हमारी आकाशगंगा में पहली बार दिखे 'भूतिया कण', आंखों से क्यों नहीं आते नजर?
अंतरिक्ष अपने आप में बहुत से रहस्य समेटे हुए है। जैसे-जैसे स्पेस सेक्टर तरक्की कर रहा, वैसे-वैसे उन रहस्यों से पर्दा हटता जा रहा। अब वैज्ञानिकों को हमारी आकाशगंगा में घोस्ट पार्टिकल (भूतिया कण) मिले हैं। ये रोमांचक खोज, स्पेस रिसर्च की दिशा में कई नए रास्ते खोल सकती है।
Space.com के मुताबिक इन कणों को आप छू नहीं सकते हैं। इनको आप साधारण आंखों से देख भी नहीं सकते, क्योंकि ये भौतिक जगत के साथ मिलकर कोई क्रिया करते ही नहीं हैं। इस वजह से इनका नाम घोस्ट पार्टिकल रखा गया।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि ये पार्टिकल रेडियोएक्टिव क्षय से बनते हैं। कुछ ऐसा जो परमाणु रिएक्टरों में होता है, जब उच्च-ऊर्जा कण परमाणुओं से टकराते हैं। इन कणों को पहचानना बेहद मुश्किल है, क्योंकि वे भौतिक दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ मुश्किल से ही संपर्क करते हैं।
कैसे हुई खोज?
वैज्ञानिक आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी के जरिए आकाशगंगा को समझने की कोशिश कर रहे थे, तभी डिटेक्टर के जरिए उनको इस घोस्ट पार्टिकल का पता चला। ये कण पहली बार देखे गए। जांच में पता चला कि हमारी आकाशगंगा मिल्की वे पहली बार फोटोन की जगह इस तरह के कणों का इस्तेमाल कर रही है। इस हाई एनर्जी प्रोसेस से हमारी आकाशगंगा को आकार मिल रहा।
मामले में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुबीर सरकार ने कहा कि न्यूट्रिनो एक भूतिया कण है। ये मूल रूप से लगभग बिना द्रव्यमान के हैं। साथ ही अनिवार्य रूप से प्रकाश की गति से आगे बढ़ रहे। उनको देखने के लिए एक विशाल डिटेक्टर की जरूरत पड़ेगी।
Space.com के मुताबिक जिस ऑब्जर्वेटरी से ये खोज हुई है, जिसमें गीगाटन बर्फ का इस्तेमाल हुआ है। इसके अलावा उसमें 5000 से ज्यादा लाइट सेंसर हैं। ये उपकरण प्रकाश की अनोखी चमक को भी कैद कर लेता है, जो दुर्लभ घटनाओं से उत्पन्न होते हैं।












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