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किम जोंग उन की रहस्यमयी दुनिया के बारे में कितना जानते हैं आप

By Bbc Hindi

किम जोंग उन की रहस्यमयी दुनिया के बारे में कितना जानते हैं आप

सात और आठ मई को चीन के दालियान एयरपोर्ट पर खड़े उत्तर कोरिया के रहस्यमयी विमान को लेकर तमाम तरह की अटकलों का बाज़ार गर्म था.

आख़िरकार पता चला कि ये विमान उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन का था, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात करने इस समुद्रतटीय शहर पहुँचे थे.

दोनों नेताओं की मुलाक़ात सुर्ख़ियों में रही लेकिन साथ ही किम जोंग उन का यह विमान भी चर्चा में रहा.

हाल के महीनों में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बढ़ी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों से दुनिया को उनके सफ़र के साधनों के बारे में जानने का मौका मिला है. इस दौरान किम जोंग उन ने जितनी भी यात्राएं की हैं, सभी में नए यातायात साधन का इस्तेमाल किया गया.

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हवाई जहाज

किम जोंग उन ने इस हफ़्ते चीन का दौरा किया. जिसे सत्ता संभालने के बाद से उनके पहले आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किम जोंग उन उत्तर कोरिया के भीतर अपने निजी जेट का इस्तेमाल पहले भी कर चुके हैं.

जिस विमान से वो चीन गए वो रूस में बना लंबी दूरी का विमान द इल्यूशिन-62 (II-62) था. एनके न्यूज़ वेबसाइट को उत्तर कोरिया पर नज़र रखने वालों ने बताया कि इसे स्थानीय बाजों की एक प्रजाति 'शैमी-1' के नाम से जाना जाता है.

सफ़ेद विमान के बाहरी हिस्से पर दोनों तरफ़ कोरियाई भाषा के बड़े अक्षरों में उत्तर कोरिया लिखा है और इसके साथ ही राष्ट्रीय झंडा बना हुआ है. विमान के पिछले हिस्से में नीले और लाल घेरे के बीच लाल रंग का एक स्टार बना हुआ है.

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विमान के भीतर अत्याधुनिक सुविधाएं हैं और इस विमान के अंदर काम करते या मीटिंग लेते किम जोंग उन की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं.

'शैमी-1' पहली बार फरवरी के महीने में सुर्खियों में तब आया जब इसमें उच्च स्तरीय उत्तर कोरियाई ओलंपिक प्रतिनिधिमंडल दक्षिण कोरिया गया, उसमें किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग भी शामिल थीं.

दक्षिण कोरियाई न्यूज़ एजेंसी योनहैप की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस उड़ान ने पीआरके-615 पहचान संख्या का इस्तेमाल किया जो संभवतः 15 जून 2000 को दोनों देशों के बीच हुए संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर का परिचायक हो सकता है.

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इसके अलावा किम जोंग उन को यूक्रेन के एंतोनोव-148 का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया है, जिस पर एयर कोरयो का लोगो भी है, जैसा कि साल 2014 में कोरियन सेंट्रल टेलीविज़न (केसीटीवी) पर प्रसारित एक आधिकारिक डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया था.

किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल और उनके दादा किम II-संग हवाई यात्राओं से परहेज करते थे, रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें इससे डर लगता था. हालांकि किम जोंग उन को ऐसा कोई डर नहीं है और साल 2015 में तो सरकारी मीडिया में उनके कुछ वीडियो भी आए थे जिसमें वो हल्के स्वदेशी विमान और दो पंखों वाले एएन-2 मिलिट्री विमान उड़ाते नज़र आए थे.

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बिग ट्रेन

जब किम जोंग उन ने मार्च के महीने में चीन की यात्रा की थी तो वहां वो एक खास ट्रेन से पहुंचे थे. ऐसा माना गया कि ये वो ही ट्रेन है जिसे उनके पिता दिसंबर 2011 में अपनी मौत से पहले विदेशी दौरों के लिए इस्तेमाल किया करते थे.

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'गहरे हरे रंग और उस पर पीले रंग की पट्टी' वाली इस ट्रेन की तस्वीरें चीन के सोशल नेटवर्क सीना वीबो पर वायरल हो गईं और लोगों ने इस ट्रेन की तुलना उनके पिता किम जोंग इल के ट्रेन से की.

साल 2009 में एक दक्षिण कोरियाई समाचार पत्र 'द चोसन इल्बो' ने लिखा था कि किम जोंग इल की बख़्तरबंद ट्रेन में क़रीब 90 डिब्बे थे. उसमें कॉन्फ्रेंस रूम, ऑडियन्स चेंबर, बेडरूम था और सैटेलाइट फ़ोन-टीवी कनेक्शन भी लगे हुए थे.

