के खिलाफ जिहाद का ऐलान कर दिया है, उस वक्त पीएम मोदी की वो भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है।

दिवालिया होने के कगार पर पाकिस्तान

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडी से लेकर तमाम एक्सपर्ट्स ने आशंका जता दी है, कि पाकिस्तान अगले महीने डिफॉल्ट कर जाएगा। लिहाजा, अगर पाकिस्तान डिफॉल्ट करेगा, तो उसकी एक साल के अंदर कैसी स्थिति हो जाएगी, आईये समझते हैं।

डिफॉल्ट होने के बाद का पहला हफ्ता

डिफॉल्ट होने के पहले हफ्ते में पाकिस्तान में स्थापित विदेशी कंपनियां इस गर्मी से बाहर निकलने की कोशिश में लग जाएंगी और उनकी पहली कोशिश पाकिस्तान से बाहर निकलने की होगी। वहीं, पाकिस्तान की कंपनियां बंद होने की स्थिति में पहुंचने लगेंगे। अगर कंपनियां बंद नहीं भी होती हैं, तो उनमें बड़े पैमाने पर छंटनी होंगे और पाकिस्तान आर्थिक संकट में बुरी तरह से समा जाएगा।

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वहीं, पाकिस्तान की सरकार, देश में मची अफरातफरी पर मीडिया रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करेगी, ताकि अपनी बदनामी से बच सके। वहीं, सरकार की दूसरी कोशिश जल्द से जल्द डेवलपमेंटल एजेंसियों से कर्ज लेने की होगी। जबकि, लोगों का विद्रोह और भी बढ़ेगा। जबकि, सामानों की कीमतों में अनुपातहीन वृद्धि के कारण, हर सामान के दाम में तेजी से उछाल आएगा और सरकारी मैनेजमेंट फेल होता नजर आएगा।

डिफॉल्ट होने के बाद का पहला महीना

डिफॉल्ट होने के पहले महीने बहुत ज्यादा संभावना इस बात की होगी, कि देश में आपातकालीन स्थितियों का निर्माण होना शुरू हो जाएगा और देश में आयात बंद हो जाएगा। आयात बंद होने का मतलब होगा, विकास पर होने वाले खर्च पर प्रतिबंध और आवश्यक सार्वजनिक क्षेत्र के खर्च में कमी, व्यापार बंद होने और औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों से भारी छंटनी के साथ आर्थिक मंदी अपना गंभीर असर दिखाना शुरू कर देगी।

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वहीं, देश में फैली अनिश्चितता के कारण, बहुत से नागरिक अपनी बचत और निवेश को बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से बाहर निकालने की कोशिश करेंगे, और यह कुछ वित्तीय संस्थानों के बंद होने सहित स्थिति को और भी खराब कर देगा। वहीं, सरकार पर प्रेशर इतना ज्यादा होगा, कि या तो प्रधानमंत्री या तो खुद इस्तीफा देकर बाहर जा सकते हैं, या फिर देश में सरकार चलाने के लिए वैकल्पिक शासन मॉडल खोजने की मांग होगी। और चूंकी बात पाकिस्तान की हो रही है, लिहाजा वहां सैन्य शासन आने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

डिफॉल्ट होने की पहली तिमाही

डिफ़ॉल्ट होने के कारण अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान की भयावहता का आकलन करने के मामले में पहली तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण होगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है, कि आर्थिक पीड़ा और सामाजिक अशांति को व्यापक रूप से महसूस किया जाएगा और कुछ राजनेताओं को इस अशांति को बढ़ाने और नकारात्मक भावना का उपयोग करके और सार्वजनिक विद्रोह को भड़काने का मौका होगा, जिसका फायदा वो उठाने की कोशिश जरूर करेंगे, लिहाजा देश में हिंसक प्रदर्शन होने की आशंका काफी बढ़ सकती है।

श्रीलंका ने भी हिंसक प्रदर्शन देखे हैं, लेकिन पाकिस्तान में ये स्थिति काफी विकराल हो सकती है। वहीं, देश में जिन लोगों के पास विदेशी करेंसी होगी, वो देश से बाहर निकलने की सोचेंगे, जबकि कीमतें नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी और पहली तिमाही में रुपये में काफी गिरावट आ जाएगी।

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डिफॉल्ट होने के बाद का पहला साल

डिफॉल्ट होने के एक साल होते होते पाकिस्तान की जीडीपी काफी कम हो जाएगी। जबकि कुछ उद्योग और सेवाएं अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू करने की तरफ बढ़ेंगी। हालांकि, आयात पर निर्भर क्षेत्रों को अभी और इंतजार करना होगा। ऊर्जा की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण, उत्पादन लागत बहुत अधिक हो जाएगी और कई सेक्टर के काम काज पूरी तरह से बंद हो चुके होंगे।

पहले वर्ष के भीतर, सरकार या यहां तक कि शासन मॉडल में भी परिवर्तन आ सकता है। आर्थिक शासन प्रणाली को फिर से तैयार करने का समय तो अभी भी आ गया है, जिसके बिना संकट से बाहर निकलना असंभव होगा। पाकिस्तान को इस तरह के संकट से उबारने की कुछ संभावनाओं और रास्तों को देखकर अंतर्राष्ट्रीय साझेदार शायद वापस पाकिस्तान पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर देंगे।

हालांकि, यह समर्थन बड़ी शर्तों के साथ होगा, जिसमें मित्र देशों की शर्तें भी शामिल हो सकती हैं। पाकिस्तान को फिर से बहुत कम छूट के साथ नये कर्ज मिल सकते हैं।

डिफॉल्ट होने पर पहली पीढ़ी पर असर

पाकिस्तान की यह पहली पीढ़ी हो सकती है, जो पाकिस्तान को डिफॉल्ट होता हुआ देखेगी। लिहाजा, पाकिस्तान की नई पीढ़ी पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद में भारी उछाल आ सकता है और लोगों के हाथों में नौकरी नहीं होने की वजह से, वो गलत रास्ते की तरफ मुड़ सकते हैं।

लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान ने अभी भी कुछ नहीं देखा है, बल्कि आने वाला वक्त भयानक होने वाला है और प्रधानमंत्री मोदी का वो कथन पूरी तरह से सच साबित होगा, कि 'पाकिस्तान अपनी मौत मरेगा।'

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