सोशल मीडिया पोस्ट मामले में एक्शन पर भड़के इमरान खान, कहा- नहीं डरेगी PTI, करेंगे देशव्यापी विरोध
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान सत्तारूढ दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) को निशाने पर लिया। जेल में बंद पाक पूर्व पीएम ने कहा कि सरकार कथित तौर पर शीर्ष न्यायपालिका के बारे में नियमों को फिर से लिखने के लिए संवैधानिक संशोधन लाने की योजना बना रही है। खान ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से राष्ट्र की इस अंतिम आशा को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मानवाधिकारों के उल्लंघन और चुनावी धोखाधड़ी की पारदर्शी जांच से बचने के लिए इन नए संशोधनों के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश काजी फैज इशा को लाने का प्रयास किया जा रहा है।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक ने रावलपिंडी की अडियाला जेल से अपने एक्स अकाउंट पर एक संदेश में कहा, "कब्जा करने वाला माफिया और उसके हैंडलर केवल अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं, राष्ट्रीय हित की परवाह किए बिना। न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला भी इसी कड़ी की एक कड़ी है। देश के सभी संस्थान नष्ट हो चुके हैं। एक सुप्रीम कोर्ट है जो राष्ट्र की आखिरी उम्मीद और सहारा है।"

एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पूर्व पीएम खान ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से राष्ट्र की इस अंतिम आशा को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मानवाधिकारों के उल्लंघन और चुनावी धोखाधड़ी की पारदर्शी जांच से बचने के लिए इन नए संशोधनों के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश क़ाज़ी फैज़ इशा को लाने का प्रयास किया जा रहा है।
खान ने सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पर 20 सीटों से कम जीत हासिल करने का आरोप लगाया, लेकिन 1997 में सुप्रीम कोर्ट पर लाठियों से हमला करने के समान ही न्यायपालिका पर हमला करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा, "केवल फर्क यह है कि इस बार न्यायपालिका की शक्तियों को हटाकर हमला किया जा रहा है। लेकिन पूरा राष्ट्र न्यायपालिका के पीछे खड़ा है।"
पीटीआई चीफ ने पीए शहबाज शरीफ को निशाने पर लेते हुए कहा, "अगर उन्हें लगता है कि हम चुपचाप बैठेंगे, तो यह उनकी गलती है, हम इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ किसी भी मामले में देश की न्यायपालिका के साथ खड़ी रहेगी। हम पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन का आह्वान करेंगे।"
इससे पहले खान ने शुक्रवार को एक ट्वीट में न्यायपालिका और सेना को निशाना बनाया था। इसको लेकर उनके खिलाफ संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) द्वारा दर्ज एक मामले को लेकर पूछताछ की गई थी। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व पीएम ने कहा, "अगर हमूद-उर-रहमान आयोग की रिपोर्ट लागू होती, तो देश में कोई मार्शल लॉ नहीं होता...अब भी पाकिस्तान में अघोषित मार्शल लॉ लागू है।"
खान ने आरोप लगाया कि पीएमएल-एन और उसके गठबंधन सहयोगी बिलावल भुट्टो जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) संसदीय दल नहीं हैं, बल्कि कुछ व्यक्तियों के इशारों पर काम कर रहे हैं। "बूट का सम्मान यह कहकर किया जा रहा है कि वोट का सम्मान होना चाहिए," उन्होंने नवाज शरीफ का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, जिन्होंने 2017 में सरकार से हटाए जाने के बाद वोटों का सम्मान करने की मांग की थी।
उन्होंने सवाल किया कि कैसे लोगों को अध्यक्ष की सहमति के बिना संसद से गिरफ्तार किया जा सकता है और चेतावनी दी कि आज जो हो रहा है वह कल दूसरों के साथ हो सकता है। आज तक किसी को भी जबरन संसद से नहीं हटाया गया है।












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