हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत पर इस्लामिक देशों में दो फाड़, जानिए किसने बहाए आंसू, कौन बजा रहा तालियां?

Hassan Nasrallah News: लेबनान की राजधानी बेरूत में इजराइली हमलों में हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत पर मुस्लिम जगत में दो भागों में बंटा नजर आ रहा है। जहां एक तरफ एक वर्ग इस हत्या से "आक्रोशित" नजर आ रहा है, और सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहा हैं, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा वर्ग भी था जो इस पूरी घटना का जश्न मना रहा है।

हिज्बुल्लाह नेता की मौत की सदमे की लहरें भारत तक भी पहुंचीं हैं। और लेबनान में नसरल्लाह की मौत के बाद कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। वहीं, प्रदर्शन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने हिज्बुल्लाह नेता की हत्या पर शोक जताने के लिए अपना चुनाव अभियान एक दिन के लिए रोक दिया।

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वहीं, नसरल्लाह की मौत के बाद कश्मीर के का आसमान इजराइल विरोधी और अमेरिका विरोधी नारों से भर गया और प्रदर्शनकारियों ने हिज्बुल्लाह सुप्रीमो की तस्वीर के साथ सड़कों पर मार्च किया। ईरान में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए, जहां देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक दिन के शोक की घोषणा की।

हालांकि, मुस्लिम समाज का एक वर्ग ऐसा भी है, जिसने हिज्बुल्लाह प्रमुख की मौत का जश्न मनाया। नसरल्लाह और लेबनानी आतंकवादी समूह की तरफ से वर्षों से किए गए अत्याचारों को याद करते हुए कई लोगों ने नाच-गाकर और सड़कों पर उतरकर उनकी मौत का जश्न मनाया।

लिहाजा, सवाल उठते हैं, कि मुस्लिम दुनिया इतनी विभाजित क्यों है? इस विभाजन की जड़ क्या है? आइये जानते हैं।

नसरल्लाह की मौत से कश्मीर में 'आक्रोश' क्यों था?

आपके लिए जानना जरूरी है, कि दुनिया भले नसरल्लाह को आतंकी मानती थी, लेकिन तीन दशकों से ज्यादा समय तक हिज्बुल्लाह का नेतृत्व करने वाले नसरल्लाह, दुनिया भर के शिया समुदाय के बीच एक सम्मानित व्यक्ति था। कश्मीर में भी शिया समुदाय उसे "प्रतिरोध का प्रतीक" मानता था। हिज्बुल्लाह की तरफ से नसरल्लाह की मौत की पुष्टि किए जाने के कुछ ही समय बाद, श्रीनगर के सांसद मेहदी ने अपना चुनाव प्रचार बंद कर दिया।

महबूबा मुफ्ती ने यह भी घोषणा की, कि वह अपना चुनाव अभियान सस्पेंड कर देंगी। मुफ्ती ने ट्विटर के नाम से जाने जाने वाले एक्स पर लिखा, "लेबनान और गाजा के शहीदों, खास तौर पर हसन नसरल्लाह के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कल अपना अभियान रद्द कर रही हूं। हम इस दुख और अनुकरणीय प्रतिरोध की घड़ी में फिलिस्तीन और लेबनान के लोगों के साथ खड़े हैं।"

आपको बता दें, कि रविवार को उत्तरी कश्मीर की 16 सीटों के लिए चुनाव प्रचार का आखिरी दिन था, जहां 1 अक्टूबर को तीसरे और आखिरी चरण में मतदान होगा।

ईरान में नसरल्लाह की मौत पर प्रदर्शन

वहीं, ईरान में भी हिज्बुल्लाह नेता की मौत पर विरोध प्रदर्शन और शोक मनाया गया है, जो कि मुख्य रूप से शिया बहुल है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजराइल को चेतावनी दी है, कि नसरल्लाह की हत्या का बदला लिया जाएगा। खामेनेई ने ईरान में पांच दिनों के शोक की भी घोषणा की और 57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन की आपात बैठक बुलाने का आह्वान किया।

इतना ही नहीं, तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक बुलाने का भी आह्वान किया।

