Israel-Hamas war: इजराइल के खिलाफ दुनियाभर में भारी प्रदर्शन, गाजा के समर्थन में लाखों लोग सड़क पर...
Israel-Hamas war: हमास ने 7 अक्टूबर को अचानक हमला कर इजराइल को हैरान कर दिया था, लेकिन उसके बाद इजराइली बमबारी में गाजा पट्टी कब्रिस्तान में बदल रहा है। इजराइल की बमबारी की वजह से गाजा पट्टी में कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हो गया है और फिलहाल, गाजा पट्टी के लोग बाकी दुनिया से कट गये हैं। हालांकि, एलन मस्क ने स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस गाजा पट्टी में बहाल करने की घोषणा की है, लेकिन तब तक गाजा पट्टी का संचार संपर्क बाहरी दुनिया से कटा हुआ है।
गाजा में चल रही इजराइली बमबारी के खिलाफ पूरी दुनिया में प्रदर्शन हो रहे हैं और लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लंदन से लेकर न्यूयॉर्क और तुर्की से लेकर पाकिस्तान और भारत के भी कई हिस्सों में गाजा पट्टी के समर्थन में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

इजराइल की सेना ने शनिवार की रात गाजा पट्टी में भीषण बमबारी की है और कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि इजराइल और हमास के बीच चल रहे इस संघर्ष में अभी तक 9 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर बच्चे हैं।
गाजा के समर्थन में दुनियाभर में रैलियां
फ़िलिस्तीनियों के प्रति समर्थन दिखाने के लिए शनिवार को यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के शहरों में सैकड़ों-हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं हैं। हालांकि, इजराइल ने फिर से साफ कर दिया है, कि जब तक वो हमास का नामो-निशान मिटा नहीं देता है, तब तक वो युद्धविराम नहीं करेगा।
लंदन में फिलिस्तीन के समर्थन में विशालकाय रैली निकाली गई है और लंदन से जो वीडियो फुटेज सामने आए हैं, उसमें लंदन ब्रिज पर हजारों लोगों को प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से इजराइल पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा, "यह हमास के बारे में नहीं है। यह फिलिस्तीनी जीवन की रक्षा के बारे में है।"
आपको बता दें, कि वाशिंगटन के रुख को दोहराते हुए, ऋषि सुनक की सरकार ने युद्धविराम का आह्वान करना बंद कर दिया है, और इसके बजाय गाजा में लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए मानवीय मदद पहुंचाने की वकालत की है।
ब्रिटेन ने इजराइल के अपनी रक्षा करने के अधिकार का समर्थन किया है।
फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय से शनिवार को जारी एक दैनिक रिपोर्ट के अनुसार, तीन सप्ताह पहले शुरू हुई इज़राइल की बमबारी के बाद से गाजा में मरने वालों की संख्या 8 हजार पार हो गई है, जिनमें ज्यादातर नागरिक भी शामिल हैं।
हमास के हमलों के खिलाफ पश्चिमी देशों की सरकारों का इजराइल के पक्ष में मजबूत समर्थन और सहानुभूति रही है, लेकिन इज़राइली प्रतिक्रिया ने अरब और मुस्लिम देशों में भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। मलेशिया के कुआलालंपुर में अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों की बड़ी भीड़ जुटी और नारे लगाए।
इस्तांबुल में एक विशाल रैली में सैकड़ों हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए, तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने कहा, कि इज़राइल एक कब्जाकर्ता था और उन्होंने हमास को एक फ्रीडम फाइटर ग्रुप कहा। उन्होंने हमास को आतंकवादी संगठन नहीं होने के बारे में अपना रुख दोहराया। जिसके बाद इजराइल ने तुर्की से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है।
इसके अलावा, इराक में भी फिलिस्तीन के समर्थन में रैलियां निकाली गई हैं और बगदाद के अलावा इराक के लोगों ने इजराइल के नियंत्रण वाले वेस्ट बैंक में भी रैली निकाली है। हेब्रोन में फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को इजरायली उत्पादों के वैश्विक बहिष्कार का आह्वान किया है। उन्होंने नारा लगाया, "फिलिस्तीन के बच्चों की हत्या में योगदान न दें।"
यूरोप में अन्य जगहों पर, लोग कोपेनहेगन, रोम और स्टॉकहोम की सड़कों पर उतर आए हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद से फ्रांस के कुछ शहरों ने रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। फ्रांस की सरकार इस डर में है, कि फ्रांस में भीषण प्रदर्शन हो सकते हैं। इसी साल फ्रांस हिंसक प्रदर्शन देख चुका है। हालांकि, पेरिस में प्रतिबंध के बावजूद शनिवार को एक छोटी रैली आयोजित की गई। दक्षिणी शहर मार्सिले में भी कई सौ लोगों ने मार्च किया।
न्यूज़ीलैंड की राजधानी वेलिंगटन में, हज़ारों लोगों ने फ़िलिस्तीनी झंडे और "फ़्री फ़िलिस्तीन" लिखी तख्तियां लेकर संसद भवन की ओर मार्च किया।












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