म्यांमार शरणार्थी का मणिपुर में इलाज... गुस्साई भीड़ का इंफाल में अस्पताल पर हमला , जानिए क्यों फूटा गुस्सा?

Myanmanr Manipur: म्यांमार में जारी गृहयुद्ध के बीच भारी संख्या में शरणार्थियों का भारत पहुंचने का सिलसिला जारी है, लेकिन इसने पहले ही अशांत मणिपुर को और भड़का दिया है। अपने देश में जारी लड़ाई के बीच भारत भागकर आए म्यांमार के एक नागरिक को इलाज के वक्त इंफाल में सरकारी अस्पताल पर भीड़ ने हमला बोल दिया और भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार दोपहर में यह बात फैलने के बाद, कि म्यांमार के नागरिक को इंफाल के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) अस्पताल के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अफवाह यह भी फैल गई थी, कि इलाज करवा रखा शख्स "कूकी उग्रवादी" है।

Myanmanr Manipur

इंफाल पुलिस ने कहा है, कि उस व्यक्ति की पहचान खोएंटम के रूप में हुई है, जो म्यांमार के सागांग क्षेत्र के थानन का रहने वाला है और म्यांमार में चल रही लड़ाई के दौरान गोली लगने से घायल होने की वजह से, गुरुवार दोपहर को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

म्यामार में लड़ाई, भारत में शरणार्थी

सिक्योरिटी सोर्सेस के मुताबिक, मृतक म्यांमार के खोआंटम रहने वाला एक नागरिक था, जो म्यांमार में घायल होने के बाद झरझरा अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके मणिपुर आ गया था। घायल शख्स ने करीब 2 बजे कामजोंग जिले में असम राइफल्स पोस्ट पर चिकित्सा सहायता मांगी थी।

अधिकारी ने कहा, कि "उसे वहां प्राथमिक उपचार दिया गया और गुरुवार सुबह लगभग 3.55 बजे मणिपुर पुलिस को सौंप दिया गया। उसके बाद, वे उसे आगे के इलाज के लिए इंफाल ले गए होंगे।"

आपको बता दें, कि मणिपुर में मैतेई और कुकी-ज़ोमी समुदायों के बीच चल रहे पिछले कई महीनों के संघर्ष की वजह से दोनों समुदायों के बीच खतरनाक दरारें पड़ चुकी हैं और एक समुदाय के लोग का दूसरे समुदाय के क्षेत्र में जाना खतरे से खाली नहीं होता है। मैतीई समुदाय के लोग कुकी-ज़ोमिस के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में जाने में असमर्थ हैं और कूकी समुदाय के लोग मैतई क्षेत्र में नहीं जा रहे हैं।

इसके साथ ही, मैतेई समुदाय के बीच एक प्रमुख धारणा ये फैली हुई है, कि इंफाल में जेएनआईएम अस्पताल में म्यांमार से अनियंत्रित अवैध आप्रवासन जारी है और वहां म्यांमार के लोगों का इलाज चल है, खास तौर पर उन लोगों का, जो कुकी-ज़ोमिस के समान जातीयता के हैं, और ये मुद्दा राज्य में अस्थिरता का मूल कारण है।

आपको बता दें, कि म्यांमार में एक फरवरी 2021 को सैन्य तख्तापलट के बाद से ही हिंसा जारी है और अब म्यांमार में कई जातीय ग्रुप बन चुके हैं, जिन्होंने करीब 50 प्रतिशत म्यांमार पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहीं देश के ज्यादातर हिस्से में सेना और आम लोगों के बीच लड़ाई जारी है और पिछले एक महीने में ये लड़ाई काफी बढ़ गई है और अभी तक 5 हजार से ज्यादा लोग भागकर म्यांमार से भारत पहुंचे हैं।

27 अक्टूबर से देश के विभिन्न हिस्सों में सैन्य जुंटा के खिलाफ समन्वित हमले शुरू होने से म्यांमार में हिंसा बढ़ गई है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप, जिसमें लड़ाई भारत की सीमा से लगे क्षेत्रों तक भी पहुंच गई, 5,000 से अधिक लोगों ने मिजोरम में शरण मांगी है।

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