Hormuz Strait Crisis: ईरान का ‘टोल टैक्स' मॉडल, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा? समझें पूरा खेल
Hormuz Strait Crisis: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी संकरे समुद्री रास्ते से होती है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की वजह से मौजूदा हालात में यह अहम जलमार्ग लगभग ठप पड़ गया है। यह स्थिति भारत की मुश्किलें बढ़ा सकता है और खास तौर पर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां शांति के समय रोजाना 100 से 135 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या बेहद कम हो गई है। मार्च की शुरुआत से अब तक कई जहाजों पर हमले हुए हैं, जिससे समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेल संकट का असर है कि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

Hormuz Strait Crisis: ईरान वसूल रहा तगड़ा टोल टैक्स
- इस बीच ईरान ने एक नई रणनीति अपनाई है। उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने के बजाय अपने नियंत्रण वाले इलाके में एक 'सेफ कॉरिडोर' बनाया है।
- यह कॉरिडोर लराक आइलैंड के पास स्थित है, जहां ईरान की सेना आईआरजीसी (Islamic Revolutionary Guard Corps Navy) की निगरानी रहती है।
- इस कॉरिडोर से गुजरने के लिए जहाजों को पहले अपनी पूरी जानकारी, जैसे कि माल, मालिक और गंतव्य देनी होती है। इसके बाद IRGC अपने स्तर पर वेरिफिकेशन करता है और अनुमति मिलने पर ही जहाज आगे बढ़ सकते हैं।
- सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में इस रास्ते से गुजरने के लिए करीब 20 लाख डॉलर (लगभग ₹16 करोड़) तक की फीस भी वसूली जा रही है।
Hormuz Strait Update: ईरान बढ़ा रहा भारत की टेंशन
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस रणनीति के जरिए होर्मुज को एक तरह का 'टोल बूथ' बना दिया है। इससे वह न सिर्फ आर्थिक लाभ उठा रहा है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी नियंत्रण स्थापित कर रहा है। इस स्थिति का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है। भारत के करीब 22 जहाज और 600 से ज्यादा क्रू मेंबर इस क्षेत्र में मौजूद बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, भारत अपनी LPG जरूरतों का 90% से ज्यादा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है, जिसे तुरंत किसी दूसरे स्रोत से बदलना मुश्किल है।
India Iran Relation: ईरान की वजह से बड़ा ऊर्जा संकट?
हालांकि, भारत ने भारतीय नौसेना के जहाजों को अरब सागर में तैनात किया है, लेकिन लंबे समय तक हर जहाज को सुरक्षा देना आसान नहीं है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल के विकल्प तो रूस, अमेरिका या अफ्रीका से मिल सकता है। हालांकि, एलपीजी (LPG) के मामले में भारत की निर्भरता फिलहाल बनी रहेगी। यही इस संकट का सबसे बड़ा जोखिम है।
हार्मुज का यह संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो इसका असर तेल की कीमतों से लेकर आम लोगों की जेब तक महसूस किया जाएगा।












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