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पिघल रहा है 'बर्फ का पहाड़', पूरे विश्व में तबाही की आशंका, डूब जाएंगे बांग्लादेश-मालदीव!

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नई दिल्ली, मई 19: इस प्लानेट पर दूसरा सबसे ज्यादा बर्फ ग्रीनलैंड के पेट में रखा हुआ है और ग्रीनलैंड के बर्फ को लेकर वैज्ञानिकों ने खतरे की घंटी बजा दी है। ताजा रपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनलैंड का बर्फ अब इतनी तेजी से पिघल रहा है, जहां से अब लौटना शायद अब संभव नहीं होगा। कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनलैंड बर्फ जितनी तेजी से पिघल रहा है उससे समुन्द्र में पानी का लेवल 23 फीट से ज्यादा बढ़ जाएगा, जो इस दुनिया में बर्बादी लाने के लिए काफी होगा। ग्रीनलैंड में बर्फ को लेकर कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी और आर्कटिक यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्वे ने संयुक्त तौर पर स्टडी की है, जिसमें बेहद चिंताजनक खुलासे किए गये हैं और रिपोर्ट में कहा गया है कि जो बर्बादी बर्फ पिघलने से आएगी, उसके सामने कोरोना वायरस कुछ भी नहीं है। ये रिसर्च सेन्ट्रल वेस्टर्न पार्ट में किया गया है, जो इस पृथ्वी पर मौजूद टॉप-5 ग्रीनलैंड में से एक है।

तेजी से पिघलता ग्रीनलैंड बर्फ

तेजी से पिघलता ग्रीनलैंड बर्फ

कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी और आर्कटिक यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्वे के शोधकर्ताओं ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर ग्रीनलैंड बर्फ की चादर पूरी तरह से पिघल जाती है तो दुनिया में बर्बादी फैलने से कोई रोक नहीं सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्फ की चादर इतनी तेजी से पिघल रही है कि आने वाले वक्त में समुन्द्र का लेवल 7 मीटर से ज्यादा बढ़ जाएगा, जिससे दुनियाभर के कई देशों मे जानलेवा बाढ़ आ जाएगी। इस रिसर्च में कहा गया है कि ग्रीनलैंड में बर्फ की चादर के पिघलने से महासगरों की धाराएं, मानसूनी इलाकों, वर्षावन पर काफी खतरनाक असर पड़ेगा। हालांकि, रिपोर्ट में अभी तक ये खुलासा नहीं हो पाया है कि क्या बर्फ की चादर पिघलने का सिलसिला अपने पिक प्वाइंट तक पहुंच चुका है या फिर पहुंचने वाला है, लेकिन रिपोर्ट में ये जरूर कहा गया है कि कुछ सालों में समुन्द्र का लेवल कुछ मीटर जरूर बढ़ जाएगा, जो बेहद खतरनाक बात साबित हो सकती है।

धरती पर अस्थिरता शुरू

धरती पर अस्थिरता शुरू

इस रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा है कि 'ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने का असर धरती पर दिखना शुरू हो गया है और अस्थिरता की तस्वीरें आनी शुरू हो गई हैं। ग्रीनलैंड में काफी तेजी से बर्फ के पिघलने का सिलसिला जारी है।' कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इस रिसर्च तो लीड करने वाले डॉ. निकल्स बोर्स ने कहा कि 'ग्रीनलैंड में तेजी से बर्फ का पिघलना काफी खतरनाक है। अभी हमारे पास एक हिस्से का ही रिपोर्ट है और रिसर्च है, जबकि खतरा इससे कहीं कहीं कहीं ज्यादा बड़ा है।' रिसर्चर्स ने सेन्ट्रल-वेस्टर्न ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर के जैकबशवन ड्रेनेज बेसिन के आंकड़ों से पता चला है कि बर्फ की चादर का एक हिस्सा नष्ट होने के कगार पर पहुंच चुका है। आपको बता दें कि जैकबशवन ड्रेनेज बेसिन के जरिए बर्फ की चादर या ग्लेशियरों से संबंधित आंकड़ों को एकत्रित किया जाता है। इसके तहत पिछले 140 सालों से आर्कटिक, ग्रीनलैंड, हिमालय में मौजूद बर्फ की चादर के पिघलने की दरों और बर्फ की चादर की ऊंचाईयों को लेकर अध्ययन किया जाता है और रिकॉर्ड रखा जाता है।

