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बदल सकती है इंसानों के पूर्वजों की कहानी, 40 लाख साल पुराना जीवाश्म बदलेगा हमारे जन्म का इतिहास!

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केप टाउन, जुलाई 04: क्या इंसानों के इतिहास को लेकर अभी तक जो हमारी समझ विकसित हुई है और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर हमारे पास जो जानकारी है, वो तमाम जानकारियां बदलने वाली हैं? ये सवाल इसलिए, क्योंकि, 27 जून को प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित एक नए स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका की एक गुफा में मिले हमारे मानव पूर्वजों के जीवाश्म हमारी अब तक की रिसर्च की तुलना में दस लाख वर्ष पुराने हैं।

दक्षिण अफ्रीका गुफा से मिला जीवाश्म

दक्षिण अफ्रीका गुफा से मिला जीवाश्म

शोधकर्ताओं ने स्टेर्कफोंटिन गुफाओं से ऑस्ट्रेलोपिथेकस के जीवाश्म अवशेषों का विश्लेषण किया है और तर्क दिया है, कि वे उसी समय रहते थे जब उनके पूर्वी अफ्रीकी समकक्ष प्रसिद्ध लुसी जैसे थे, जिस तरह से अब तक वैज्ञानिकों ने मानव विकास को समझा है। यानि, अब तक इंसानों के इतिहास को लेकर जो भी जानकारी थी, वो अब बदलने वाली है।

आस्ट्रेलोपिथेकस क्या है?

आस्ट्रेलोपिथेकस क्या है?

आस्ट्रेलोपिथेकस, जिसका अर्थ है "दक्षिणी वानर", होमिनिन्स या अब-विलुप्त हो चुके प्रारंभिक मनुष्यों का एक समूह था, जिसका आधुनिक मनुष्यों के पूर्वजों से निश्चित रूप से काफी नजदीकी संबंध था। दक्षिण अफ्रीका में जो इंसानी जीवाश्म मिले हैं, उसपर की गई रिसर्च में पता चला है कि, वो आज से करीब 44 लाख साल से 14 लाख साल पहले धरती पर रहा करते होंगे, यानि अभी तक इंसानी इतिहास को लेकर जो गणित था, उससे कई लाख साल पहले वो धरती पर रहा करते थे। यानि, अगर ये गणित सही है, तो दक्षिण अफ्रीकी जीवाश्म, हमारे अपने जीनस, होमो की तुलना में काफी पहले धरती पर रहा करते थे। उनके जीवाश्म पूर्वी, उत्तरी, मध्य और दक्षिणी अफ्रीका के स्थलों पर पाए गए हैं।

1925 में किया गया था परिभाषित

1925 में किया गया था परिभाषित

आस्ट्रेलोपिथेकस को मूल रूप से 1925 में मानवविज्ञानी रेमंड डार्ट ने परिभाषित किया था और उन्होंने इसका विश्लेषण दक्षिण अफ्रीका के तुआंग में पहले ऑस्ट्रेलोपिथ जीवाश्म (एक छोटे बच्चे की खोपड़ी) की खोज के बाद इसे परिभाषित किया था। अपने शोध के माध्यम से, डार्ट ने तर्क दिया था कि, प्रारंभिक मानव पहले अफ्रीका में विकसित हुए और फिर धीरे धीरे उनका विकास यूरोप और एशिया में हुआ था और उनकी समझ का विकास भी धीरे धीरे यूरोप और एशिया में हुआ था।

आज के इंसानों से कम थी लंबाई

आज के इंसानों से कम थी लंबाई

अपने अध्ययन में उन्होंने बताया कि, हमारे प्रारंभिक पूर्वज प्रकृति में द्विपाद थे, यानि वो दो पैरों पर चलने लगे थे, लेकिन भोजन और सुरक्षा के लिए पेड़ों का इस्तेमाल करते थे। इसके साथ ही वो भोजन चबाने के लिए मोटे तामचीनी टोपी जैसे बड़े उनके दांत थे और उनका दिमाग वानरों से थोड़ा ही बड़ा था। चेहरे और दांतों की विशेषताओं से पता चलता है कि वे नट्स, बीज, कंद और जड़ों जैसे कठिन खाद्य पदार्थों का सेवन करने में सक्षम थे। उनकी लंबाई लगभग 3 फुट 9 इंच से 4 फुट 11 इंच की औसत के करीब थी और उनका वजन लगभग 30 से 50 किलोग्राम के बीच हुआ तकता था। जिसमें नर मादाओं के आकार से लगभग दोगुने थे।

स्टेर्कफोंटिन गुफाएं क्या हैं?

स्टेर्कफोंटिन गुफाएं क्या हैं?

स्टेर्कफोंटिन गुफाओं को "मानव जाति का पालना" भी कहा जाता है, जो 47,000 हेक्टेयर पुरापाषाणकालीन स्थल है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। जोहान्सबर्ग से 40 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित, इसमें चूना पत्थर की गुफाओं की एक जटिल प्रणाली है, जहां महत्वपूर्ण संख्या में होमिनिन जीवाश्म पाए गए हैं। स्टेर्कफोंटिन, गुफाओं की एक जटिल प्रणाली है, जिसमें होमिनिन कब्जे का एक लंबा इतिहास है और इसमें दुनिया में सबसे बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलोपिथेकस जीवाश्म शामिल हैं। यह प्राचीन स्थल, पिछले 40 लाख सालों में मनुष्यों और पर्यावरण के विकास का पता लगाने वालों के लिए एक अमूल्य संसाधन रहा है। वैज्ञानिकों ने पहली बार 1936 में इन चूना पत्थर की गुफाओं के ऐतिहासिक महत्व को समझा था, जब जीवाश्म विज्ञानी रॉबर्ट ब्रूम ने साइट के भीतर पहले वयस्क आस्ट्रेलोपिथेकस जीवाश्म की खोज की थी।

नये जीवाश्म पर मिला शोध क्या कहता है?

नये जीवाश्म पर मिला शोध क्या कहता है?

दक्षिण अफ्रीका में जो अब नया मानव जीवाश्म मिला है, उसके बारे में समझने के लिए मानव विज्ञानी डैरिल ई ग्रेंजर और अध्ययन में शामिल अन्य शोधकर्ताओं ने उनकी उम्र का पता लगाने के लिए, कंक्रीट जैसे पदार्थ में मौजूद जीवाश्म एम्बेडेड का विश्लेषण किया है। रिसर्च में उन्होंने पाया कि सभी आस्ट्रेलोपिथेकस 34 लाख साल से 37 लाख साल पहले स्टेर्कफोंटिन गुफा में रहते थए। यह तिथि इन जीवाश्मों को इसके अंत के बजाय, आस्ट्रेलोपिथेकस युग की शुरुआत के करीब रखती है। वैज्ञानिकों ने पहले अनुमान लगाया था, ये कि अवशेष 20 से 25 लाख साल पुराने हैं, जो आस्ट्रेलोपिथेकस जीवाश्मों के पास जीवों के अवशेषों के अध्ययन के आधार पर थे। इसलिए उन्होंने तर्क दिया था कि ये दक्षिण अफ़्रीकी आस्ट्रेलोपिथेकस होमो जीनस में विकसित होने के लिए बहुत छोटे थे, जिससे हम संबंधित हैं, और उनका इतिहास लगभग 30 लाख साल पुराना है।

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English summary
Research done on many human fossils found from a cave in South Africa shows that our history is older than whatever research was done so far about the origin of humans.
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