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उत्तर कोरिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, किम जोंग-इल की मौत भी इसी अधिकारिक ट्रेन में हुई थी जब वो उत्तर कोरिया के बाहर एक मुआयने पर थे.

2011 में केसीटीवी की फुटेज पर एक सूत्र ने 'द चोसन इल्बो' को बताया कि इस रेलगाड़ी में दुनिया की सबसे महंगी वाइन होती थी. ट्रेन में शानदार पार्टी हुआ करती थी. किम जोंग इल ने इस रेलगाड़ी से क़रीब 10-12 दौरे किए जिनमें से ज़्यादातर चीन के थे.

दक्षिण कोरिया की साल 2009 की न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक किम जोंग के लिए हाई-सिक्योरिटी वाले कम से कम 90 कोच तैयार रहते हैं. इसका हर डब्बा बुलेटप्रूफ़ होता है, जो सामान्य रेल कोच की तुलना में कहीं ज़्यादा भारी होता है. ज़्यादा वजन होने की वजह से इसकी रफ़्तार कम होती है. अनुमान के मुताबिक़ इसकी अधिकतम स्पीड 37 मील प्रति घंटे तक जाती है.

2009 की रिपोर्ट के मुताबिक़ किम जोंग इल के दौर में 100 सुरक्षा अधिकारी एडवांस्ड ट्रेन में होते थे और उनकी ज़िम्मेदारी होती थी स्टेशन की जांच-पड़ताल करना. इसके अलावा ज़्यादा सुरक्षा मुहैया कराने के लिए ट्रेन के ऊपर सैन्य हेलिकॉप्टर और एयरप्लेन भी उड़ान भरते थे.

एक और चौंकाने वाली बात ये है कि उत्तर कोरिया में अलग-अलग जगह ऐसे 22 रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं जो किम जोंग के व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए हैं. साल 2015 में इसी ट्रेन के एक कोच में किम जोंग उन एक लंबी सफ़ेद टेबल पर बैठे नज़र आए थे जो एक कॉन्फ़्रेंस रूम की तरह दिख रहा था.

र्सिडीज़ बेंज़

अपने चीन दौरे में किम जोंग उन ने शहर में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए अपनी मर्सिडीज़ बेंज़ एस क्लास का इस्तेमाल किया था.

दक्षिण कोरियाई अख़बार जूंगआंग इल्बो के मुताबिक़ इस कार को ख़ासतौर पर किम जोंग उन की ट्रेन से ही लाया गया था.

अख़बार के मुताबिक़, ये कार साल 2010 में बनाई गई थी और इसे बनाने में क़रीब 12 करोड़ रुपये का ख़र्च आया था. 27 अप्रैल को पनमुनजोम में कोरियाई शिखर सम्मेलन के दौरान किम जोंग उन की इस एस-क्लास ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.

इसके अलावा 2015 में आई एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया था कि किम के काफिले की गाड़ियों में एक निजी टॉयलेट कार भी साथ चलती है ताकि ताकि लंबे दौरों में उन्हें परेशानी न हो.

सोल की एक वेबसाइट डेली एनके के मुताबिक यह गाड़ी किम जोंग उन के बख्तरबंद काफिले का हिस्सा है.

रहस्यमयी नौका

उत्तर कोरिया की मीडिया में कई बार किम जोंग उन को नाव, पन्डुब्बी, बस और यहां तक कि स्की लिफ्ट की सवारी करते हुए दिखाया जाता है.

मई 2013 में जब सरकारी मीडिया ने सेना के फीशिंग स्टेशन पर उनकी एक तस्वीर छापी तो उनके पीछे एक नाव दिखाई दे रही थी. लगभग 47 करोड़ की यह नाव किम जोंग उन की थी या नहीं इसकी कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है या न ही इस बात की कि लक्ज़री सामानों के आयात पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद इसे कैसे लाया गया.

हालांकि इसकी कीमत को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे किम जोंग उन का होने से इनकार किया है.

जून 2015 में वॉशिंगटन स्थित रेडियो फ्री एशिया ने एक शोध के आधार पर कहा कि उत्तर कोरिया में किम के लेकसाइड विला में एक नया हेलीपैड देखा गया है. जॉन हॉपकिन्स स्कूल ऑफ़ एडवांस इंटरनेशनल स्टडी के शोधार्थियों के मुताबिक इसे किम जोंग उन का परिवार और उनके अतिथि इस्तेमाल करते होंगे.

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