नष्ट होने के कगार पर बर्फ की चादर

नष्ट होने के कगार पर बर्फ की चादर

इस रिसर्च में शामिल टॉप के वैज्ञानिक रिपडल और बोअर्स ने 1880 के बाद सेन्ट्रल-वेस्टर्न ग्रीनलैंड में मौजूद बर्फ की चादर के पिघलने को लेकर गहरा विश्लेषण किया है और उसकी तुलना संबंधित मॉडल सिमुलेशन से की है। रिसर्च के दौरान दोनों वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि ग्रीनलैंड में बर्फ की चादर का हिस्सा काफी अस्थिर हो गया है और काफी तेजी से पिघलने की वजह से अब यह नष्ट होने के कगार पर पहुंच गया है। रिसर्च में यह भी कहा गया है कि बर्फ के पिघलने की रफ्तार इतनी ज्यादा है कि शायद अब इसे रोकना मुश्किल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्कटिक में भले ही गर्मी या ग्लोबल वार्मिग कम हो जाए, फिर भी यहां मौजूद बर्फ की चादर लगातार पिघलती रहेगी।

ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरनाक असर

ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरनाक असर

द गार्डियन से बात करते हुए रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक बोअर्स ने कहा कि 'हम लोग खतरे के कगार पर हैं। हर साल कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन काफी तेजी से हो रहा है, जिसकी वजह से बर्फ का निर्बाध गति से पिघलना जारी है और शायद अब तक शायद हम टिपिंग प्लाइंट को पार कर चुके हैं या पार कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि 'समुन्द्र में पानी का लेवल एक या दो मीटर बढ़ने में सैकड़ों साल लगते हैं और अगले एक हजार साल में ग्रीनलैंड का पूरा बर्फ पिघल जाएगा और शायद मानवता खत्म होने के कगार पर पहुंच जाए।' आपको बता दें कि ग्रीनलैंड की बर्फ की ये चादर करीब 17 लाख स्क्वायर किलोमीटर में फैली हुई है और वैज्ञानिकों ने कहा है कि करीब अगले 900 सालों में बर्फ की ये चादर पूरी तरह से पिघल जाएगी।

समुन्द्र लेवल बढ़ने की रफ्तार

समुन्द्र लेवल बढ़ने की रफ्तार

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर साल 2300 ईस्वी तक समुन्द्र का लेवल 1.2 मीटर बढ़ जाएगा वो भी तब जब 2015 पेरिस क्लाइमेट गोल को प्राप्त कर लिया जाएगा और जिस रफ्तार से बर्फ पिघल रही है, उसकी वजह से विश्व के कई बड़े बड़े शहर खतरे में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शंघाई से लंदन तक हर शहर खतरे में होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक फ्लोरिडा, भारत और बांग्लादेश भी खतरे की टॉप लिस्ट में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर समुन्द्र में पानी का लेवल 2 मीटर तक बढ़ जाए तो बांग्लादेश और मालदीव जैसे देश पूरी तरह से खत्म ही हो जाएगा।

तेजी से पिघल रहे हैं हिमालय के ग्लेशियर, भारत पर आने वाले सबसे बड़े खतरे का बजा अलार्मतेजी से पिघल रहे हैं हिमालय के ग्लेशियर, भारत पर आने वाले सबसे बड़े खतरे का बजा अलार्म

English summary
The snow sheet in Greenland is melting so fast that many countries are feared to be missing from the world map.
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