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जानिए, अचानक क्यों उबलने लगे कनाडा और अमेरिका

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टोरंटो, 1 जुलाई: उत्तर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तापमान बढ़ने से पश्चिमी कनाडा और अमेरिका के ऑरेगन व वॉशिंगटन राज्यों में गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. ऑरेगन के अधिकारियों बुधवार को कहा कि कम से कम 60 लोगों की जान इस गर्मी के कारण गई है. राज्य की सबसे बड़ी काउंटी मल्टनोमा में ही 45 लोग गर्मी की भेंट चढ़ चुके हैं.

Provided by Deutsche Welle

ब्रिटिश कोलंबिया के कोरोनर विभाग की प्रमुख लीसा लापोएंटे ने कहा कि उनके दफ्तर को कम से कम 486 लोगों की अचानक और अनपेक्षित जान जाने की सूचना मिली है. ये मृत्यु बीते शुक्रवार और बुधवार के बीच ही हुई हैं. आमतौर पर राज्य में इतने समय में लगभग 165 लोगों की मौत होती है.

लापोएंटे ने एक बयान जारी कर कहा, "वैसे तो फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इनमें से कितनी मौतें गर्मी के कारण हुई होंगी, लेकिन ऐसा माना जाता है कि मरने वालों की संख्या में हुई यह बढ़ोतरी अत्यंत कठोर मौसम से संबंधित है."

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अमेरिका के सिएटल की तरह कनाडा के वैंकूवर और ब्रिटिश कोलंबिया में भी बहुत से घरों में एयर कंडिशन नहीं होते. वैंकूवर के पुलिस सार्जेंट स्टीव ऐडिसन ने कहा, "वैंकूवर ने ऐसी गर्मी पहले कभी नहीं देखी. और अफसोस की बात है कि दर्जनों लोग इसके कारण मर रहे हैं."

अमेरिका के वॉशिंगटन में अधिकारियों ने 20 से ज्यादा मौतों को गर्मी से जोड़ा है. और यह संख्य बढ़ने की आशंका है.

क्यों पड़ी गर्मी?

मौसमविज्ञानियों का कहना है कि उत्तर पश्चिम में उच्च दबाव का क्षेत्र बनने से गर्मी की यह लहर पैदा हुई है, लेकिन इसे खतरनाक हद तक ले जाने के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भविष्य में ऐसे कठोर मौसमी हालात और ज्यादा देखने को मिलेंगे.

सिएटल, पोर्टलैंड और अन्य कई शहरों में तो तापमान के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. कई जगह तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है. हालांकि पश्चिमी वॉशिंगटन, ऑरेगन और ब्रिटिश कोलंबिया में बुधवार के बाद तापमान में कमी आई है, कई अंदरूनी इलाके अब भी गर्मी की मार झेल रहे हैं.

एनवायर्नमेंट कनाडा विभाग ने चेतावनी दी है कि अब दक्षिणी अल्बर्टा और सस्काचेवान में गर्मी बढ़ सकती है. अमेरिका में वॉशिंगटन के अलावा आइडहो और मोन्टाना में भी बहुत ज्यादा गर्मी की चेतावनी बनी हुई है. एनवायर्नमेंट कनाडा ने कहा, "अल्बर्टा में इस हफ्ते लंबी, खतरनाक और ऐतिहासिक गर्मी पड़ेगी."

जलवायु परिवर्तन के खतरे

ब्रेकथ्रू इंस्टीट्यूट में मौसम विशेषज्ञ जेके हाउसफादर के मुताबिक जलवायु परिवर्तन ना हुआ होता, तब भी प्रशांत उत्तरपश्चिम में गर्मी तो पड़ती, लेकिन वह इतनी भयानक न होती. उन्होंने बताया, "मौसम के लिए जलवायु स्टेरॉयड की तरह होता है. अगर कोई बेसबॉल या ओलंपिक खिलाड़ी स्टेरॉयड लेता है, तो कभी उनका प्रदर्शन अच्छा होगा, कभी खराब होगा. लेकिन उनके औसत प्रदर्शन में सुधार हो जाए. यही चीज जलवायु मौसम के साथ कर रही है. इसलिए ऐसे कठोर मौसमी दौर ज्यादा देखने को मिलेंगे."

वैज्ञानिक गर्मी की इस लहर की सटीक वजहों का अध्ययन करने की योजना पर काम कर रहे हैं. वॉशिंगटन यूनिवर्सटी में मौसम विज्ञानी कैरिन बम्बाको कहती हैं कि इसकी कुछ जिम्मेदारी तो जलवायु परिवर्तन की बनती ही है. विशेषज्ञ कहते हैं कि आने वाले समय में इस तरह की गर्मी कब पड़ेगी, इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल है. हाउसफादर कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण जो नुकसान हो चुका है, उसकी भरपाई भी मुश्किल है. वह कहते हैं, "दुर्भाग्य से, अगर हमारे पास कोई जादू की छड़ी होती जो हमारे कार्बन उत्सर्जन को जीरो कर देती, तो भी दुनिया दोबारा ठंडी नहीं होगी. अब हमें यह गर्मी झेलनी ही होगी. और इसलिए, हमें ऐसे कठोर मौसमों की आदत डालनी होगी."

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

Source: DW

English summary
historic northwest heat wave may have killed 100s
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