क्या रूस वास्तव में यूक्रेन पर हमला कर सकता है?

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मास्को, 03 दिसंबर। इस साल अक्टूबर के महीने में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो साझा किए गए जिनमें रूसी सैनिकों, टैंकों और मिसाइलों को यूक्रेन की सीमा की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया था. उस समय यूक्रेन ने कहा था कि रूस ने अपनी सीमा के पास 1,15,000 सैनिकों को तैनात किया है. यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगी लंबे समय से रूस पर यूक्रेन के अलगाववादियों को हथियारों की आपूर्ति करने का आरोप लगाते रहे हैं. यूक्रेन के मुताबिक उन्हीं अलगाववादी समूहों ने 2014 में रूस को क्रीमिया पर कब्जा करने में मदद की थी. रूस ने उन आरोपों से इनकार किया था.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने पिछले महीने कहा था कि वॉशिंगटन रूस की "असाधारण" गतिविधियों के बारे में चिंतित है. उन्होंने मॉस्को को 2014 की गंभीर गलती करने से बचने की चेतावनी दी.

रूस की कूटनीतिक चाल?

कुछ विश्लेषकों के मुताबिक रूस ने इस साल के वसंत में यूक्रेनी सीमा पर अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि की. उनकी राय में, रूस ऐसा करके राजनयिक फायदा हासिल करना चाहता था. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा शिखर सम्मेलन की घोषणा के बाद रूस द्वारा सैनिकों को सीमा से हटा दिया गया था. कुछ जानकारों के मुताबिक रूस का ताजा कदम एक बार फिर नया दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है, क्योंकि अमेरिका और रूस के राष्ट्रपतियों के बीच एक और शिखर वार्ता होने की संभावना है.

कुछ पर्यवेक्षकों के अनुसार यूक्रेन ने नाटो सदस्य तुर्की से ड्रोन हासिल करके रूस को नाराज किया है, अलगाववादियों के खिलाफ तुर्की ड्रोन का उपयोग करने वाले यूक्रेनी सेना ने ड्रोन की फुटेज जारी होने के बाद सीमा पर रूस की सेना की बढ़ोतरी की सूचना मिली थी.

रूस का आरोप

रूस ने पश्चिम पर काला सागर में सैन्य अभ्यास करने और यूक्रेन को आधुनिक हथियार मुहैया कराने का आरोप लगाया है. रूस ने यह भी मांग की है कि नाटो गारंटी दे कि उसकी सैन्य महत्वाकांक्षाएं पूर्व की ओर नहीं फैलेंगी.

अमेरिका, नाटो और यूरोप ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के खिलाफ रूस को बार-बार चेतावनी दी है. अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन भी जल्द ही अपने रूसी समकक्ष सेर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे. इसी हफ्ते की शुरुआत में लावरोव ने यूक्रेन के सैन्य इरादों पर चिंता व्यक्त की थी. उनके मुताबिक कीव ने पूर्वी सीमा पर 1,25,000 सैनिकों को तैनात किया है.

जॉर्जिया जैसा ना हाल हो जाए

रूस पश्चिमी देशों के आरोपों से इनकार करता आया है. मॉस्को के मुताबिक इस साल के वसंत में रूस के बारे में इसी तरह की चिंता व्यक्त की जा रही थी, लेकिन रूस द्वारा ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई. रूस ने 2008 में जॉर्जिया के कुछ हिस्सों पर बमबारी की थी. जॉर्जिया तब अपने ही अलगाववादियों को निशाना बना रहा था. रूस की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के एक हालिया बयान में कहा गया है कि यूक्रेन को जॉर्जिया के नाटो में शामिल होने जैसे निर्णय लेने से बचना चाहिए क्योंकि जॉर्जिया को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी.

कार्नेजी मॉस्को सेंटर के आलेक्जेंडर बानोव ने समाचार एएफपी को बताया कि वह "बिना किसी कारण के आक्रमण की शायद ही कल्पना कर सकते हैं." वे सवाल करते हैं कि इस हमले से रूस को क्या हासिल होगा.

एए/सीके (एएफपी)

Source: DW

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