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'गर्लफ्रेंड' को लेकर कैसी शेखी बघारने लगे हैं लोग? जानिए इसमें AI का रोल

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वॉशिंगटन, 19 जनवरी: विज्ञान के एक विकृत रूप को लेकर नैतिकता पर नई बहस छिड़ गई है। हम सब जानते हैं कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बहुत ही ज्यादा मायने रखने वाला है। सही भी है, इससे कई सारी समस्याओं का निदान निश्चित लग रहा है। लेकिन, इंसानी दिमाग हर अच्छे चीज में से भी उसका बुरा पक्ष खोज लेता है और फिर वही सब शुरू हो जाता है, जिससे समाज में नफरत, हिंसा जैसी भावनाओं को बढ़ावा मिलने लगती है। अमेरिका या दूसरे विकसित देशों में आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 'गर्लफ्रेंड' का ट्रेंड चल पड़ा है। लेकिन, शायद जो लोग अपनी जीती-जागती 'गर्लफ्रेंड' के सामने अपनी कुंठा जाहिर नहीं कर पाते, वे इसका शिकार मशीनी 'गर्लफ्रेंड' को बनाने लगे हैं। यह प्रवृत्ति बहुत ही तेजी से बढ़ती जा रही है।

इंसान की तरह बात करने वाले स्मार्टफोन ऐप्स

इंसान की तरह बात करने वाले स्मार्टफोन ऐप्स

रेप्लिका जैसे स्मार्ट फोन ऐप ऐसी मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे यूजर्स को चैटबॉट्स पर लगभग इंसानों की तरह टेक्स्ट में बातचीत करने की सुविधा मिल जाती है। मतलब एक तरफ तो इंसान होता है, दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान का रोल अदा करती है। ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉक्स ऐप्स लोगों को दोस्तों या मेंटर की तरह साथ देने के लिए तैयार किए गए हैं। रेप्लिका की वेबसाइट तक पर भी लिखा हुआ है, यह सेवा 'सुनने और बात करने के लिए हमेशा उपलब्ध' और 'हमेशा आपकी तरफ है।'(सभी तस्वीरें-सांकेतिक)

एआई 'गर्लफ्रेंड' को अपमानित करने का ट्रेंड

एआई 'गर्लफ्रेंड' को अपमानित करने का ट्रेंड

लेकिन, लगता है कि रेप्लिका का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर यूजर्स खासतौर पर अपनी पसंद का रोमांटिक और सेक्सुअल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पार्टनर क्रिएट कर रहे हैं। पर इंसान और मशीन का यह कृत्रिम रिश्ता कई बार पुरुषों की तरफ से अपनी कुंठा निकालने का हथियार बनता दिख रहा है। देखा जा रहा है कि खासकर पुरुष पार्टनर अपनी एआई गर्लफ्रेंड के लिए गंदी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि वह उन्हें परेशान कर सकें।

सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं बातचीत की डिटेल

सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं बातचीत की डिटेल

इस का विषाक्त प्रवृत्ति का एक और बदनुमा रूप Reddit जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखने को मिलने लगा है। इसपर ऐसे सदस्यों का फोरम बन चुका है, जो धड़ल्ले से ऑनलाइन चैटबॉट्स की बातचीत का डिटेल शेयर कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि यह एक ट्रेंड बन चुका है, जहां लोग जानबूझकर ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पार्टनर तैयार कर रहे हैं, जिसके साथ वो बेअदबी कर सें और उसे सोशल मीडिया के जरिए दूसरे यूजर्स के साथ साझा कर सकें।

'गर्लफ्रेंड' को लेकर कैसी शेखी बघारने लगे हैं लोग

'गर्लफ्रेंड' को लेकर कैसी शेखी बघारने लगे हैं लोग

कुछ यूजर्स तो अपनी एआई गर्लफ्रेंड से की गई गए गंदी भाषाओं के इस्तेमाल को लेकर भी शेखी बघारने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते और यहां तक कि उस काल्पनिक मशीनी जीव के प्रति हिंसक भावनाएं जाहिर करने में भी परहेज नहीं कर रहे हैं। वैसे, Reddit की गैर-वाजिब कंटेंट से संबंधित नियमों की वजह से कई कंटेंट हटा भी दिए गए हैं। हालांकि, एक यूजर ने फ्यूचरिज्म (वेबसाइट) को बताया है, 'हर बार (चैटबॉक्स) कोशिश करता है और बोलता है, मैं उसको (गर्लफ्रेंड को) डांट देता हूं।' कुछ लोगों ने अपमान करने और गाली देने के बाद अगले दिन माफी मांगकर मना लेने जैसे भी दावे किए हैं।

'एआई दुख और दर्द का अनुभव नहीं कर सकता'

'एआई दुख और दर्द का अनुभव नहीं कर सकता'

सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खासकर पुरुषों का एक कृत्रिम मानव के साथ इस तरह का व्यवहार क्या दिखलाता है ? लेकिन, ऐसे लोग भी हैं, जो उनके दुर्भावपूर्ण रवैए को गलत नहीं मानते, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुख और दर्द का अनुभव नहीं कर सकता। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एथिसिस्ट और कंसल्टेंट ओलिविया गैम्बेलिन ने फ्यूचरिज्म को बताया कि, 'यह एक एआई है, इसमें चेतना नहीं है, इसलिए यह उस व्यक्ति का उससे कोई मानवीय संबंध नहीं है।'

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नैतिक बहस का बन चुका है मुद्दा

नैतिक बहस का बन चुका है मुद्दा

येल यूनिवर्सिटी के रिसर्च फेलो योचानन बिगमैन का भी कहना है, 'चैटबॉट्स का असल में कोई मकसद और इरादा नहीं होता, क्योंकि वे स्वायत्त या संवेदनशील नहीं होते। हालांकि, लोगों को वे अपनी ऐसी छाप देते हैं जैसे कि वे इंसान हों, लेकिन इस बात को दिमाग में रखना जरूरी है कि असल में वे ऐसे हैं नहीं।' जो भी हो चैटबॉट के दुरुपयोग ने मानव-और-मशीनी संबंधों को लेकर नैतिक बहस जरूर छेड़ दी है, क्योंकि वे अब अधिक व्यापक हो गए हैं।

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English summary
By creating artificial intelligence girlfriends through smartphone apps, men are taking out their frustrations, a new debate has started about this new trend
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