तालिबान ने दी है बर्बाद करने की धमकी.. 17 लाख अफगानों को कैसे भगा रहा पाकिस्तान? जानें क्यों गुस्साए इब्राहिम
Ibrahim Zadran Afghanistan Refugee in Pakistan: पाकिस्तान ने हमेशा से अफगानिस्तान पर हुकूमत करने का सपना देखा है और पाकिस्तान की कोशिश हमेशा से यही रही है, किसी भी तरह से अफगानों को बर्बादी और गरीबी में रखा जाए, ताकि उनके लिए जो भी विदेशी मदद पहुंचे, उसे वो डकारते रहे।
लिहाजा, कभी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में जिहाद का बीज बोया, कभी सोवियत संघ को हटाने के बहाने तालिबान को जन्म देने में अहम भूमिका निभाई, तो कभी अमेरिका को अपना सैन्य अड्डा दिया, ताकि वहां से अफगानिस्तान के अंदर बमबारी की जा सके। इन सब वजहों से अफगानों की जिंदगी बर्बाद होती रही और लाखों की संख्या में अफगान शरणार्थी बमबारी और मौत से बचने के लिए पाकिस्तान शरण लेने पहुंचे, जिन्हें रखने के एवज में पाकिस्तान ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से अरबों डॉलर उगाहे।

लेकिन, अगस्त 2021 में तालिबान की काबुल में वापसी के बाद अफगानिस्तान को अमेरिकी मदद मिलना बंद हो गया और इसके साथ ही पाकिस्तान, जो दीमक की तरह अफगानिस्तान को खोखला करता रहा है, उसके पाइप में भी डॉलर्स का गिरना बंद गया, जिसकी वजह से पाकिस्तान ने बेहद अमानवीय तरीके से अफगानों को पाकिस्तान से भगाना शुरू कर दिया है।
स्थिति कितना भयावह है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि पाकिस्तान के अंदर करीब 17 लाख अफगान शरणार्थियों को सिर्फ 28 दिनों के अंदर पाकिस्तान से निकल जाने के लिए कहा गया है। पाकिस्तान ने कहा है, कि जो भी अफगान शरणार्थी 31 अक्टूबर तक पाकिस्तान से बाहर नहीं निकलता है, उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनकी तमाम संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा।
जिसकी वजह से काफी बुरी हालत में अफगान, पाकिस्तान से बाहर निकल रहे हैं। अफगान शरणार्थियों की स्थिति दयनीय है और पाकिस्तान से बाहर निकलने वक्त भी, कागजी कार्रवाई के नाम पर पाकिस्तान के पुलिसवाले और सीमा पर पाकिस्तानी सैनिक, पैसे वसूलते हैं।

तालिबान ने दी बर्बाद करने की धमकी
पाकिस्तान को उम्मीद थी, कि तालिबान के आने के बाद अप्रत्यक्ष तौर पर अफगानिस्तान में उसका ही शासन होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। तालिबान ने अपनी मर्जी से देश चलाना शुरू किया और अब स्थिति ये है, कि पाकिस्तान और तालिबान शासन के बीच के संबंध काफी तनावपूर्ण हो चुके हैं। कई बार सीमा पर युद्ध जैसे हालात भी बन चुके हैं।
वहीं, जब इस महीने की शुरूआत में पाकिस्तान ने अफगान शरणार्थियों को जबरन देश से निकालने का आदेश जारी किया, तो तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे माौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद, जो तालिबान सरकार के रक्षा मंत्री हैं, उन्होंने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की धमकी दी है।
माौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने 5 अक्टूबर को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आह्वान किया था।
इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री माौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने काबुल में कहा था, कि "पाकिस्तान ने जो फैसला लिया है, कि वह 1 नवंबर तक अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान से निर्वासित करेगा, वह एक बहुत ही क्रूर और अन्यायपूर्ण निर्णय है।"
तालिबानी रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान से अपील करते हुए कहा था, कि वो "इस क्रूरता और बर्बरता को रोकें, इस फैसले से दोनों देशों के बीच स्थिति खराब हो जाएगी, और यह प्रयास हम दोनों मिलकर कर रहे हैं, कि हमें एक-दूसरे के साथ चीजों को ठीक करना चाहिए, इसलिए क्रूरता और बर्बरता के साथ, हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं, और हम संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठनों से अनुरोध करते हैं कि वे मैदान में आएं और पाकिस्तान के हाथों को इस क्रूरता से रोकें।"
इसके बाद तालिबानी रक्षा मंत्री ने आह्वान किया, कि "इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और हम इसे हर कीमत पर रोकने की अपील करते हैं और हम उन सभी अमीर अफगानों से अनुरोध करते हैं, जो वर्तमान में पाकिस्तान में रह रहे हैं, वे अपनी संपत्ति और धन पाकिस्तान से बाहर निकाल लें और अपनी संपत्ति को अफगानिस्तान में ट्रांसफर कर लें।"
तालिबान के रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने पाकिस्तान में रहने वाले अफगानी नागरिकों से आह्वान करते हुए कहा था, कि "वो पाकिस्तान से अपनी संपत्ति बाहर निकालकर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दें, क्योंकि पाकिस्तान ने ये संपत्ति अफगानों के कंधों पर बनाई है।"

अफगान शरणार्थी संकट क्या है?
पाकिस्तान सरकार की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 13 लाख अफगान शरणार्थी रजिस्टर्ड हैं और 8 लाख 80 हजार शरणार्थियों के पास पाकिस्तान में रहने की कानूनी स्थिति है। जबकि, देश में 17 लाख शरणार्थी अवैध तरीके से रह रहे हैं, जिन्हें 31 अक्टूबर तक देश निकाल दिया जाएगा।
पाकिस्तान की अंतरिम सरकार ने घोषणा की है, कि जो भी शरणार्थी 31 अक्टूबर तक देश नहीं छोड़ेगा, उनकी तमाम संपत्ति एक नवंबर को जब्त कर ली जाएगी और उन्हें जबरन देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।
और इसी दर्द को अफगानिस्तान के क्रिकेटर इब्राहिम ज़ादरान ने वर्ल्ड कप में मैन ऑफ द मैच मिलने के बाद उठाया है।
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