लेकिन क्या शिया-सुन्नी विभाजन वास्तव में मामला है? क्योंकि पाकिस्तान में भी प्रदर्शन हो रहे थे, जो मुख्य रूप से सुन्नी बहुल है। पाकिस्तान में, खासकर कराची शहर में झड़पें हिंसक हो गईं, औऱ प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और पुलिस ने उन्हें शहर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचने से रोकने के दौरान लाठी चार्ज किया।

पाकिस्तान की पुलिस ने वाणिज्य दूतावास की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी असद रजा ने कहा, कि प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने के बाद पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप किया। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार रजा ने कहा, "जब पुलिस ने उन्हें रोका और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के लिए उनके तय किए गए मार्ग की याद दिलाई, तो उनमें से कुछ हिंसक हो गए और पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए।"

तो आखिर नसरल्लाह की मौत का जश्न कौन मना रहा?

नसरल्लाह की मौत के बाद मध्य पूर्व में जश्न का माहौल देखा गया, चाहे वह सुन्नी बहुल सीरिया हो या शिया बहुल ईरान। सीरिया में सरकार के नियंत्रण से बाहर के इलाकों में रहने वाले लोगों ने नसरल्लाह की हत्या का जश्न मनाया, जिसमें जिहादियों की तरफ से संचालित विद्रोही गढ़ इदलिब भी शामिल है। ऑनलाइन प्रसारित वीडियो में, लोग शनिवार की सुबह सीरियाई झंडे लहराते और मिठाइयां बांटते हुए देखे गए।

सीरिया के कई विपक्षी नेता और कार्यकर्ता, हिज्बुल्लाह से नफरत करते, हैं क्योंकि लेबनानी समूह ने गृहयुद्ध के दौरान देश के कई इलाकों में विद्रोही ताकतों से लड़ाई लड़ी थी। इससे न केवल विपक्षी गुटों को भारी नुकसान हुआ बल्कि हजारों लोगों को देश छोड़कर भागना पड़ा।

ईरान के कुछ हिस्सों में भी जश्न मनाया गया। लेकिन यहां विरोध प्रदर्शन की प्रकृति थोड़ी अलग थी। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के अनुसार, कई ईरानी महिलाएं इस खबर का जश्न मनाती नजर आईं। वीडियो में लोग जोरदार तरीके से कह रहे थे, कि "ईरान के बच्चों, हसन नसरल्लाह की मौत पर सभी को बधाई संदेश भेजें और ईरानी राष्ट्र को बधाई दें।" इसके अलावा, वो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी धन्यवाद भी दे रहे थे।

इतना ही नहीं, शाह समर्थक ईरानी भी लंदन में इजराइली दूतावास के बाहर हिज्बुल्लाह नेता की मौत का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए। सऊदी अरब में कुछ प्रमुख हस्तियों ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके जश्न मनाया, जिसे उन्होंने "एक युग का अंत" और "अरब, इस्लाम और दुनिया के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक की मौत" कहा।

नसरल्लाह की मौत से हिज्बुल्लाह को भारी नुकसान

अगर हम मध्य पूर्व में नसरल्लाह की मौत का जश्न मना रहे समाज के वर्ग को देखें तो एक बात समान है, यानी मध्य पूर्व में अल्पसंख्यक और उत्पीड़ित समूह हिज़्बुल्लाह के प्रमुख की मौत पर खुशी मना रहे हैं। सीरिया के मामले में, सरकार का विरोध करने वाले समाज के वर्ग ने नसरल्लाह की मौत का जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए।

ईरान में भी इसी तरह का चलन देखा जा सकता है, जहां काफी महिलाएं खुश नज़र आईं। अब ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान अभी भी देश भर में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों से आहत है, जो कुछ साल पहले महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के थे।

इसलिए, यह कहना सही हो सकता है, कि ईरान की महिलाओं ने हिज़्बुल्लाह प्रमुख की मौत को ईरानी शासन की हार के रूप में देखा, जो लेबनानी आतंकवादी समूह का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। इतना ही नहीं, अल्पसंख्यक, विशेषकर लेबनान में गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक भी अनुभवी प्रमुख की मौत से खुश देखे गए, और इसे देश में शासन परिवर्तन की उम्मीद के रूप में देखा, जो तीन दशकों से आतंकवादी समूह के चंगुल में है।

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