चीन में देशभक्ति को लेकर कंफ्यूज हो रहे लोग, शी जिनपिंग ने पारित किया ऐसा कानून, कि परेशान हुई जनता
चीन ने देश में देशभक्ति की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मंगलवार को एक राष्ट्रीय कानून पारित किया है। इस कानून का उद्देश्य जीवन के सभी पहलुओं में चीनी युवाओं के बीच राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी पैदा करना है।
चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक इस कानून का उद्देश्य 'ऐतिहासिक शून्यवाद' जैसी चुनौतियों का मुकाबला करना और 'राष्ट्रीय एकता' की रक्षा करना है। ये कानून स्कूल, कॉलेज में देशभक्ति से जुड़ी बातें पढ़ाने को लीगल गारंटी देता है।

सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, देशभक्ति शिक्षा कानून चीन की राष्ट्रीय विधायिका नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के एक सत्र में पारित किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ लोग देशभक्ति क्या है, इस बारे में असमंजस में हैं। उन्हें इसके प्रति जगरूक करने की जरूरत है। ये कानून 1 जनवरी 2024 से लागू होगा।
ऐतिहासिक शून्यवाद क्या है?
'ऐतिहासिक शून्यवाद' का उपयोग चीन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अतीत की घटनाओं के विवरण पर सार्वजनिक संदेह और संशय का वर्णन करने के लिए किया जाता है। चीन में इस शब्द का प्रयोग अधिकारियों द्वारा लंबे समय से किया जाता रहा है।
हालांकि इस शब्द को पहली बार आम लोगों ने तब जाना जब 2013 में शी जिनपिंग के पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान एक दस्तावेज लीक हो गया था। इस दस्तावेज संख्या 9 में 'ऐतिहासिक शून्यवाद' को पार्टी के सामने आने वाले 7 वैचारिक खतरों में से एक माना गया था।
चीन में जब लोगों का भरोसा कम्युनिस्ट पार्टी से उठने लगे या पार्टी की काबिलियत पर शक होने लगे तो इसे हिस्टोरिकल नाइलीज्म कहा जाता है। कोई भी तथ्य, आँकड़ा, राय या स्मृति जो आधिकारिक लाइन में फिट नहीं बैठती है, उसे पार्टी के हिस्टॉरिकल नाइलीज्म यानी कि ऐतिहासिक-शून्यवाद विरोधी अभियान के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है।
चीन में पिछले साल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के शताब्दी समारोह से पहले के महीनों में कथित तौर पर "ऐतिहासिक शून्यवाद का प्रसार" करने वाले 2 मिलियन से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए गए थे। चीनी अधिकारियों के मुताबिक इतिहास या तो आधिकारिक इतिहास है, या यह कुछ भी नहीं, अविश्वास, शून्यवाद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने इसे देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए अधिनियमित किया है मगर ये नया कानून तर्कसंगत, समावेशी और खुले विचारों वाला है। ये कानून देश को दुनिया के लिए खोलने और अन्य सभ्यताओं को अपनाने की आवश्यकता पर जोर देता है।
कानून के अनुसार, देशभक्ति शिक्षा "अन्य देशों के इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करती है और मानव सभ्यता की सभी उत्कृष्ट उपलब्धियों से प्रेरणा लेती है"।
रिपोर्ट के अनुसार, इस कानून में पहले से ही राष्ट्रगान कानून और नायकों और शहीदों की सुरक्षा पर कानून जैसे प्रावधान शामिल हैं। चीन में, वे कानून उन कृत्यों पर प्रतिबंध लगाते हैं जिन्हें राष्ट्रीय ध्वज का अपमान माना जाता है और राष्ट्रीय नायकों को विकृत या नकारा जाता है।
राज्य समर्थित चाइना डेली की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून में हांगकांग और मकाऊ के साथ-साथ ताइवान के विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों में सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, ग्रामीणों और निवासियों सहित लोगों के विभिन्न समूहों के लिए भी लक्षित उपाय किए गए हैं।












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